मौलाना शहाबुद्दीन की मांग: UP सुन्नी वक्फ बोर्ड का तत्काल गठन हो, पूर्व चेयरमैन के कार्यकाल की जांच करे योगी सरकार
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने 5 नवंबर 2026 को बरेली से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड का तत्काल गठन करने और वक्फ संपत्तियों के कथित दुरुपयोग की जांच कराने की माँग की है। साथ ही उन्होंने मुर्शिदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर से अपील की कि वे प्रस्तावित मस्जिद का नाम 'बाबरी मस्जिद' न रखें, ताकि नया सामाजिक तनाव न पैदा हो।
वक्फ बोर्ड गठन की माँग: क्या है पृष्ठभूमि
मौलाना शहाबुद्दीन ने बताया कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ कई महीनों से भंग अवस्था में है। बोर्ड न होने के कारण मस्जिदों, मदरसों, दरगाहों, कब्रिस्तानों और ईदगाहों का संचालन करने वाली कमेटियाँ गंभीर परेशानियों का सामना कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के बड़ी संख्या में लोगों ने उनसे इस मामले में पहल करने का आग्रह किया, जिसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार के स्तर पर भी वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर चर्चाएँ जारी हैं। गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड का गठन न होना सीधे तौर पर उन संपत्तियों की निगरानी को प्रभावित करता है जो ऐतिहासिक रूप से समाज के कमज़ोर वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित की गई थीं।
पूर्व चेयरमैन पर गंभीर आरोप
मौलाना ने आरोप लगाया कि वर्षों तक वक्फ बोर्ड पर कट्टरपंथी विचारधारा के लोगों का वर्चस्व रहा और इस दौरान वक्फ संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। उन्होंने विशेष रूप से एक पूर्व चेयरमैन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कथित तौर पर 16-17 वर्षों तक इस पद पर काबिज रहे।
मौलाना के अनुसार, उस कार्यकाल में करोड़ों रुपये की जमीनों की खरीद-फरोख्त हुई और संपत्तियों को कथित तौर पर बाज़ार मूल्य से कम कीमत पर बेचा गया। उन्होंने पूर्व चेयरमैन को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता आजम खान का करीबी भी बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी से पूरे कार्यकाल की जांच कराने की माँग की है।
नए बोर्ड में सूफी विचारधारा को प्राथमिकता देने की अपील
मौलाना शहाबुद्दीन ने स्पष्ट किया कि नए बोर्ड में उन लोगों को जगह नहीं मिलनी चाहिए जो कट्टरपंथी सोच से जुड़े हों। उनकी माँग है कि सुन्नी सूफी विचारधारा के प्रतिनिधियों को बोर्ड में जिम्मेदारी दी जाए।
उन्होंने याद दिलाया कि वक्फ संपत्तियाँ बुजुर्गों ने गरीब, जरूरतमंद, अनाथ और विधवा महिलाओं की मदद के उद्देश्य से समर्पित की थीं। उनके अनुसार, पिछले वर्षों में जिम्मेदार रहे लोगों ने इस मूल उद्देश्य के अनुसार काम नहीं किया और वक्फ की आमदनी का लाभ आम मुसलमानों तक नहीं पहुँचा।
बाबरी मस्जिद नाम रखने के ऐलान पर सख्त आपत्ति
मुर्शिदाबाद के विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर को एक मस्जिद बनाने और उसका नाम 'बाबरी मस्जिद' रखने का ऐलान किया था। इस पर मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि बाबरी मस्जिद अयोध्या की एक ऐतिहासिक मस्जिद थी और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद वहाँ राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ हो चुका है।
उनके अनुसार, वर्तमान में देश में अमन और शांति का माहौल है तथा लोग सामान्य जीवन जी रहे हैं। ऐसे में किसी नई मस्जिद को 'बाबरी मस्जिद' नाम देना नए विवाद और टकराव को जन्म दे सकता है। उन्होंने कबीर से आग्रह किया कि मस्जिद का निर्माण अवश्य कराएँ, लेकिन उसके लिए कोई 'दूसरा प्यारा और बेहतर नाम' चुनें।
आगे क्या होगा
मौलाना शहाबुद्दीन का यह पत्र सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित है और इस पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है। वक्फ बोर्ड के गठन और जाँच की माँग को लेकर उत्तर प्रदेश की मुस्लिम आबादी के विभिन्न वर्गों की निगाहें अब शासन के रुख पर टिकी हैं। धार्मिक स्थलों के नामकरण का मुद्दा भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनने की संभावना है।