हॉर्स ट्रेडिंग लोकतंत्र के लिए खतरा: नसीम खान का BJP और शिंदे सेना पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता नसीम खान ने 6 जून को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना (शिंदे गुट) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में नेताओं की खरीद-फरोख्त यानी हॉर्स ट्रेडिंग एक नया चलन बन चुकी है, जो देश के लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव, धनबल और धमकियों के ज़रिए उम्मीदवारों को नामांकन वापस लेने पर मजबूर किया जा रहा है।
मुख्य आरोप: खरीद-फरोख्त और धमकी
नसीम खान ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी और शिंदे सेना हर जगह हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल हैं। वे हर जगह पैसे का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और लोगों को अपना नॉमिनेशन वापस लेने के लिए धमका भी रहे हैं।' उन्होंने इसे महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई और चिंताजनक प्रवृत्ति बताया। गौरतलब है कि राज्य में स्थानीय निकाय और अन्य चुनावों के मद्देनज़र राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है।
मोदी सरकार पर आर्थिक विफलता के आरोप
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवधि में देश की अर्थव्यवस्था कमज़ोर हुई है, महंगाई और बेरोज़गारी दोनों बढ़ी हैं। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों ने अलग-अलग दौर में भारत को एक मज़बूत और प्रगतिशील देश बनाने का काम किया।
खान ने जीडीपी आँकड़ों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि 'असली जीडीपी लगभग 2.5% से अधिक नहीं है, लेकिन इसे 4–4.5% से ऊपर दिखाने की कोशिश की जा रही है।' उन्होंने कहा कि दबाव में गलत आर्थिक आँकड़े पेश किए जा रहे हैं। यह उनके अपने दावे हैं; सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राबड़ी देवी-लालू की सुरक्षा हटाने पर प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव की जेड प्लस सुरक्षा हटाए जाने पर नसीम खान ने इसे 'बहुत दुर्भाग्यपूर्ण' बताया। उन्होंने कहा कि BJP केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर विपक्षी नेताओं को दबाने और डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, 'जिन नेताओं को सुरक्षा की ज़रूरत है, उन्हें उचित सुरक्षा दी जानी चाहिए।'
विपक्ष की व्यापक चिंता
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) के बीच राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि राज्य में नामांकन वापसी को लेकर दबाव की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। नसीम खान के ये आरोप उसी व्यापक विपक्षी आख्यान का हिस्सा हैं जो सत्तारूढ़ दल पर संस्थागत दुरुपयोग का आरोप लगाता है।
आगे देखें तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है, क्योंकि राज्य में चुनावी सरगर्मी अभी थमने के आसार नहीं हैं।