10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

लखनऊ अग्निकांड: एसआईटी-एफएसएल की संयुक्त जांच शुरू, 4 गिरफ्तार; 7 दिन में रिपोर्ट का निर्देश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
लखनऊ अग्निकांड: एसआईटी-एफएसएल की संयुक्त जांच शुरू, 4 गिरफ्तार; 7 दिन में रिपोर्ट का निर्देश

सारांश

लखनऊ के अलीगंज कोचिंग अग्निकांड में 15 मौतों के बाद एसआईटी और एफएसएल की संयुक्त जांच शुरू हो गई है। 4 गिरफ्तार, इमारत सील और 7 दिन में रिपोर्ट का निर्देश — लेकिन विपक्ष पूर्व ध्वस्तीकरण नोटिस और कथित देरी पर जवाब मांग रहा है।

मुख्य बातें

लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी और एफएसएल की संयुक्त टीम ने 23 जून को जांच शुरू की।
एसआईटी में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी प्रवीण कुमार सदस्य; 7 दिनों में रिपोर्ट देनी है।
6 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर, 4 आरोपी गिरफ्तार ; पूरी इमारत सील ।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा — घायल 2 लोग खतरे से बाहर , दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी।
AAP सांसद संजय सिंह ने संस्थान के पूर्व ध्वस्तीकरण नोटिस और बचाव में कथित देरी की निष्पक्ष जांच की मांग की।

लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड — जिसमें 15 लोगों की जान चली गई — की जांच 23 जून को औपचारिक रूप से शुरू हो गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की संयुक्त टीम ने घटनास्थल का विस्तृत निरीक्षण किया और साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया आरंभ की। आग लगने के वास्तविक कारणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

मुख्य घटनाक्रम

सोमवार देर रात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें जिम्मेदारी तय करने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एसआईटी गठन के निर्देश दिए गए। एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार को सदस्य नियुक्त किया गया है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच के मद्देनजर पूरी इमारत को सील कर दिया गया है। अलीगंज थाने में 6 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

जांच एजेंसियों का रुख

घटनास्थल पर पहुंचे एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार ने कहा कि एसआईटी आग लगने के कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन और संभावित लापरवाही के सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है। उन्होंने बताया कि विभिन्न विभागों की भूमिका और दायित्वों का विस्तार से परीक्षण किया जाएगा और तथ्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

सरकार की प्रतिक्रिया

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस घटना को 'अत्यंत दुखद और हृदयविदारक' बताया। उन्होंने कहा, 'सरकार पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। हादसे में घायल दो लोगों का उपचार चल रहा है और दोनों खतरे से बाहर हैं।' पाठक ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। गौरतलब है कि घटना के बाद रक्षामंत्री और मुख्यमंत्री दोनों ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवारों से वार्ता की थी।

विपक्ष की आपत्तियां

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एसआईटी गठन को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बड़े हादसों के बाद जांच समितियां तो बनती हैं, लेकिन उनके परिणाम अक्सर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आते। संजय सिंह ने आग से निपटने की व्यवस्थाओं, राहत एवं बचाव कार्य में कथित देरी और संस्थान को पूर्व में मिले ध्वस्तीकरण नोटिस जैसे मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि संस्थान में सुरक्षा संबंधी खामियां पहले से चिह्नित थीं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

आगे क्या होगा

एसआईटी को 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपनी है, जिसके बाद सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की अग्नि सुरक्षा और भवन मानकों को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। जांच के नतीजे न केवल इस हादसे की जवाबदेही, बल्कि राज्य में ऐसे संस्थानों की नियामक निगरानी की दिशा भी तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि जब संस्थान को पहले ही ध्वस्तीकरण नोटिस मिल चुका था, तो नियामक तंत्र ने कार्रवाई क्यों नहीं की। उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े हादसों के बाद गठित जांच समितियों के निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं हुए — यह पैटर्न जवाबदेही की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। सात दिन की समयसीमा दबाव बनाती है, लेकिन फोरेंसिक जांच की गुणवत्ता गति से नहीं, स्वतंत्रता से तय होती है। जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक न हो और कोचिंग संस्थानों की अग्नि सुरक्षा ऑडिट की व्यापक व्यवस्था न बने, यह जांच भी केवल प्रतीकात्मक राहत बनकर रह सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ अलीगंज कोचिंग संस्थान अग्निकांड में कितने लोगों की मौत हुई?
सोमवार को हुए इस भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हो गई। हादसे में घायल 2 अन्य लोगों का उपचार जारी है और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के अनुसार दोनों खतरे से बाहर हैं।
लखनऊ अग्निकांड की जांच कौन कर रहा है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी और एफएसएल की संयुक्त टीम जांच कर रही है। एसआईटी में अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन प्रवीण कुमार सदस्य हैं, और उन्हें 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है।
अलीगंज अग्निकांड में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अलीगंज थाने में 6 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।
AAP सांसद संजय सिंह ने इस मामले में क्या मांग की है?
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आग से निपटने की व्यवस्थाओं, बचाव कार्य में कथित देरी और संस्थान को पूर्व में मिले ध्वस्तीकरण नोटिस की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सुरक्षा खामियां पहले से चिह्नित होने के बावजूद समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
एसआईटी की रिपोर्ट कब तक आएगी और उसके बाद क्या होगा?
एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 4 महीने पहले