28 अक्टूबर 2026
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झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: नाबालिग को जेल भेजने पर मुख्य सचिव तलब, 3 नवंबर को अगली सुनवाई

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झारखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: नाबालिग को जेल भेजने पर मुख्य सचिव तलब, 3 नवंबर को अगली सुनवाई

सारांश

रांची में एक 16 वर्षीय नाबालिग को बाल सुधार गृह की जगह जेल भेजे जाने पर झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को सीधे तलब कर राज्य की बाल न्याय प्रणाली की खामियों को उजागर किया। किशोर की माँ ₹20 लाख मुआवजे की माँग लेकर कोर्ट पहुँची हैं।

मुख्य बातें

झारखंड उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को 16 वर्षीय नाबालिग को जेल भेजे जाने पर मुख्य सचिव को तलब किया।
मामला रांची के सदर थाना क्षेत्र की छिनतई घटना से जुड़ा है; नाबालिग को बाद में डुमरदगा बाल सुधार गृह भेजा गया।
किशोर की माँ ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर राज्य सरकार से ₹20 लाख मुआवजे की माँग की है।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय ने सरकार और उसके अधिवक्ताओं के बीच समन्वय की कमी पर कड़ी नाराजगी जताई।
मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए और सुधार का आश्वासन दिया; अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को निर्धारित।

झारखंड उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर 2026 को रांची के एक 16 वर्षीय नाबालिग को बाल सुधार गृह के बजाय जेल भेजे जाने के मामले में राज्य सरकार पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को सीधे तलब किया। अदालत ने सरकार और उसके विधिक प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की गंभीर कमी पर नाराजगी व्यक्त की और 3 नवंबर 2026 को अगली सुनवाई निर्धारित की।

मामले की पृष्ठभूमि

रांची के सदर थाना क्षेत्र में हुई एक छिनतई की घटना में पुलिस ने एक 16 वर्षीय किशोर को गिरफ्तार कर सीधे जेल भेज दिया था। बाद में जब किशोर का जन्म प्रमाण पत्र सामने आया, तब निचली अदालत के आदेश पर उसे डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह स्थानांतरित किया गया। किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के अनुसार नाबालिग अभियुक्त को जेल में नहीं, बल्कि बाल सुधार गृह में रखा जाना अनिवार्य है।

न्यायालय की टिप्पणी और सरकार की स्थिति

न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत में सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से इस संवेदनशील मामले को प्रभावी ढंग से नहीं रखा जा सका। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार के अधिवक्ता अपना पक्ष सही तरीके से नहीं रख पा रहे, जो सरकार और उसके विधिक प्रतिनिधियों के बीच समन्वय की कमी दर्शाता है।

इसी के चलते अदालत ने मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का निर्देश दिया। मुख्य सचिव ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाएगा, व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे और समन्वय की कमी दूर करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।

याचिकाकर्ता की माँग

किशोर की माँ ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राज्य सरकार से ₹20 लाख मुआवजे की माँग की है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को बिना उसकी आयु की जाँच किए जेल भेज दिया, जो कानूनी प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।

याचिकाकर्ता की पैरवी कर रहे अधिवक्ता वेंकटेश कुमार का तर्क है कि नाबालिग को जेल भेजे जाने जैसे गंभीर मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं हो रहा, जो इस प्रकरण की गंभीरता को और उजागर करता है।

आगे क्या होगा

अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 3 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। मुख्य सचिव के आश्वासन को देखते हुए अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने से छूट दे दी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बाल न्याय प्रणाली में सुधार की माँग उठ रही है और नाबालिगों के अधिकारों को लेकर अदालतें कड़ा रुख अपना रही हैं। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक किशोर तक सीमित नहीं — यह राज्य की बाल न्याय प्रणाली की समग्र जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी नाबालिग की आयु सत्यापित किए बिना उसे जेल भेजा गया। इससे भी चिंताजनक यह है कि सरकार अदालत में अपना पक्ष तक ढंग से नहीं रख सकी — जो दर्शाता है कि विभागों के बीच समन्वय केवल कागजों पर है। मुख्य सचिव का 'सुधार का आश्वासन' तब तक पर्याप्त नहीं, जब तक जवाबदेही का ठोस तंत्र सामने न आए।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को क्यों तलब किया?
रांची में एक 16 वर्षीय नाबालिग को बाल सुधार गृह के बजाय जेल भेजे जाने के मामले में सरकार का पक्ष अदालत में प्रभावी ढंग से नहीं रखा गया, जिस पर न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय ने कड़ी नाराजगी जताई। सरकार और उसके अधिवक्ताओं के बीच समन्वय की कमी को देखते हुए अदालत ने मुख्य सचिव को सीधे तलब किया।
नाबालिग को जेल से बाल सुधार गृह कब और कैसे भेजा गया?
शुरुआत में पुलिस ने किशोर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में जब जन्म प्रमाण पत्र सामने आया, तब निचली अदालत के आदेश पर उसे रांची के डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह में स्थानांतरित किया गया।
किशोर की माँ ने कितने मुआवजे की माँग की है?
याचिकाकर्ता माँ ने झारखंड उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राज्य सरकार से ₹20 लाख मुआवजे की माँग की है। उनका आरोप है कि पुलिस ने आयु सत्यापन किए बिना उनके बेटे को जेल भेजकर कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन किया।
अगली सुनवाई कब होगी और मुख्य सचिव को क्या निर्देश दिया गया?
मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। मुख्य सचिव ने समन्वय सुधारने का आश्वासन दिया, जिसके बाद अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी।
किशोर न्याय कानून के तहत नाबालिग को जेल भेजना क्यों गलत है?
किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के अभियुक्त को सामान्य जेल में नहीं, बल्कि अधिकृत बाल सुधार गृह में रखा जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इस प्रावधान का उल्लंघन करना नाबालिग के मौलिक अधिकारों का हनन माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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