नेक्सा एवरग्रीन धोखाधड़ी: ईडी ने सुभाष चंद्र बिजनोरिया को किया गिरफ्तार, ₹2,676 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल ऑफिस ने 11 अगस्त 2025 को सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया) को मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप से जुड़े ₹2,676 करोड़ के निवेश धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में आम निवेशकों को ठगा गया।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी ने राजस्थान पुलिस द्वारा नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर यह जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निवेशकों को यह झूठा भरोसा दिलाया कि उनकी राशि गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में भूमि विकास और प्लॉटिंग परियोजनाओं में लगाई जाएगी।
निवेशकों को 60 हफ्तों तक प्रति सप्ताह 3 प्रतिशत निश्चित रिटर्न या प्लॉट देने का वादा किया गया। इसके अतिरिक्त, मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के जरिए नए निवेशकों को जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन और लैपटॉप, मोटरसाइकिल व कार जैसे पुरस्कारों का लालच भी दिया गया — जो एक क्लासिक पोंजी स्कीम की पहचान है।
धोखाधड़ी का तरीका
ईडी की जांच के अनुसार, सुभाष चंद्र बिजनोरिया नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य संचालकों में से एक थे और रणवीर बिजारणिया के साथ मिलकर इस पूरी धोखाधड़ी को नियंत्रित करते थे। अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए उन्होंने अपने सहयोगियों और निवेशकों के नाम पर कंपनियों, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्मों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का एक जटिल जाल खड़ा किया।
इन संस्थाओं के बैंक खातों का उपयोग व्यवस्थित रूप से निवेशकों की राशि एकत्र करने, खातों के बीच धन हस्तांतरित करने, पुराने निवेशकों को पोंजी पद्धति से रिटर्न देने और अचल संपत्ति की खरीद में किया गया — ताकि धन के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व को छिपाया जा सके। सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, निवेशक प्रबंधन, बैंकिंग कार्य और संस्थाओं का पंजीकरण — सभी उनके निर्देशों पर संचालित होते थे।
पूर्व की कार्रवाई
इससे पहले ईडी ने जून 2025 में PMLA की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान ₹2.04 करोड़ नकद राशि के साथ-साथ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। इसके अतिरिक्त, नेक्सा ग्रुप की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े बैंक खातों और क्रिप्टो खातों में जमा लगभग ₹15 करोड़ की राशि को फ्रीज किया गया था।
न्यायिक कस्टडी
सुभाष चंद्र बिजनोरिया को जयपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 13 अगस्त 2025 तक यानी चार दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया। ईडी के अनुसार इस मामले में जांच और आगे की कार्रवाई जारी है।
आगे क्या
यह गिरफ्तारी इस मामले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष कार्रवाई है। मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया की स्थिति और संभावित गिरफ्तारी पर निवेशकों की निगाहें टिकी हैं। पीड़ित निवेशकों को धन वापसी की संभावना जांच की प्रगति और अदालती फैसलों पर निर्भर करेगी।