रामभद्राचार्य के समर्थन में अयोध्या के संत: 'मथुरा, काशी और संभल हमारा था, है और रहेगा'
सारांश
मुख्य बातें
अयोध्या के प्रमुख संतों और धर्माचार्यों ने 17 जून 2026 को जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के उस बयान का खुलकर समर्थन किया, जिसमें उन्होंने लव जिहाद, लैंड जिहाद और आतंकवाद के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की माँग करते हुए कहा था कि मथुरा, काशी और संभल को भी प्राप्त किया जाएगा। जगतगुरु परमहंस आचार्य, महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज और महंत सीताराम दास महाराज ने एकस्वर में इन तीनों स्थलों को सनातन आस्था के अभिन्न केंद्र बताया।
जगतगुरु परमहंस आचार्य का पक्ष
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि भारत सनातन संस्कृति का देश है और यहाँ की पहचान सनातन परंपरा से अविभाज्य है। उन्होंने कहा, 'मथुरा, काशी और संभल हमारा ही है। भारत सनातनियों का देश है। दुर्भाग्यवश कुछ तुष्टीकरण करने वाली सरकारें, जैसे कांग्रेस आदि, सत्ता में रहीं, जिन्होंने भारतीय संस्कृति को नुकसान पहुँचाया।' उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इस्लाम और ईसाईयत विदेशी उपासना पद्धतियाँ हैं, क्योंकि इस्लाम लगभग 1,400 वर्ष पूर्व आया और पैगंबर मोहम्मद का जन्म मक्का में हुआ था, जबकि सनातन धर्म सृष्टि के आरंभ से है।
उन्होंने तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य के 'लेकर रहेंगे' वाले वक्तव्य को उद्धृत करते हुए कहा कि इसे विधिक रूप से प्राप्त किया जाना चाहिए और वे इस प्रयास का पूर्ण समर्थन करते हैं।
महंत देवेशाचार्य का संवैधानिक संकल्प
महंत डॉ. देवेशाचार्य जी महाराज ने स्पष्ट किया कि मथुरा, काशी और संभल हिंदू समाज की आस्था के केंद्र हैं और इनसे जुड़ी किसी भी वैधानिक प्रक्रिया में समाज अपना पक्ष रखेगा। उन्होंने कहा, 'मथुरा, काशी और संभल हमारा था, है और रहेगा। यदि इसके लिए न्यायालय जाना पड़े या अन्य संवैधानिक प्रयास करने पड़ें, तो हम वह प्रयास करेंगे। हम संविधान और कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करेंगे।' उन्होंने किसी भी प्रकार की हिंसा या क्रूरता को अस्वीकार्य बताया।
लैंड जिहाद के मुद्दे पर उनका आरोप था कि कुछ स्थानों पर पहले मज़ार बनाकर और बाद में वहाँ बड़े निर्माण किए जाते हैं, जिससे अराजकता के हालात उत्पन्न होते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार से इस विषय पर कठोर और दंडात्मक कार्रवाई की माँग की।
महंत सीताराम दास का संकल्प
महंत सीताराम दास महाराज ने भी रामभद्राचार्य के बयान को पूर्णतः उचित ठहराया। उन्होंने कहा, 'जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी ने जो कहा है, वह पूरी तरह सही है। ये सभी स्थल सनातनियों की महान आस्था के केंद्र हैं। उनके मार्गदर्शन में सनातनी समाज काशी, मथुरा और संभल को लेकर अपने संकल्प को आगे बढ़ाएगा।' उन्होंने अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि इसी तरह अन्य धार्मिक स्थलों के संबंध में भी समाज संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत अपने अधिकारों के लिए प्रयास करता रहेगा।
रामभद्राचार्य का मूल बयान
गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इससे पूर्व कहा था कि लव जिहाद, लैंड जिहाद और आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा था कि मथुरा, काशी और संभल को भी प्राप्त किया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इन तीनों स्थलों से जुड़े धार्मिक और कानूनी विवाद देश भर में चर्चा के केंद्र में हैं।
आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि संतों का यह संगठित समर्थन किसी ठोस कानूनी या सामाजिक अभियान का रूप लेता है या नहीं।