7 अगस्त 2026
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केरल बाढ़: पथानामथिट्टा में 2,500 से अधिक जानवरों को बचाने का अभियान, 20 टन चारा पहुँचाया जाएगा

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केरल बाढ़: पथानामथिट्टा में 2,500 से अधिक जानवरों को बचाने का अभियान, 20 टन चारा पहुँचाया जाएगा

सारांश

केरल के पथानामथिट्टा में बाढ़ का पानी पाँच दिनों से नहीं उतरा — और इंसानों के साथ-साथ 2,500 से अधिक जानवर भी फँसे हैं। 'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' का यह अभियान 2018 के बाद की सबसे भीषण बाढ़ में पशुपालकों की आजीविका बचाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

पथानामथिट्टा के 10 से अधिक गाँव बाढ़ से प्रभावित; 1,500 से अधिक मवेशी और बड़े जानवर संकट में।
'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' ने केरल पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर आपातकालीन अभियान शुरू किया।
बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 20 टन सूखा पशु आहार पहुँचाया जाएगा; 2,500 से अधिक जानवरों को लाभ मिलने की उम्मीद।
कई इलाकों में बाढ़ का पानी छह फीट तक ऊँचा; गाँव लगभग पाँच दिनों से जलमग्न — 2018 के बाद सबसे गंभीर स्थिति।
पशुपालन पथानामथिट्टा के परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत; मवेशियों के नुकसान से आजीविका पर सीधा खतरा।

केरल के पथानामथिट्टा जिले में 7 अगस्त 2026 को भीषण बाढ़ के बीच एक बड़ा मानवीय अभियान चल रहा है — जहाँ इंसानों के साथ-साथ हज़ारों मवेशी और पालतू जानवर भी जीवन-मृत्यु के संघर्ष में फँसे हैं। 'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' ने केरल पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर आपातकालीन राहत अभियान शुरू किया है, जिससे 2,500 से अधिक जानवरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

मुख्य घटनाक्रम

लगातार बारिश और व्यापक जलभराव के कारण पथानामथिट्टा के 10 से अधिक गाँव बुरी तरह प्रभावित हैं। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, 1,500 से अधिक मवेशी और बड़े जानवर सीधे प्रभावित हुए हैं। राहत दल बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 20 टन सूखा पशु आहार पहुँचाने की प्रक्रिया में हैं, जबकि पशु चिकित्सा टीमें घायल और बीमार जानवरों का मौके पर ही उपचार कर रही हैं।

बड़े इलाके अभी भी जलमग्न हैं, जिससे कई परिवारों को राहत शिविरों में जाना पड़ा है। ये परिवार अपने मवेशियों को पानी से भरे बाड़ों में छोड़ने को विवश हैं — एक ऐसी स्थिति जो पशुपालन पर निर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बन गई है।

ज़मीनी हालात

'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' की आपदा प्रतिक्रिया टीम के मैनेजर प्रवीण सुरेश ने कहा, "हालात हमारी उम्मीद से कहीं ज़्यादा खराब हैं। कई जगहों पर बाढ़ का पानी कमर तक भरा हुआ है, और कुछ इलाकों में यह लगभग छह फीट ऊँचा है। जानवर सड़कों पर फँसे हुए हैं या रुके हुए पानी में खड़े हैं और उनके पास जाने के लिए कोई जगह नहीं है। लगातार बारिश से उनकी हालत और खराब होगी।"

स्थानीय निवासियों ने राहत कर्मियों को बताया कि मौसमी बाढ़ यहाँ सामान्य बात है, लेकिन 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से इतने बड़े पैमाने पर जलभराव नहीं देखा गया था। पिछले वर्षों में बाढ़ का पानी एक या दो दिन में उतर जाता था, परंतु इस बार कई गाँव लगभग पाँच दिनों से जलमग्न हैं।

आम जनता पर असर

पथानामथिट्टा में पशुपालन परिवारों की आय का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। बाढ़ के कारण मवेशियों की जान को खतरा सीधे तौर पर इन परिवारों की आजीविका पर असर डालता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य पहले से ही बाढ़-प्रभावित मनुष्यों के लिए बचाव और पुनर्वास में जुटा है।

संगठन का अनुभव और दायरा

गौरतलब है कि 'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' पहले भी असम, महाराष्ट्र, पंजाब और केरल में बाढ़ के दौरान इसी तरह के पशु बचाव और राहत अभियान चला चुका है। वर्तमान अभियान में संगठन सरकारी पशु चिकित्सा विभाग के साथ समन्वय में काम कर रहा है, जो इसे एक संस्थागत ढाँचे में संचालित राहत कार्य बनाता है।

आगे की राह

राहत दल का लक्ष्य है कि चारा वितरण और पशु चिकित्सा सेवाएँ तत्काल जारी रहें। बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित जानवरों की स्वास्थ्य जाँच और पुनर्वास की भी योजना है। केरल में मानसून की स्थिति को देखते हुए, आने वाले दिनों में राहत अभियान का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए मवेशी खोना उतना ही विनाशकारी है जितना घर खोना। यह ऐसे समय में आया है जब पथानामथिट्टा पाँच दिनों से जलमग्न है — 2018 के बाद की सबसे लंबी जलभराव अवधि। सवाल यह है कि क्या राज्य की आपदा प्रबंधन योजनाओं में पशु राहत को अभी भी एक स्वतंत्र संगठन के भरोसे छोड़ा जाना उचित है, या इसे सरकारी आपदा प्रतिक्रिया ढाँचे का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केरल बाढ़ में जानवरों के लिए कौन-सा राहत अभियान चल रहा है?
'ह्यूमेन वर्ल्ड फॉर एनिमल्स इंडिया' ने पथानामथिट्टा में एक आपातकालीन पशु राहत अभियान शुरू किया है, जो केरल पशुपालन और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर संचालित हो रहा है। इस अभियान से 2,500 से अधिक जानवरों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
पथानामथिट्टा में कितने जानवर बाढ़ से प्रभावित हुए हैं?
प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार, पथानामथिट्टा के 10 से अधिक गाँवों में 1,500 से अधिक मवेशी और बड़े जानवर सीधे प्रभावित हुए हैं। राहत अभियान का लक्ष्य कुल 2,500 से अधिक जानवरों तक सहायता पहुँचाना है।
बाढ़ में फँसे जानवरों के लिए क्या राहत सामग्री भेजी जा रही है?
राहत दल बाढ़-प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 20 टन सूखा पशु आहार पहुँचा रहा है। इसके अलावा, पशु चिकित्सा टीमें घायल और बीमार जानवरों का मौके पर ही उपचार और दवाएँ उपलब्ध करा रही हैं।
क्या 2026 की केरल बाढ़ 2018 जितनी गंभीर है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, 2018 की विनाशकारी बाढ़ के बाद यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर जलभराव देखा गया है। पिछले वर्षों में बाढ़ का पानी एक-दो दिन में उतर जाता था, लेकिन इस बार कई गाँव लगभग पाँच दिनों से जलमग्न हैं।
पथानामथिट्टा में पशुपालन इतना महत्त्वपूर्ण क्यों है?
पथानामथिट्टा के ग्रामीण परिवारों के लिए पशुपालन आय का एक प्रमुख स्रोत है। बाढ़ में मवेशियों की जान जाने या उनके बीमार पड़ने से इन परिवारों की आजीविका सीधे प्रभावित होती है, जिससे यह संकट केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि आर्थिक भी है।
राष्ट्र प्रेस
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