कंधमाल एंटी-नक्सल अभियान: .303 राइफल, विस्फोटक सहित माओवादी हथियारों का बड़ा जखीरा बरामद
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के कंधमाल जिले में सुरक्षाबलों ने 16 जून 2026 को घने जंगलों में छिपाए गए माओवादी हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का एक बड़ा जखीरा बरामद किया। गुप्त सूचना के आधार पर चलाए गए इस सघन तलाशी अभियान में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की दो टीमें और जिला वॉलंटरी फोर्स (DVF) की एक टीम शामिल थी।
अभियान का विस्तार और क्षेत्र
संयुक्त सर्च ऑपरेशन सिटागुड़ा, गंजुगुड़ा, कुटीबरही, गुडरिक्या और लांजम क्षेत्रों में चलाया गया, जो कोटागढ़, बलिगुड़ा और तुमुडीबांधा थाना क्षेत्रों के अंतर्गत आते हैं। कोटागढ़ थाना क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादी डंप का पता चलते ही बम निरोधक दस्ते को तत्काल मौके पर बुलाया गया, ताकि किसी भी संभावित आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) के खतरे को पहले से निष्क्रिय किया जा सके।
बरामद हथियार और सामग्री
सुरक्षाबलों ने माओवादी डंप से निम्नलिखित सामग्री जब्त की — एक .303 राइफल, दो 12 बोर बंदूकें, दो सिंगल शॉट गन, एक 8 एमएम गन, एक .303 मैगजीन, 18 राउंड .303 कारतूस, 10 राउंड 12 बोर कारतूस, 35 राउंड 8 एमएम कारतूस, 10 मीटर कोडेक्स वायर, पाँच इलेक्ट्रिक डेटोनेटर तथा कई दैनिक उपयोग की वस्तुएँ और फील्ड उपकरण। पुलिस ने पुष्टि की है कि यह सामग्री माओवादी कैडरों से संबंधित है।
नक्सल-मुक्त घोषणा के बाद भी पुराने डंप सक्रिय
गौरतलब है कि कंधमाल जिले को 31 मार्च 2026 तक राष्ट्रीय एंटी-नक्सल रणनीति के तहत पूरी तरह नक्सल-मुक्त घोषित करने का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया था। इसके बावजूद, सुरक्षाबलों को अब भी दूरदराज के जंगलों में पुराने माओवादी हथियार-डंप मिल रहे हैं — जो यह संकेत देते हैं कि भले ही सक्रिय माओवादी उपस्थिति घटी हो, छिपाई गई सामग्री अभी भी खतरा बनी हुई है।
संयुक्त बल का निरंतर अभियान
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, क्षेत्र में SOG, DVF, केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के संयुक्त दल नियमित रूप से सर्च और एरिया डोमिनेशन अभियान चला रहे हैं। इसका उद्देश्य छिपाए गए हथियारों और विस्फोटकों को खोजकर किसी भी माओवादी गतिविधि के पुनरुत्थान को रोकना है।
आगे की कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि यह बरामदगी सुरक्षाबलों की सतत सतर्कता का प्रमाण है। बरामद सामग्री को आगे की जाँच के लिए सुरक्षित रखा गया है। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक क्षेत्र के जंगलों में संभावित माओवादी डंप की पूरी तरह पहचान और निष्क्रियकरण नहीं हो जाता।