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एएफएमसी के 60वें बैच की पासिंग आउट परेड, पुणे में सशस्त्र बलों में कमीशन

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एएफएमसी के 60वें बैच की पासिंग आउट परेड, पुणे में सशस्त्र बलों में कमीशन

सारांश

पुणे के एएफएमसी से 60वें बैच के मेडिकल कैडेट्स ने सशस्त्र बलों में कदम रखा — छह दशकों की परंपरा और बढ़ती 'नारी शक्ति' का संगम। सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन की अगुआई में हुई इस परेड ने साबित किया कि अनुशासन और समर्पण ही इस संस्थान की असली पहचान है।

मुख्य बातें

एएफएमसी पुणे के 60वें बैच को 10 जुलाई 2026 को भारतीय सशस्त्र बलों में कमीशन किया गया।
सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन , महानिदेशक डीजीएएफएमएस , कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं।
सर्जन सब-लेफ्टिनेंट रेश्मा गोयल ने संस्थान में 'नारी शक्ति' को समान अवसर देने की सराहना की।
फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या फड़के ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सशस्त्र बलों की प्रगति के लिए सकारात्मक बताया।
एएफएमसी अपने छह दशकों में तीनों सेनाओं के लिए चिकित्सा अधिकारी तैयार करता आया है।

पुणे स्थित सशस्त्र बल चिकित्सा महाविद्यालय (एएफएमसी) के 60वें बैच के कैडेट्स को 10 जुलाई 2026 को भारतीय सशस्त्र बलों में औपचारिक रूप से कमीशन किया गया। शुक्रवार की सुबह आयोजित इस कमीशनिंग समारोह और पासिंग आउट परेड में सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) की महानिदेशक एवं सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।

मुख्य अतिथि का संबोधन

सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन ने नवकमीशंड अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा, 'इस स्तर की परेड कभी भी संयोग से नहीं होती। यह आपकी समर्पित प्रैक्टिस, टीमवर्क और उस अनुशासन को दिखाती है जिसे आपने विकसित किया और बनाए रखा है।' उन्होंने एएफएमसी को भारत के श्रेष्ठतम चिकित्सा संस्थानों में स्थान देते हुए कहा कि यह संस्थान केवल मेडिकल शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि इससे कहीं अधिक है।

नवकमीशंड अधिकारियों की प्रतिक्रिया

सर्जन सब-लेफ्टिनेंट रेश्मा गोयल ने कहा, 'मेडिकल की पढ़ाई के लिए किसी स्टूडेंट को इससे बेहतर माहौल नहीं मिल सकता। ट्रेनिंग टीम, टीचर और ट्यूटर जितनी मेहनत करते हैं, उसकी कोई मिसाल नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि यह संस्थान 'नारी शक्ति' को बढ़ावा देता है और सभी को समान अवसर प्रदान करता है।

फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या फड़के ने प्रसन्नता जताते हुए कहा, 'मुझे बहुत खुशी हो रही है कि माता-पिता और मेरे सभी शुभचिंतकों के सामने मैं और मेरे सभी बैचमेट्स कमीशन हो गए हैं।' उन्होंने सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को बलों की प्रगति के लिए सकारात्मक बताया और कहा कि पिछले चार वर्षों में अधिकारियों के मार्गदर्शन ने उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाई।

परिजनों का गर्व

कर्नल जगमोहन गोयल, जो सर्जन सब-लेफ्टिनेंट रेश्मा गोयल के पिता हैं, ने इस अवसर को 'बहुत गर्व और भावुक कर देने वाला पल' बताया। उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि देश की बेटियाँ आगे बढ़ें और देश की सेवा करें — इससे अच्छा हमारे लिए और क्या हो सकता है।'

एएफएमसी और सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा का महत्व

एएफएमसी पुणे भारत के उन चुनिंदा संस्थानों में से एक है जो चिकित्सा शिक्षा को सैन्य अनुशासन के साथ जोड़ता है। यहाँ से कमीशन होने वाले अधिकारी तीनों सेनाओं — थलसेना, नौसेना और वायुसेना — में अपनी सेवाएँ देते हैं। 60वें बैच का कमीशन इस संस्थान की छह दशकों की निरंतर सेवा परंपरा का प्रतीक है। यह ऐसे समय में आया है जब सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों की भूमिका तेज़ी से विस्तृत हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तैनाती और स्थायी कमीशन में।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एएफएमसी पुणे का 60वाँ बैच कब कमीशन हुआ?
एएफएमसी पुणे का 60वाँ बैच 10 जुलाई 2026 को पासिंग आउट परेड के साथ भारतीय सशस्त्र बलों में कमीशन हुआ। यह समारोह शुक्रवार की सुबह पुणे में आयोजित किया गया।
इस कमीशनिंग समारोह की मुख्य अतिथि कौन थीं?
सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा (डीजीएएफएमएस) की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने नवकमीशंड अधिकारियों को संबोधित करते हुए अनुशासन और टीमवर्क की सराहना की।
एएफएमसी से कमीशन अधिकारी किन सेनाओं में सेवा देते हैं?
एएफएमसी पुणे से कमीशन होने वाले चिकित्सा अधिकारी भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना — तीनों सेनाओं में अपनी सेवाएँ देते हैं। यह संस्थान चिकित्सा शिक्षा को सैन्य अनुशासन के साथ जोड़ता है।
इस बैच में महिला अधिकारियों की भूमिका कैसी रही?
सर्जन सब-लेफ्टिनेंट रेश्मा गोयल और फ्लाइंग ऑफिसर अनन्या फड़के सहित कई महिला अधिकारियों ने इस बैच में कमीशन प्राप्त किया। दोनों ने संस्थान में समान अवसर और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सशस्त्र बलों के लिए सकारात्मक बताया।
एएफएमसी पुणे क्यों महत्वपूर्ण है?
एएफएमसी पुणे भारत के प्रमुख सैन्य चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जो पिछले छह दशकों से तीनों सेनाओं के लिए प्रशिक्षित चिकित्सा अधिकारी तैयार कर रहा है। 60वाँ बैच इस निरंतर परंपरा का मील का पत्थर है।
राष्ट्र प्रेस
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