11 अगस्त 2026
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नेक्सा एवरग्रीन धोखाधड़ी: ईडी ने सुभाष चंद्र बिजनोरिया को किया गिरफ्तार, ₹2,676 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

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नेक्सा एवरग्रीन धोखाधड़ी: ईडी ने सुभाष चंद्र बिजनोरिया को किया गिरफ्तार, ₹2,676 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

सारांश

नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप का ₹2,676 करोड़ का निवेश घोटाला अब ईडी की पकड़ में आ रहा है। धोलेरा स्मार्ट सिटी में प्लॉट का झाँसा देकर हज़ारों निवेशकों को ठगने वाले इस पोंजी नेटवर्क के मुख्य संचालक सुभाष चंद्र बिजनोरिया गिरफ्तार हो चुके हैं। जांच में कंपनियों, क्रिप्टो खातों और अचल संपत्ति का जटिल जाल उजागर हुआ है।

मुख्य बातें

ईडी ने 11 अगस्त 2025 को सुभाष चंद्र बिजनोरिया को PMLA की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया।
नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप पर निवेशकों से ₹2,676 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप।
निवेशकों को धोलेरा स्मार्ट सिटी में प्लॉट और 60 हफ्तों तक 3% साप्ताहिक रिटर्न का झूठा वादा किया गया।
जून 2025 में 25 स्थानों पर छापे में ₹2.04 करोड़ नकद जब्त; बैंक व क्रिप्टो खातों में ₹15 करोड़ फ्रीज।
जयपुर स्पेशल कोर्ट (PMLA) ने 13 अगस्त 2025 तक ईडी हिरासत मंजूर की।
मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया के खिलाफ जांच जारी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जयपुर जोनल ऑफिस ने 11 अगस्त 2025 को सुभाष चंद्र बिजनोरिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजारणिया) को मनी लॉन्ड्रिंग प्रिवेंशन एक्ट (PMLA), 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप से जुड़े ₹2,676 करोड़ के निवेश धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है, जिसमें बड़ी संख्या में आम निवेशकों को ठगा गया।

मामले की पृष्ठभूमि

ईडी ने राजस्थान पुलिस द्वारा नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर यह जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निवेशकों को यह झूठा भरोसा दिलाया कि उनकी राशि गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में भूमि विकास और प्लॉटिंग परियोजनाओं में लगाई जाएगी।

निवेशकों को 60 हफ्तों तक प्रति सप्ताह 3 प्रतिशत निश्चित रिटर्न या प्लॉट देने का वादा किया गया। इसके अतिरिक्त, मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के जरिए नए निवेशकों को जोड़ने पर अतिरिक्त कमीशन और लैपटॉप, मोटरसाइकिल व कार जैसे पुरस्कारों का लालच भी दिया गया — जो एक क्लासिक पोंजी स्कीम की पहचान है।

धोखाधड़ी का तरीका

ईडी की जांच के अनुसार, सुभाष चंद्र बिजनोरिया नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य संचालकों में से एक थे और रणवीर बिजारणिया के साथ मिलकर इस पूरी धोखाधड़ी को नियंत्रित करते थे। अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए उन्होंने अपने सहयोगियों और निवेशकों के नाम पर कंपनियों, एलएलपी, पार्टनरशिप फर्मों और प्रोप्राइटरशिप फर्मों का एक जटिल जाल खड़ा किया।

इन संस्थाओं के बैंक खातों का उपयोग व्यवस्थित रूप से निवेशकों की राशि एकत्र करने, खातों के बीच धन हस्तांतरित करने, पुराने निवेशकों को पोंजी पद्धति से रिटर्न देने और अचल संपत्ति की खरीद में किया गया — ताकि धन के वास्तविक स्रोत और स्वामित्व को छिपाया जा सके। सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, निवेशक प्रबंधन, बैंकिंग कार्य और संस्थाओं का पंजीकरण — सभी उनके निर्देशों पर संचालित होते थे।

पूर्व की कार्रवाई

इससे पहले ईडी ने जून 2025 में PMLA की धारा 17 के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान ₹2.04 करोड़ नकद राशि के साथ-साथ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। इसके अतिरिक्त, नेक्सा ग्रुप की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े बैंक खातों और क्रिप्टो खातों में जमा लगभग ₹15 करोड़ की राशि को फ्रीज किया गया था।

न्यायिक कस्टडी

सुभाष चंद्र बिजनोरिया को जयपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें 13 अगस्त 2025 तक यानी चार दिनों के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया। ईडी के अनुसार इस मामले में जांच और आगे की कार्रवाई जारी है।

आगे क्या

यह गिरफ्तारी इस मामले में ईडी की अब तक की सबसे बड़ी प्रत्यक्ष कार्रवाई है। मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया की स्थिति और संभावित गिरफ्तारी पर निवेशकों की निगाहें टिकी हैं। पीड़ित निवेशकों को धन वापसी की संभावना जांच की प्रगति और अदालती फैसलों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

676 करोड़ की यह धोखाधड़ी केवल एक आपराधिक मामला नहीं है — यह उस बड़ी विफलता का प्रतीक है जिसमें 'स्मार्ट सिटी' और 'गारंटीड रिटर्न' जैसे सरकारी-भाषाई शब्दों का इस्तेमाल आम निवेशकों को ठगने के लिए किया जाता है। धोलेरा जैसी वास्तविक सरकारी परियोजना की आड़ में पोंजी नेटवर्क चलाना दर्शाता है कि वित्तीय साक्षरता और निवेशक सतर्कता की कमी किस तरह शोषण को आमंत्रण देती है। ईडी की कार्रवाई देर से आई — जून 2025 में छापे और अगस्त में पहली गिरफ्तारी, जबकि यह योजना वर्षों से चल रही थी। असली जवाबदेही तब होगी जब पीड़ित निवेशकों को उनका धन वापस मिले, न केवल अदालत में आरोप तय हों।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेक्सा एवरग्रीन धोखाधड़ी क्या है?
नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप एक कथित पोंजी स्कीम है जिसमें रणवीर बिजारणिया और सुभाष चंद्र बिजनोरिया ने निवेशकों को गुजरात के धोलेरा स्मार्ट सिटी में प्लॉट और 60 हफ्तों तक 3% साप्ताहिक रिटर्न का झूठा वादा कर ₹2,676 करोड़ जमा किए। यह राशि वास्तव में निवेश में नहीं लगाई गई, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाई गई।
सुभाष चंद्र बिजनोरिया को क्यों गिरफ्तार किया गया?
ईडी के अनुसार, सुभाष चंद्र बिजनोरिया नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के मुख्य संचालकों में से एक थे जिन्होंने अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए कंपनियों, एलएलपी और बैंक खातों का जाल बनाया। उन्हें PMLA, 2002 की धारा 19 के तहत 11 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया।
ईडी ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
जून 2025 में ईडी ने जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 स्थानों पर छापे मारे, ₹2.04 करोड़ नकद जब्त किए और लगभग ₹15 करोड़ के बैंक व क्रिप्टो खाते फ्रीज किए। अगस्त 2025 में सुभाष चंद्र बिजनोरिया की गिरफ्तारी इस मामले में पहली प्रत्यक्ष हिरासत है।
इस मामले में निवेशकों को पैसा वापस मिलेगा?
फिलहाल जांच जारी है और अदालती प्रक्रिया शुरुआती चरण में है। पीड़ित निवेशकों को धन वापसी की संभावना जब्त संपत्तियों की नीलामी और अदालती आदेशों पर निर्भर करेगी, जिसमें समय लग सकता है।
मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया की क्या स्थिति है?
ईडी की जांच में रणवीर बिजारणिया को इस धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी बताया गया है। फिलहाल उनके खिलाफ जांच जारी है, लेकिन अब तक उनकी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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