सियाचिन बेस कैंप पहुंचे नीति आयोग उपाध्यक्ष डॉ. लाहिड़ी, उत्तरी ग्लेशियर का हवाई निरीक्षण भी किया
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग (नेशनल इंस्टीट्यूशन फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार लाहिड़ी ने अपनी टीम के साथ दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र सियाचिन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सियाचिन बेस कैंप का स्थलीय निरीक्षण किया और उत्तरी ग्लेशियर का हवाई सर्वेक्षण भी किया। यह दौरा उन विषम परिस्थितियों को नीति-निर्माताओं तक पहुँचाने का प्रयास है, जिनमें भारतीय सेना के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं।
दौरे का विवरण
नीति आयोग ने अपनी आधिकारिक एक्स पोस्ट में लिखा — 'सियाचिन : सीमाओं पर साहस का साक्षी।' डॉ. लाहिड़ी ने वहाँ की अत्यंत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम को करीब से देखा, जहाँ भारतीय सेना के जवान वर्षभर अटूट निष्ठा से तैनात रहते हैं।
दौरे के दौरान सियाचिन ब्रिगेड के कमांडर ने डॉ. लाहिड़ी को विस्तृत ब्रीफिंग दी। उन्होंने रॉकक्राफ्ट ट्रेनिंग स्कूल का भी निरीक्षण किया और सियाचिन वॉर मेमोरियल पर पहुँचकर देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स की ब्रीफिंग
सियाचिन दौरे के बाद फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के मुख्यालय में लेफ्टिनेंट जनरल मदनराज पांडे, जीओसी फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स, ने डॉ. लाहिड़ी को लद्दाख के परिचालन और विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया। इस ब्रीफिंग में आधुनिकीकरण, लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी और सामाजिक पहुँच जैसे विषय शामिल रहे।
गौरतलब है कि लद्दाख, विशेषकर सियाचिन क्षेत्र, केंद्र सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में लगातार ऊपर रहा है। नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी का इस क्षेत्र का प्रत्यक्ष दौरा यह संकेत देता है कि सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को नीति-निर्माण प्रक्रिया में सीधे जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सियाचिन बेस कैंप: एक परिचय
सियाचिन बेस कैंप लद्दाख की नुब्रा घाटी में लगभग 12,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। यह दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र का प्रमुख सैन्य लॉजिस्टिक्स हब और प्रवेश द्वार माना जाता है। लद्दाख के प्रतापपुर क्षेत्र के निकट स्थित यह ठिकाना भारतीय सेना की रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
नीति आयोग की भूमिका
नीति आयोग भारत सरकार का प्रमुख पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक है, जिसका गठन 1 जनवरी 2015 को पुराने योजना आयोग के स्थान पर किया गया था। यह एक कार्यकारी और गैर-सांविधिक निकाय है। इस प्रकार के सीमावर्ती दौरे संस्था को ज़मीनी वास्तविकताओं से जोड़ते हैं, जो नीति-निर्माण को अधिक व्यावहारिक और समग्र बनाने में सहायक होते हैं।
यह दौरा इस बात का प्रतीक है कि भारत सीमा सुरक्षा को केवल सैन्य दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि समग्र विकास नीति के अंग के रूप में भी देख रहा है।