नीति आयोग की बैठक अत्यंत अहम — शिवसेना एमएलसी मनीषा कायंदे, विकसित भारत 2047 पर दिया ज़ोर
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना विधान परिषद सदस्य मनीषा कायंदे ने 11 जून 2026 को नीति आयोग की बैठक को 'विकसित भारत 2047' के सपने को साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी इसलिए आवश्यक है, क्योंकि देश के समग्र विकास के लिए हर राज्य को साथ लेकर चलना होगा।
नीति आयोग बैठक का महत्व
मनीषा कायंदे ने कहा, 'यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम सब 2047 तक विकसित भारत का सपना देख रहे हैं; उसे साकार करने के लिए एक ठोस रोडमैप बनाना अनिवार्य है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार के रहते यह बैठक वैश्विक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है — अन्य देश भारत को किस नज़र से देखते हैं, यह भी विचार का विषय है।
विपक्ष पर तीखा प्रहार
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष के एक बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कायंदे ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) 'बिल्कुल बेनकाब हो चुकी है' और चुनाव हार चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के पास भी सक्षम नेतृत्व का अभाव है — राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी कई राज्यों के चुनाव हार चुकी है। कायंदे के अनुसार दोनों दल अब एक-दूसरे का सहारा खोज रहे हैं।
मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन खारिज होने के मामले पर कायंदे ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि इस पर न्यायालय के फैसले का इंतज़ार करना उचित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कोर्ट के फैसले के बाद ही इस विषय पर कुछ कहा जा सकता है।'
धर्मांतरण और लव जिहाद पर कड़ा रुख
उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण रोकथाम सेल गठित किए जाने के राज्यपाल के निर्णय का समर्थन करते हुए कायंदे ने कहा कि धर्मांतरण और लव जिहाद के मामले तेज़ी से बढ़े हैं — यह कॉर्पोरेट क्षेत्र और विभिन्न संस्थानों में भी दिख रहा है। उन्होंने नासिक स्थित TCS जैसे बड़े संस्थान का उदाहरण देते हुए जन जागरण अभियान की आवश्यकता पर बल दिया।
महाराष्ट्र 'ऑपरेशन टाइगर' और आगे की राह
महाराष्ट्र में चर्चित 'ऑपरेशन टाइगर' के बारे में पूछे जाने पर कायंदे ने माना कि इस मामले पर उनके पास अभी कोई ठोस जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'आने वाला समय बताएगा कि कौन किसकी पार्टी में जा रहा है।' राजनीतिक पुनर्संरेखण की इस अनिश्चितता के बीच महाराष्ट्र की राजनीति पर सबकी नज़र बनी हुई है।