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महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति ने 44 और मामले वापस लेने की सिफारिश की, अब तक 121 मामलों पर मुहर

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महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति ने 44 और मामले वापस लेने की सिफारिश की, अब तक 121 मामलों पर मुहर

सारांश

महाराष्ट्र की कैबिनेट उपसमिति ने बुधवार को 133 आवेदनों की समीक्षा कर 44 और मामले वापस लेने की सिफारिश की — गणेशोत्सव से लेकर श्रमिक आंदोलनों तक। पहले की 77 अनुशंसाओं को मिलाकर कुल संख्या 121 पहुँची। महिलाओं के खिलाफ अपराध और गंभीर मामलों पर छूट नहीं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति ने 17 जून 2026 को 44 अतिरिक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश की।
पहले की 77 अनुशंसाओं को मिलाकर कुल सिफारिशों की संख्या 121 हो गई है।
बैठक में 133 आवेदनों की समीक्षा हुई; 14 मामले क्षेत्रीय समितियों को, 8 मामले अभी विचाराधीन।
गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी, गौ-रक्षा और श्रमिक आंदोलनों से जुड़े मामले वापसी सूची में शामिल।
महिलाओं के खिलाफ अपराध, गंभीर आपराधिक और दीवानी मामले वापस लेने की नीति से बाहर।
सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय बॉम्बे हाईकोर्ट लेगा।

महाराष्ट्र सरकार की कैबिनेट उपसमिति ने राज्य में धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज 44 अतिरिक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश की है। सांस्कृतिक कार्य मंत्री एवं उपसमिति के अध्यक्ष आशीष शेलार ने बुधवार, 17 जून को मुंबई में आयोजित बैठक के बाद यह जानकारी दी। इससे पहले की बैठक में समिति 77 मामलों को वापस लेने की अनुशंसा कर चुकी थी, जिससे कुल सिफारिशों की संख्या 121 हो गई है।

बैठक में क्या हुआ

बुधवार की बैठक में पुलिस में दर्ज मामलों से संबंधित कुल 133 आवेदनों की समीक्षा की गई। इनमें से 44 आवेदकों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की सिफारिश की गई। 14 मामलों को पुनर्विचार के लिए संबंधित क्षेत्रों की पुलिस उपायुक्तों की अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समितियों के पास भेजा गया है।

समीक्षा के लिए आए 35 मामलों का पहले ही निपटारा हो चुका था, जबकि 32 मामले समिति के अधिकार क्षेत्र से बाहर पाए गए। अब केवल आठ मामले विचाराधीन हैं।

किन मामलों को वापस लेने की सिफारिश

बुधवार को जिन मामलों को वापस लेने की अनुशंसा की गई, उनमें गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी उत्सव, सामाजिक कार्यक्रमों, गौ-रक्षा आंदोलनों और श्रमिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामले शामिल हैं। आशीष शेलार ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ताओं, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और वैचारिक आंदोलनों में शामिल लोगों पर कई बार अनावश्यक रूप से मामले दर्ज कर दिए जाते हैं और ऐसे लोगों को बेवजह के मुकदमों से राहत दिलाना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।

किन मामलों को वापस नहीं लिया जाएगा

समिति ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध, गंभीर आपराधिक मामले तथा व्यक्तिगत और दीवानी विवादों से जुड़े मामलों को राज्य सरकार की नीति के तहत वापस नहीं लिया जा सकता। ऐसे मामलों को वापस लेने की माँगें अस्वीकार कर दी गई हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सरकारी प्रस्तावों के अनुसार वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय केवल बॉम्बे हाईकोर्ट ही ले सकता है, और इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

बैठक में कौन शामिल हुए

इस बैठक में विधि एवं न्याय विभाग के प्रधान सचिव, लोक अभियोजन निदेशालय के निदेशक, गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और राज्यभर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। समिति का गठन राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा कर उपयुक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश के उद्देश्य से किया गया था।

आगे क्या होगा

समिति की सिफारिशें अब महाराष्ट्र कैबिनेट के समक्ष अंतिम स्वीकृति के लिए रखी जाएंगी। क्षेत्रीय समितियों को भेजे गए 14 मामलों की समीक्षा के बाद उन पर भी निर्णय लिया जाएगा। यह प्रक्रिया राज्य में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े व्यक्तियों को कानूनी राहत दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्वतंत्र न्यायिक निगरानी का अभाव आलोचकों को असहज करता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सांसदों-विधायकों के मामलों को हाईकोर्ट के दायरे में रखना एक सकारात्मक संवैधानिक संकेत है, किंतु शेष मामलों की समीक्षा में जवाबदेही का ढाँचा अभी भी अस्पष्ट है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र कैबिनेट उपसमिति ने कितने मामले वापस लेने की सिफारिश की है?
बुधवार 17 जून 2026 की बैठक में उपसमिति ने 44 मामले वापस लेने की सिफारिश की। इससे पहले की बैठक में 77 मामलों की अनुशंसा हो चुकी थी, जिससे कुल संख्या 121 हो गई है।
किन आंदोलनों से जुड़े मामले वापस लेने की सिफारिश की गई है?
गणेशोत्सव, नवरात्रोत्सव, दही हांडी उत्सव, सामाजिक कार्यक्रमों, गौ-रक्षा आंदोलनों और श्रमिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की अनुशंसा की गई है।
कौन से मामले वापस नहीं लिए जाएंगे?
महिलाओं के खिलाफ अपराध, गंभीर आपराधिक मामले और व्यक्तिगत व दीवानी विवादों से जुड़े मामलों को राज्य सरकार की नीति के तहत वापस नहीं लिया जा सकता। ऐसी सभी माँगें अस्वीकार कर दी गई हैं।
सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों का फैसला कौन करेगा?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और सरकारी प्रस्तावों के अनुसार वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय केवल बॉम्बे हाईकोर्ट ले सकता है। इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इस उपसमिति का गठन क्यों किया गया था?
महाराष्ट्र सरकार ने राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों की समीक्षा कर उपयुक्त मामलों को वापस लेने की सिफारिश के लिए यह कैबिनेट उपसमिति गठित की थी। सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार इसके अध्यक्ष हैं।
राष्ट्र प्रेस
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