नीलम मीणा बनीं पश्चिम बंगाल की नई मुख्य निर्वाचन अधिकारी, चुनाव आयोग ने दी मंजूरी
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने नीलम मीणा को पश्चिम बंगाल का नया मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। 25 मई 2026 को ECI सचिवालय ने पश्चिम बंगाल सरकार के मुख्य सचिव को आधिकारिक पत्र भेजकर इस नियुक्ति की सूचना दी और तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए। मीणा 1998 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और तीन नामों के पैनल में सबसे वरिष्ठ थीं।
नियुक्ति की प्रक्रिया
पश्चिम बंगाल की नई राज्य सरकार ने पहले ECI को तीन आईएएस अधिकारियों का एक पैनल सुझाया था, जिसमें नीलम मीणा, तन्मय चक्रवर्ती और मौमिता गोदारा बसु के नाम शामिल थे। आयोग ने इन तीनों में से मीणा के नाम को अनुमोदित करते हुए उन्हें पूर्व CEO मनोज कुमार अग्रवाल के स्थान पर नियुक्त किया। ECI ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि यह अधिसूचना पश्चिम बंगाल राज्य राजपत्र में पुनः प्रकाशित कराई जाए और एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को भेजी जाए।
पूर्व CEO मनोज कुमार अग्रवाल की नई भूमिका
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल अब राज्य के मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत हैं। यह पद उन्हें तब मिला जब सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राज्य कैबिनेट ने कार्यभार संभाला। गौरतलब है कि अग्रवाल और ECI द्वारा नियुक्त पूर्व विशेष चुनाव पर्यवेक्षक सुब्रत गुप्ता — जिन्हें नए मुख्यमंत्री का मुख्य सलाहकार बनाया गया — दोनों को राज्य में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित करने और हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों को शांतिपूर्ण तरीके से कराने का श्रेय दिया जाता है।
नीलम मीणा: वरिष्ठतम विकल्प
पैनल में शामिल तीनों अधिकारियों में नीलम मीणा सबसे वरिष्ठ हैं। 1998 बैच की आईएएस अधिकारी मीणा का प्रशासनिक अनुभव उन्हें इस संवेदनशील पद के लिए उपयुक्त विकल्प बनाता है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद चुनावी तंत्र को नई दिशा देने की ज़रूरत महसूस की जा रही है।
आगे की राह
ECI के निर्देशानुसार, नीलम मीणा को तत्काल कार्यभार ग्रहण करना है। राज्य सरकार को एक सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट आयोग को सौंपनी होगी। नई CEO के सामने राज्य में आगामी चुनावी प्रक्रियाओं की निगरानी और मतदाता सूची के सुदृढ़ीकरण जैसी प्राथमिकताएँ होंगी।