मुंबई क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड-ऑनलाइन गेमिंग रैकेट तोड़ा, सरगना समेत 6 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच यूनिट-2 ने 4 जुलाई 2026 को अंधेरी पश्चिम के मरोल इलाके में छापा मारकर साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग के लिए फर्जी बैंक खातों का दुरुपयोग करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस ने गिरोह के सरगना समेत 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की।
कैसे काम करता था गिरोह
जाँच में सामने आया कि आरोपी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न बैंकों में नए करंट अकाउंट खुलवाते थे। इन खातों से जुड़े डेबिट कार्ड और सिम कार्ड सक्रिय कर उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों — खासकर असम के डिब्रूगढ़ — भेजा जाता था। वहाँ इन खातों का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म और साइबर फ्रॉड के लिए किया जाता था। क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि मरोल स्थित एक कार्यालय से फर्जी कंपनी के नाम पर यह पूरा तंत्र संचालित हो रहा है।
बरामदगी का ब्यौरा
पुलिस ने आरोपियों के पास से निम्नलिखित सामग्री बरामद की:
66 एटीएम कार्ड, 12 मोबाइल कंपनियों के सिम कार्ड, 19 बैंक पासबुक, 122 चेकबुक, 2 लैपटॉप, एक कैनन कलर प्रिंटर, 2 पेन ड्राइव और 68 फर्जी रबर स्टैंप। यह सामग्री इस बात की पुष्टि करती है कि गिरोह व्यवस्थित तरीके से बड़े पैमाने पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहा था।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ वायुगति पुलिस थाने में मामला दर्ज किया। अदालत में पेश किए जाने पर सभी को 8 जुलाई 2026 तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। यह कार्रवाई मुंबई पुलिस आयुक्त देवेन भारती, संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) अनिल कुंभारे, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त कृष्ण प्रकाश उपाध्याय और पुलिस उपायुक्त राज तिलक रोशन के मार्गदर्शन में अंजाम दी गई।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में साइबर फ्रॉड के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि फर्जी करंट अकाउंट के ज़रिए ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को वित्तपोषित करने का यह तरीका मनी-लॉन्ड्रिंग की एक उभरती हुई प्रवृत्ति है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय (ED) और साइबर अपराध इकाइयाँ राष्ट्रीय स्तर पर ट्रैक कर रही हैं। मामले की आगे की जाँच क्राइम ब्रांच यूनिट-2 कर रही है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।