निरहुआ का पलटवार: 'सिर्फ भोजपुरी सिनेमा को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
भोजपुरी अभिनेता और राजनेता दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' ने 18 जुलाई को भोजपुरी सिनेमा पर लगातार हो रही आलोचनाओं का सीधा जवाब दिया। आलोचकों का कहना है कि भोजपुरी फिल्मों में महिलाओं को वस्तु की तरह दर्शाया जाता है और अश्लील कंटेंट को बढ़ावा दिया जाता है। निरहुआ ने इन आरोपों को एकतरफा बताते हुए कहा कि चंद प्रोजेक्ट्स के आधार पर पूरी इंडस्ट्री को एक ही तराजू पर तौलना सही नहीं है।
निरहुआ का मुख्य तर्क
निरहुआ ने स्पष्ट किया कि हर क्षेत्रीय और राष्ट्रीय फिल्म इंडस्ट्री विविध प्रकार का कंटेंट बनाती है और भोजपुरी सिनेमा को अकेले निशाने पर लेना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि हर इंडस्ट्री में हर तरह की फिल्में और हर तरह का कंटेंट बनता है — जैसे बॉलीवुड, साउथ इंडियन सिनेमा, भोजपुरी सिनेमा और मराठी सिनेमा हैं, वैसे ही हर इंडस्ट्री दर्शकों के हर वर्ग की पसंद का ध्यान रखती है।'
चुनिंदा कंटेंट दिखाने पर सवाल
भोजपुरी फिल्मों में आपत्तिजनक सामग्री की अधिकता के सवाल पर निरहुआ ने कहा, 'जब हम सिर्फ एक खास तरह के काम को ही दिखाते हैं तो ऐसा लगने लगता है कि वहाँ बस वैसा ही काम हो रहा है। यह सच नहीं है। अच्छा और बुरा काम हर जगह होता है।' उनका यह बयान उस मीडिया कवरेज पर भी एक परोक्ष टिप्पणी है जो प्रायः भोजपुरी इंडस्ट्री के नकारात्मक पहलुओं को ही उजागर करती है।
कमियाँ हर इंडस्ट्री में
निरहुआ ने एक व्यापक दार्शनिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा, 'लाख बुराइयाँ सबमें होती हैं। कोई भी इंसान कमियों से परे नहीं होता। ऐसा कोई बाग दिखा दीजिए जहाँ गुलाब में काँटे न हों। यह हर जगह होता है। बस कुछ चीज़ें अधिक दिखाई जाती हैं, इसलिए लोगों को लगने लगता है कि वहाँ बस वही सब है।' उनका कहना है कि किसी इंडस्ट्री की कमियों को उसकी सम्पूर्ण पहचान नहीं बनाना चाहिए।
निरहुआ का करियर और हालिया काम
भोजपुरी सिनेमा के शीर्ष सितारों में शुमार निरहुआ ने 'निरहुआ रिक्शावाला', 'निरहुआ हिंदुस्तानी', 'पटना से पाकिस्तान', 'बॉर्डर', 'सिपाही', 'जिगरवाला' और 'निरहुआ चलल लंदन' जैसी सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है। अभिनेत्री आम्रपाली दुबे के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय रही है। हाल ही में वे ओटीटी सीरीज़ 'ग्राम चिकित्सालय' सीज़न 2 में नज़र आए, जिसमें अमोल पाराशर, विनय पाठक और आकांक्षा रंजन भी अहम भूमिकाओं में थे। दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने इस शो की सराहना की।
बड़ा संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब भोजपुरी कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया और मीडिया में बहस तेज़ है। गौरतलब है कि भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री उत्तर प्रदेश और बिहार में करोड़ों दर्शकों तक पहुँचती है और इसका सांस्कृतिक प्रभाव व्यापक है। निरहुआ राजनीति में भी सक्रिय हैं, जो उनके इस बयान को एक अतिरिक्त सार्वजनिक आयाम देता है।