30 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र सरकार का 304 सूखाग्रस्त तालुकों में चारा संकट से निपटने का व्यापक एक्शन प्लान

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महाराष्ट्र सरकार का 304 सूखाग्रस्त तालुकों में चारा संकट से निपटने का व्यापक एक्शन प्लान

सारांश

अल नीनो से उपजे सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र ने 304 तालुकों में पशुओं के लिए चारे की गारंटी देने को जिला निधि का 5% अनिवार्य किया, चारा बैंक बनाए, कीमतें तय कीं और डिजिटल पशु-शिविर निगरानी लागू की — यह राहत नहीं, दीर्घकालिक नीति है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को 304 सूखाग्रस्त तालुकों में चारा आपूर्ति के लिए आधिकारिक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी किया।
जिला वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5% चारा उत्पादन, संरक्षण और वैकल्पिक स्रोत विकास के लिए अनिवार्य रूप से आवंटित होगा।
चारे की कीमत पर सीमा तय — सूखे चारे के लिए ₹12/किग्रा और साइलेज के लिए ₹8/किग्रा (परिवहन शुल्क अतिरिक्त)।
FPO , कंपनियों और NGO की भागीदारी से जिलावार चारा बैंक स्थापित किए जाएंगे।
राज्य स्तरीय ऑनलाइन पशु शिविर निगरानी प्रणाली , बायोमेट्रिक/QR उपस्थिति और 24 घंटे CCTV निगरानी अनिवार्य होगी।
जिला कलेक्टरों को राज्य से बाहर चारे के परिवहन को कानूनी रूप से रोकने का अधिकार दिया गया।

महाराष्ट्र सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को एक आधिकारिक सरकारी संकल्प (जीआर) जारी करते हुए 304 सूखाग्रस्त तालुकों में पशुओं के लिए चारे की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में एक बहु-आयामी कार्ययोजना की घोषणा की। अल नीनो के प्रभाव से हुई असामान्य वर्षा कमी के चलते उत्पन्न सूखे की स्थिति ने राज्य के पशुधन क्षेत्र पर गंभीर दबाव डाला है, जिसके मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है।

योजना की मुख्य घोषणाएँ

पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे ने शुक्रवार को बताया कि अब जिला वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चारा उत्पादन, उपलब्ध चारे के संरक्षण और वैकल्पिक चारा स्रोतों के विकास के लिए अनिवार्य रूप से आवंटित किया जाएगा। यह एक संरचनात्मक बदलाव है, जो सूखे-प्रबंधन को केवल आपातकालीन राहत से आगे ले जाकर दीर्घकालिक नियोजन से जोड़ता है।

इस कार्ययोजना के तहत चारा बैंक स्थापित करना, हाइड्रोपोनिक्स और अजोला की खेती को बढ़ावा देना, अंतर-जिला चारा परिवहन को सुगम बनाना और पशु शिविरों के लिए पूरी तरह डिजिटल प्रबंधन प्रणाली लागू करना शामिल है।

सिफारिश और अनुमोदन की प्रक्रिया

यह कार्ययोजना राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले की अध्यक्षता वाली कैबिनेट उप-समिति के निर्देशन में गठित एक विशेषज्ञ समूह की सिफारिशों पर आधारित है। इस समूह की अध्यक्षता राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने की। उप-समिति ने 27 अक्टूबर को इन सिफारिशों को औपचारिक रूप से स्वीकृति दी, जिसके बाद 30 अक्टूबर 2026 को जीआर जारी किया गया।

चारा उत्पादन और वितरण व्यवस्था

सरकारी आदेश के अनुसार, रबी मौसम के लिए कम पानी की ज़रूरत वाली और बहु-कटाई वाली चारा फसलों के बीज महाबीज तथा अन्य उत्पादकों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। कृषि विश्वविद्यालय की भूमि, तालुका बीज गुणन केंद्र और कृषि निगमों के भूखंड, साथ ही पशुपालन विभाग की संस्थागत भूमि पर खेती की जाएगी।

जल संसाधन विभाग के सहयोग से गाद-बेड (गाल्पेरा) क्षेत्र किसानों और पशुपालकों को सौंपे जाएंगे। वन विभाग द्वारा घास की समयबद्ध कटाई और भंडारण सुनिश्चित किया जाएगा। किसान उत्पादक संगठनों (FPO), कंपनियों और गैर-सरकारी संगठनों की सहभागिता से जिलावार चारा बैंक बनाए जाएंगे।

मूल्य नियंत्रण और प्रशिक्षण

चारे की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने आधार मूल्य निर्धारित किए हैं — परिवहन लागत को छोड़कर सूखे चारे के लिए अधिकतम ₹12 प्रति किलोग्राम और साइलेज के लिए ₹8 प्रति किलोग्राम। एक व्यापक प्रशिक्षण अभियान के तहत पशुपालकों को कुशल कटाई, भंडारण, साइलेज निर्माण, यूरिया/एंजाइम उपचार और धान के भूसे के मूल्यवर्धन की तकनीकें सिखाई जाएंगी।

हाइड्रोपोनिक्स, अजोला और बिना कांटों वाले कैक्टस जैसी वैकल्पिक खेती तकनीकों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा, और पशु चिकित्सालयों में प्रायोगिक उत्पादन इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी।

डिजिटल निगरानी और राज्य से बाहर चारा-निर्यात पर रोक

राज्य स्तर पर एक ऑनलाइन 'पशु शिविर निगरानी और प्रबंधन प्रणाली' लागू की जाएगी, जो पशु पंजीकरण, दैनिक उपस्थिति, चारा वितरण, पानी, पशु चिकित्सा देखभाल और व्यय का वास्तविक समय में लेखा-जोखा रखेगी। शिविरों में बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड उपस्थिति, भारत पशुधन प्रणाली के ज़रिए सत्यापन और चौबीसों घंटे सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य की गई है।

पशु आहार को प्राथमिकता देने के लिए पैकेजिंग, जैव ईंधन और बिजली उत्पादन जैसे औद्योगिक उद्देश्यों हेतु चारे का उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। जिला कलेक्टरों को राज्य से बाहर चारे के परिवहन को कानूनी रूप से रोकने का अधिकार दिया गया है। गायरन (चारागाह), घास के मैदानों और परती भूमि पर विभिन्न विभागों के समन्वय से चारा उत्पादन बढ़ाया जाएगा।

यह योजना ऐसे समय में आई है जब राज्य के पशुपालक क्षेत्रों में सूखे की गंभीरता और चारे की बढ़ती माँग को देखते हुए लंबी अवधि की नीतिगत तैयारी की ज़रूरत स्पष्ट होती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो राज्य के दूरदराज़ सूखाग्रस्त इलाकों में हमेशा समान रूप से सक्षम नहीं होते।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार की चारा कार्ययोजना क्या है?
यह 30 अक्टूबर 2026 को जारी एक सरकारी संकल्प (जीआर) है, जो अल नीनो जनित सूखे से प्रभावित 304 तालुकों में पशुओं के लिए चारे की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जिला निधि, चारा बैंक, मूल्य सीमा और डिजिटल निगरानी जैसे उपायों को एकीकृत करती है।
जिला वार्षिक योजना निधि का कितना हिस्सा चारे के लिए आवंटित होगा?
पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे की घोषणा के अनुसार जिला वार्षिक योजना निधि का कम से कम 5 प्रतिशत हिस्सा चारा उत्पादन, संरक्षण और वैकल्पिक चारा स्रोतों के विकास के लिए अनिवार्य रूप से आवंटित किया जाएगा।
चारे की सरकारी मूल्य सीमा क्या निर्धारित की गई है?
सरकारी आदेश के अनुसार परिवहन शुल्क को छोड़कर सूखे चारे के लिए अधिकतम ₹12 प्रति किलोग्राम और साइलेज के लिए ₹8 प्रति किलोग्राम की मूल्य सीमा तय की गई है।
पशु शिविरों की निगरानी कैसे होगी?
राज्य स्तरीय ऑनलाइन 'पशु शिविर निगरानी और प्रबंधन प्रणाली' के तहत पशु पंजीकरण, दैनिक उपस्थिति, चारा वितरण और व्यय पर नज़र रखी जाएगी। शिविरों में बायोमेट्रिक या क्यूआर कोड उपस्थिति, भारत पशुधन प्रणाली से सत्यापन और 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी अनिवार्य होगी।
क्या महाराष्ट्र से बाहर चारे का परिवहन रोका जा सकेगा?
हाँ, सरकारी आदेश के अनुसार जिला कलेक्टरों को कानूनी रूप से राज्य के बाहर चारे के परिवहन को रोकने का अधिकार दिया गया है। साथ ही पैकेजिंग, जैव ईंधन और बिजली उत्पादन जैसे औद्योगिक उपयोगों के लिए चारे का इस्तेमाल प्रतिबंधित किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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