कोडैकनाल जल संकट: 7-8 दिन में एक बार पानी, ऑब्ज़र्वेटरी लेक और कील गुंडारू सूखे
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु के प्रसिद्ध हिल स्टेशन कोडैकनाल में पीने के पानी का गंभीर संकट गहरा गया है। लंबे समय तक बारिश न होने और सूखे मौसम के कारण शहर के दोनों प्रमुख जल स्रोत — ऑब्ज़र्वेटरी लेक और कील गुंडारू — लगभग सूख चुके हैं, जिससे 28 जुलाई 2026 तक नगरपालिका जलापूर्ति 7 से 8 दिनों में मात्र एक बार हो पा रही है। डिंडीगुल जिले में स्थित इस पहाड़ी शहर के 24 वार्डों में रहने वाले करीब 46,000 निवासी और हजारों पर्यटक इस संकट की चपेट में हैं।
संकट की जड़: दो प्रमुख जल स्रोतों का सूखना
नगरपालिका अधिकारियों के अनुसार, कोडैकनाल की जलापूर्ति लगभग पूरी तरह मौसमी वर्षा पर निर्भर है। ऑब्ज़र्वेटरी लेक और कील गुंडारू के जलस्तर में तेज़ गिरावट ने पंपिंग व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। जानकारों का कहना है कि आज़ादी के बाद से अब तक शहर में कोई बड़ा नया जलाशय नहीं बनाया गया, जबकि दशकों में आबादी और पर्यटन उद्योग दोनों में लगातार वृद्धि हुई है।
यह ऐसे समय में आया है जब मानसून की अनिश्चितता पूरे दक्षिण भारत के पहाड़ी इलाकों में जल प्रबंधन की खामियों को उजागर कर रही है। गौरतलब है कि अधिकांश घरों और व्यावसायिक भवनों में भूमिगत जल संग्रहण की सुविधा नहीं है, जिससे आपूर्ति बाधित होने पर विकल्प और सीमित हो जाते हैं।
आम जनता और व्यवसायों पर असर
स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब भी नगरपालिका पानी की आपूर्ति करती है, उन्हें अधिक से अधिक पानी जमा करके रखना पड़ता है, क्योंकि अगली सप्लाई एक सप्ताह तक नहीं आती। कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों ने निजी वॉटर टैंकरों पर निर्भरता बढ़ा ली है — प्रत्येक टैंकर की कीमत लगभग ₹4,000 है, जिससे परिचालन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
होटल और रेस्तरां, जिन्हें प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, विशेष रूप से प्रभावित हैं। आतिथ्य क्षेत्र के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह संकट प्रशासनिक विफलता से अधिक कम वर्षा का परिणाम है — जब प्राकृतिक स्रोत सूख जाते हैं, तो नगरपालिका के पास विकल्प बहुत सीमित रह जाते हैं।
पर्यटन दबाव ने बढ़ाई मुश्किलें
कोडैकनाल में सामान्य दिनों में 5,000 से 6,000 पर्यटक आते हैं, जबकि सप्ताहांत और छुट्टियों में यह संख्या 20,000 से भी अधिक हो जाती है। इतनी बड़ी पर्यटक आबादी पहले से दबाव में आ चुके जल संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ डालती है। स्थायी निवासियों और पर्यटन उद्योग दोनों की ज़रूरतें एक साथ पूरी करना नगरपालिका के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है।
तत्काल राहत उपाय
नगरपालिका ने तत्काल राहत के तहत फेयरी फॉल्स के निकट एक गहरा कुआँ खोदा है और जिमखाना रोड के पास चार अतिरिक्त बोरवेल खोदने की योजना बनाई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि ये उपाय तब तक संकट को कुछ हद तक कम रखेंगे, जब तक मानसून की पर्याप्त बारिश से जलाशय पुनः भर नहीं जाते।
दीर्घकालिक समाधान के लिए विशेषज्ञ नए जलाशय निर्माण और भूमिगत जल संग्रहण को अनिवार्य बनाने की आवश्यकता पर बल दे रहे हैं — अन्यथा हर सूखे मौसम में यही संकट दोहराता रहेगा।