4 अगस्त 2026
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कंधमाल एंटी-नक्सल अभियान: .303 राइफल, विस्फोटक सहित माओवादी हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

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कंधमाल एंटी-नक्सल अभियान: .303 राइफल, विस्फोटक सहित माओवादी हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद

सारांश

ओडिशा के कंधमाल में नक्सल-मुक्त घोषित होने के महीनों बाद भी जंगलों में माओवादी हथियारों का जखीरा मिलना यह साबित करता है कि 'नक्सल-मुक्त' का दर्जा पाना और ज़मीनी सफाई पूरी करना — दोनों अलग-अलग लड़ाइयाँ हैं। 16 जून को बरामद .303 राइफल, डेटोनेटर और विस्फोटक सामग्री इस चुनौती की ताज़ा याद दिलाते हैं।

मुख्य बातें

16 जून 2026 को कंधमाल जिले के घने जंगलों में माओवादी हथियार-डंप का पता चला।
बरामदगी में .303 राइफल, दो 12 बोर बंदूकें, 8 एमएम गन, 63 राउंड कारतूस और पाँच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर शामिल।
अभियान में SOG की दो टीमें और DVF की एक टीम शामिल; बम निरोधक दस्ते ने IED जोखिम की जाँच की।
कंधमाल को 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका था, फिर भी पुराने डंप मिल रहे हैं।
क्षेत्र में SOG, DVF, CRPF और BSF के संयुक्त दल नियमित सर्च अभियान जारी रखे हुए हैं।

ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों ने 16 जून 2026 को घने जंगलों में छिपाए गए माओवादी हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए इस सघन तलाशी अभियान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की दो टीमें और जिला वॉलंटरी फोर्स (DVF) की एक टीम शामिल थी।

अभियान का विस्तार और क्षेत्र

संयुक्त सर्च ऑपरेशन सिटागुड़ा, गंजुगुड़ा, कुटीबरही, गुडरिक्या और लांजम क्षेत्रों में चलाया गया, जो कोटागढ़, बलिगुड़ा और तुमुडीबांधा थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। कोटागढ़ थाना क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादी डंप का पता चलते ही बम निरोधक दस्ते को तत्काल मौके पर बुलाया गया, ताकि किसी भी संभावित आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के खतरे को पहले से निष्क्रिय किया जा सके।

बरामद हथियार और सामग्री

सुरक्षाबलों ने माओवादी डंप से निम्नलिखित सामग्री जब्त की — एक .303 राइफल, दो 12 बोर बंदूकें, दो सिंगल शॉट गन, एक 8 एमएम गन, एक .303 मैगजीन, 18 राउंड .303 कारतूस, 10 राउंड 12 बोर कारतूस, 35 राउंड 8 एमएम कारतूस, 10 मीटर कोडेक्स वायर, पाँच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर तथा कई दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और फील्ड उपकरण। पुलिस ने पुष्टि की है कि यह सामग्री माओवादी कैडरों से संबंधित है।

नक्सल-मुक्त घोषणा के बाद भी पुराने डंप सक्रिय

गौरतलब है कि कंधमाल जिले को 31 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय एंटी-नक्सल रणनीति के तहत पूरी तरह नक्सल-मुक्त घोषित करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया था। इसके बावजूद, सुरक्षाबलों को अब भी दूरदराज के जंगलों में पुराने माओवादी हथियार-डंप मिल रहे हैं — जो यह संकेत देते हैं कि भले ही सक्रिय माओवादी उपस्थिति घटी हो, छिपाई गई सामग्री अभी भी खतरा बनी हुई है।

संयुक्त बल का निरंतर अभियान

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में SOG, DVF, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त दल नियमित रूप से सर्च और एरिया डोमिनेशन अभियान चला रहे हैं। इसका उद्देश्य छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों को खोजकर किसी भी माओवादी गतिविधि के पुनरुत्थान को रोकना है।

आगे की कार्रवाई

अधिकारियों ने बताया कि यह बरामदगी सुरक्षाबलों की सतत सतर्कता का प्रमाण है। बरामद सामग्री को आगे की जाँच के लिए सुरक्षित रखा गया है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र के जंगलों में संभावित माओवादी डंप की पूरी तरह पहचान और निष्क्रियकरण नहीं हो जाता।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल प्रशासनिक लक्ष्य पूर्ति की औपचारिकता? पुराने डंप का अस्तित्व यह संकेत देता है कि माओवादी पीछे हटते समय भी भविष्य के लिए हथियार छोड़ जाते हैं, जो दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है। SOG और CRPF की निरंतर तैनाती सराहनीय है, लेकिन बिना स्थायी खुफिया नेटवर्क और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के, जंगलों की यह 'सफाई' अधूरी रहेगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कंधमाल में माओवादी हथियार जखीरा कब और कहाँ बरामद हुआ?
यह बरामदगी 16 जून 2026 को ओडिशा के कंधमाल जिले के कोटागढ़ थाना क्षेत्र के घने जंगलों में हुई। गुप्त सूचना के आधार पर सिटागुड़ा, गंजुगुड़ा, कुटीबरही, गुडरिक्या और लांजम क्षेत्रों में संयुक्त सर्च ऑपरेशन चलाया गया था।
बरामद हथियारों और विस्फोटकों में क्या-क्या शामिल था?
बरामद सामग्री में एक .303 राइफल, दो 12 बोर बंदूकें, दो सिंगल शॉट गन, एक 8 एमएम गन, 63 राउंड विभिन्न कैलिबर के कारतूस, 10 मीटर कोडेक्स वायर और पाँच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर शामिल थे। इसके अलावा दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और फील्ड उपकरण भी मिले।
इस अभियान में कौन-से सुरक्षाबल शामिल थे?
अभियान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की दो टीमें और जिला वॉलंटरी फोर्स (DVF) की एक टीम शामिल थी। हथियार मिलने के बाद बम निरोधक दस्ते को भी मौके पर बुलाया गया। क्षेत्र में SOG, DVF, CRPF और BSF के संयुक्त दल नियमित अभियान चला रहे हैं।
कंधमाल नक्सल-मुक्त घोषित होने के बाद भी हथियार क्यों मिल रहे हैं?
कंधमाल को 31 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय एंटी-नक्सल रणनीति के तहत नक्सल-मुक्त घोषित किया जा चुका था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, माओवादी पीछे हटते समय दूरदराज के जंगलों में हथियार छिपा जाते हैं, जिन्हें खोजने में समय लगता है — इसीलिए घोषणा के बाद भी पुराने डंप मिल रहे हैं।
इस बरामदगी का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?
अधिकारियों के अनुसार, इस तरह की बरामदगी माओवादी गतिविधियों के संभावित पुनरुत्थान को रोकने में सहायक है। सुरक्षाबल एरिया डोमिनेशन अभियान जारी रखेंगे ताकि शेष छिपे हथियारों को निष्क्रिय किया जा सके और क्षेत्र में स्थायी शांति सुनिश्चित हो।
राष्ट्र प्रेस
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