मणिपुर DGP मुकेश सिंह का पहाड़ी जिलों में पहला दौरा, बोले — कानून सबके लिए समान, पुलिस निष्पक्ष रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के पुलिस महानिदेशक मुकेश सिंह ने रविवार, 7 जून 2026 को स्पष्ट किया कि कानून राज्य के प्रत्येक नागरिक पर समान रूप से लागू होता है और पुलिस बल किसी भी दबाव या पक्षपात से परे होकर निष्पक्ष सेवा देता रहेगा। यह बयान उन्होंने कुकी-जो जनजाति बहुल कांगपोकपी और नागा बहुल सेनापति जिलों के अपने पहले आधिकारिक दौरे के दौरान दिया — एक ऐसे समय में जब इन दोनों जिलों में सांप्रदायिक तनाव और लापता व्यक्तियों को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
दौरे का उद्देश्य और स्वरूप
डीजीपी के साथ राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) लहरी दोरजी ल्हाटू भी मौजूद रहे। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी जिलों में सुरक्षा बलों, नागरिक प्रशासन और नागरिक समाज संगठनों के बीच समन्वय को प्रगाढ़ करना था। मुकेश सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और प्रमुख परिचालन उपलब्धियों की समीक्षा की।
नागरिक समाज संगठनों से संवाद
डीजीपी ने इस दौरे में कुकी और नागा — दोनों समुदायों के प्रमुख नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की। कुकी पक्ष से कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU), कुकी इनपी मणिपुर (KIM), कुकी इनपी सदर हिल्स, कुकी महिला संघ (KWU), कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन सदर हिल्स, थाडौ इनपी सदर हिल्स, थाडौ यूथ एसोसिएशन (TYA) और थाडौ महिला संघ (TWA) के प्रतिनिधि शामिल हुए। नागा पक्ष से यूनाइटेड नागा काउंसिल (UNC), नागा महिला संघ (NWU), ऑल नागा स्टूडेंट्स एसोसिएशन मणिपुर (ANSAM), नागा पीपुल्स ऑर्गनाइजेशन (NPO), सेनापति जिला छात्र संघ (SDSA) और सेनापति जिला महिला संघ (SDWA) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
तनाव की पृष्ठभूमि: लापता व्यक्ति और हिंसा
यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब 13 मई 2026 को हुई हिंसक घटनाओं के बाद कांगपोकपी और सेनापति जिलों में हालात तनावपूर्ण हैं। अधिकारियों के अनुसार, उस दिन नागा और कुकी समुदायों के कम से कम 50 लोगों को कथित तौर पर विभिन्न सशस्त्र समूहों द्वारा बंधक बना लिया गया था। इन घटनाओं में कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई और चार अन्य घायल हुए। अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं और नागरिक समाज संगठनों के प्रयासों के बाद 14 और 15 मई को दोनों समुदायों के करीब 30 व्यक्तियों को रिहा कर दिया गया। हालाँकि, 20 लोग — जिनमें 6 नागा और 14 कुकी शामिल हैं — अभी भी लापता हैं। केंद्रीय और राज्य सुरक्षा बलों द्वारा करीब चार सप्ताह तक गहन संयुक्त तलाशी अभियान चलाने के बावजूद उनका पता नहीं चल पाया है।
डीजीपी की पृष्ठभूमि और नियुक्ति
मुकेश सिंह AGMUT (अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इससे पूर्व वे लद्दाख के पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्यरत थे, जिसका कार्यभार उन्होंने 15 जनवरी 2026 को संभाला था। मणिपुर में उनका तबादला हाल ही में हुआ है।
आगे की राह
पुलिस के आधिकारिक बयान में इस दौरे को 'सौहार्दपूर्ण और फलदायी' बताया गया है। डीजीपी ने नागरिकों से अपील की कि वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सभी समुदायों के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित करने में पुलिस का सहयोग करें। गौरतलब है कि यह दौरा तब हो रहा है जब मणिपुर में जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच विश्वास की खाई पाटना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।