4 जुलाई 2026
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मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड-ऑनलाइन गेमिंग रैकेट तोड़ा, सरगना समेत 6 गिरफ्तार

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मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड-ऑनलाइन गेमिंग रैकेट तोड़ा, सरगना समेत 6 गिरफ्तार

सारांश

मुंबई क्राइम ब्रांच ने अंधेरी के मरोल इलाके से साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन गेमिंग के लिए फर्जी बैंक खाते संचालित करने वाले गिरोह को तोड़ा। सरगना समेत 6 गिरफ्तार, 66 ATM कार्ड, 122 चेकबुक और 68 फर्जी रबर स्टैंप बरामद — खाते डिब्रूगढ़ तक नेटवर्क से जुड़े थे।

मुख्य बातें

मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने 4 जुलाई 2026 को अंधेरी पश्चिम के मरोल में छापा मारकर साइबर फ्रॉड-गेमिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया।
गिरोह के सरगना समेत 6 आरोपी गिरफ्तार ; सभी को 8 जुलाई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेजा गया।
बरामदगी में 66 ATM कार्ड , 122 चेकबुक , 19 बैंक पासबुक , 68 फर्जी रबर स्टैंप , 2 लैपटॉप और 12 कंपनियों के सिम कार्ड शामिल।
फर्जी करंट अकाउंट के डेबिट कार्ड व सिम कार्ड डिब्रूगढ़ भेजे जाते थे, जहाँ ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी में इस्तेमाल होते थे।
मामला वायुगति पुलिस थाने में दर्ज; जाँच जारी, अन्य संदिग्धों की तलाश।

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने 4 जुलाई 2026 को अंधेरी पश्चिम के मरोल इलाके में छापा मारकर साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग के लिए फर्जी बैंक खातों का दुरुपयोग करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की।

कैसे काम करता था गिरोह

जाँच में सामने आया कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों में नए करंट अकाउंट खुलवाते थे। इन खातों से जुड़े डेबिट कार्ड और सिम कार्ड सक्रिय कर उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों — खासकर असम के डिब्रूगढ़ — भेजा जाता था। वहाँ इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और साइबर फ्रॉड के लिए किया जाता था। क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि मरोल स्थित एक कार्यालय से फर्जी कंपनी के नाम पर यह पूरा तंत्र संचालित हो रहा है।

बरामदगी का ब्यौरा

पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामग्री बरामद की:

66 एटीएम कार्ड, 12 मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड, 19 बैंक पासबुक, 122 चेकबुक, 2 लैपटॉप, एक कैनन कलर प्रिंटर, 2 पेन ड्राइव और 68 फर्जी रबर स्टैंप। यह सामग्री इस बात की पुष्टि करती है कि गिरोह व्यवस्थित तरीके से बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहा था।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ वायुगति पुलिस थाने में मामला दर्ज किया। अदालत में पेश किए जाने पर सभी को 8 जुलाई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश उपाध्याय और पुलिस उपायुक्त राज तिलक रोशन के मार्गदर्शन में अंजाम दी गई।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि फर्जी करंट अकाउंट के ज़रिए ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को वित्तपोषित करने का यह तरीका मनी-लॉन्ड्रिंग की एक उभरती हुई प्रवृत्ति है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और साइबर अपराध इकाइयाँ राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैक कर रही हैं। मामले की आगे की जाँच क्राइम ब्रांच यूनिट-2 कर रही है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि अंतर-राज्यीय ऑपरेशन है — जिसकी जड़ें बैंकिंग प्रणाली की केवाईसी खामियों में हैं। असली सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जी करंट अकाउंट खुले कैसे — और बैंकों की आंतरिक निगरानी कहाँ चूकी।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई क्राइम ब्रांच ने किस रैकेट का भंडाफोड़ किया?
मुंबई क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो फर्जी दस्तावेजों से करंट अकाउंट खुलवाकर उनका इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन गेमिंग के लिए करता था। यह ऑपरेशन अंधेरी पश्चिम के मरोल इलाके में स्थित एक कार्यालय से संचालित हो रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से क्या बरामद हुआ?
पुलिस ने 66 ATM कार्ड, 12 मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड, 19 बैंक पासबुक, 122 चेकबुक, 2 लैपटॉप, एक कैनन कलर प्रिंटर, 2 पेन ड्राइव और 68 फर्जी रबर स्टैंप बरामद किए। यह सामग्री बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज निर्माण की ओर इशारा करती है।
आरोपियों को कब तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है?
अदालत ने सभी 6 आरोपियों को 8 जुलाई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मामले की आगे की जाँच क्राइम ब्रांच यूनिट-2 कर रही है।
डिब्रूगढ़ का इस रैकेट से क्या संबंध है?
जाँच के अनुसार, मुंबई में खुलवाए गए फर्जी बैंक खातों के डेबिट कार्ड और सिम कार्ड सक्रिय करके असम के डिब्रूगढ़ भेजे जाते थे। वहाँ इनका इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और साइबर फ्रॉड की गतिविधियों में किया जाता था, जो इस रैकेट के अंतर-राज्यीय स्वरूप को दर्शाता है।
यह कार्रवाई किन अधिकारियों के नेतृत्व में हुई?
यह ऑपरेशन मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश उपाध्याय और पुलिस उपायुक्त राज तिलक रोशन के मार्गदर्शन में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की टीम ने अंजाम दिया।
राष्ट्र प्रेस
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