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केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में जहरीला झाग, कृष्णगिरि किसानों ने मांगी दो राज्यों की संयुक्त कार्रवाई

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केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में जहरीला झाग, कृष्णगिरि किसानों ने मांगी दो राज्यों की संयुक्त कार्रवाई

सारांश

होसुर के पास दक्षिण पेन्नई नदी में एक महीने से जमा जहरीला झाग अब संकट बन चुका है — घुली ऑक्सीजन 1 mg/L से नीचे, सल्फेट-फॉस्फेट स्तर खतरनाक। हजारों एकड़ की सिंचाई दाँव पर है और कृष्णगिरि के किसान दो राज्यों से संयुक्त कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

दक्षिण पेन्नई नदी में केलावरपल्ली बांध के पास लगभग एक महीने से जहरीला झाग जमा हो रहा है।
पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे — मछलियों व जलीय जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक।
प्रारंभिक जाँच में सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर बढ़ा हुआ मिला, जो अनुपचारित सीवेज का संकेत।
कृष्णगिरि के किसान संगठनों ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से संयुक्त जाँच और दीर्घकालिक समाधान की माँग की।
नमूने चेन्नई और पोलाची की प्रयोगशालाओं में भेजे गए; तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड स्वतंत्र रूप से जाँच कर रहा है।
बांध पर निर्भर हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई और फसल उत्पादन खतरे में।

कृष्णगिरि जिले के किसान होसुर स्थित केलावरपल्ली बांध के समीप दक्षिण पेन्नई नदी में पिछले करीब एक महीने से जमा हो रहे जहरीले झाग को लेकर गहरी चिंता में हैं। किसान संगठनों ने तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से मिलकर प्रदूषण के स्रोत की पहचान करने और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की माँग की है। कर्नाटक में हाल ही में हुई भारी बारिश के बाद यह झाग और अधिक घना हो गया है, जिससे बांध में जलप्रवाह भी बढ़ा है।

मुख्य घटनाक्रम

नदी में झाग की समस्या लगभग एक महीने पहले से सामने आ रही है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नियमित मासिक निगरानी में पानी में सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है — ये संकेतक आमतौर पर औद्योगिक रासायनिक कचरे की बजाय अनुपचारित सीवेज के मिश्रण से जुड़े होते हैं। इसके अतिरिक्त, प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो जलीय जीवन — विशेषकर मछलियों — के अस्तित्व के लिए अत्यंत प्रतिकूल स्थिति है।

पानी के नमूने लगातार एकत्र किए जा रहे हैं और विश्लेषण के लिए चेन्नई तथा पोलाची की प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी स्वतंत्र रूप से नमूने ले रहा है।

किसानों की आशंकाएँ और माँगें

केलावरपल्ली बांध इस क्षेत्र में हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। किसानों को आशंका है कि पानी की लगातार बिगड़ती गुणवत्ता सिंचाई, फसल उत्पादन और नदी के समग्र पारिस्थितिक स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुँचा सकती है।

स्थानीय किसान संगठनों का मानना है कि प्रदूषण का मुख्य कारण कर्नाटक के शहरी क्षेत्रों से नदी के ऊपरी हिस्से में मिल रहा अनुपचारित सीवेज है। उन्होंने दोनों राज्यों में नदी किनारे स्थित मिलों सहित सभी औद्योगिक इकाइयों की व्यापक जाँच की भी माँग की है, ताकि औद्योगिक अपशिष्ट की संभावित भूमिका को भी परखा जा सके।

सरकारी प्रतिक्रिया

जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी की निगरानी प्रतिमाह की जा रही है और प्रारंभिक परिणाम विश्लेषण के लिए भेज दिए गए हैं। हालाँकि, किसान संगठनों के प्रतिनिधि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर तत्काल हस्तक्षेप और दोनों राज्यों को शामिल करते हुए एक समन्वित कार्य योजना तैयार करने की माँग करने वाले हैं।

किसान संगठनों ने प्रदूषण के सटीक स्रोतों की पहचान के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कराने और अनुपचारित अपशिष्ट को नदी में जाने से रोकने के दीर्घकालिक उपाय लागू करने की भी माँग रखी है।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि दक्षिण पेन्नई नदी की दशा इसी तरह बिगड़ती रही, तो क्षेत्र में खेती, जैव-विविधता और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर और दीर्घकालिक दुष्प्रभाव पड़ सकते हैं। घुली हुई ऑक्सीजन का अत्यंत निम्न स्तर पहले से ही मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए संकट का संकेत है।

क्या होगा आगे

प्रयोगशाला रिपोर्टें आने के बाद प्रदूषण के स्रोत की स्पष्ट तस्वीर उभरने की उम्मीद है। किसान संगठन जल संसाधन विभाग और तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड दोनों से ठोस कदमों की प्रतीक्षा में हैं। यह मामला दो राज्यों के बीच अंतर-राज्यीय नदी प्रदूषण प्रबंधन की जटिलताओं को भी उजागर करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ जवाबदेही अक्सर अंतर-राज्यीय समन्वय की भूलभुलैया में खो जाती है। कर्नाटक के शहरी सीवेज और संभावित औद्योगिक अपशिष्ट की पहचान के लिए वैज्ञानिक अध्ययन की माँग उचित है, लेकिन प्रयोगशाला रिपोर्टें आने तक नदी पर निर्भर हजारों किसानों की आजीविका दाँव पर रहेगी। बिना बाध्यकारी द्विराज्यीय तंत्र के, यह संकट निगरानी रिपोर्टों और बैठकों के चक्र में उलझकर रह सकता है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण पेन्नई नदी में जहरीला झाग क्यों आ रहा है?
किसान संगठनों के अनुसार, प्रदूषण का मुख्य कारण कर्नाटक के शहरी क्षेत्रों से नदी के ऊपरी हिस्से में मिल रहा अनुपचारित सीवेज है। जल संसाधन विभाग की प्रारंभिक जाँच में भी सल्फेट और फॉस्फेट का बढ़ा हुआ स्तर मिला है, जो आमतौर पर सीवेज प्रदूषण का संकेत होता है।
केलावरपल्ली बांध का पानी किसानों के लिए क्यों अहम है?
केलावरपल्ली बांध कृष्णगिरि जिले में हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई का प्रमुख स्रोत है। पानी की गुणवत्ता बिगड़ने से फसल उत्पादन, सिंचाई और कमांड एरिया में दीर्घकालिक खेती की क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।
नदी में पानी की गुणवत्ता कितनी खराब हो गई है?
जल संसाधन विभाग के अनुसार, प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर 1 मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो मछलियों सहित जलीय जीवन के लिए अत्यंत प्रतिकूल है। साथ ही सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर भी सामान्य से अधिक पाया गया है।
किसान संगठन सरकार से क्या माँग कर रहे हैं?
किसान संगठन तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों सरकारों से संयुक्त जाँच, वैज्ञानिक अध्ययन, नदी किनारे की औद्योगिक इकाइयों की व्यापक जाँच और अनुपचारित अपशिष्ट को नदी में जाने से रोकने के दीर्घकालिक उपाय लागू करने की माँग कर रहे हैं।
इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं?
जल संसाधन विभाग प्रतिमाह नदी की निगरानी कर रहा है और नमूने चेन्नई व पोलाची की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी स्वतंत्र रूप से नमूने ले रहा है। किसान प्रतिनिधि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मिलकर समन्वित कार्य योजना की माँग करने वाले हैं।
राष्ट्र प्रेस
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