क्या ओवैसी के बयान की गंभीरता व्यक्ति पर निर्भर करती है?
सारांश
Key Takeaways
- बयानों की गंभीरता बयान देने वाले पर निर्भर करती है।
- राजनीति में विकास पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है।
- महाराष्ट्र की सामाजिक एकता महत्वपूर्ण है।
- हर चुनाव में मतदाता की सोच बदलती है।
- राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा कार्य पर ध्यान देना चाहिए।
मुंबई, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के 'एक दिन भारत में हिजाब पहनने वाली प्रधानमंत्री बनेगी' वाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे बयानों की गंभीरता बयान देने वाले व्यक्ति पर निर्भर करती है।
राष्ट्र प्रेस से बातचीत में अजित पवार ने कहा कि रोजाना कोई न कोई इस तरह का बयान देता है और हर बयान पर प्रतिक्रिया देना आवश्यक नहीं है।
उन्होंने कहा, "इस बयान को वही लोग गंभीरता से लें, जिनसे यह जुड़ा है। कुछ लोग केवल अपनी दुकान चलाने के लिए इस प्रकार के बयान देते हैं। मेरी स्पष्ट राय है कि इन मुद्दों को छोड़कर, हमें विकास पर चर्चा करनी चाहिए।"
साथ ही, अजित पवार ने मंत्री नितेश राणे के बयान पर पूछे गए सवाल का स्पष्ट उत्तर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियाँ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तय करते हैं। शिवसेना से जुड़े फैसले एकनाथ शिंदे लेते हैं और एनसीपी से संबंधित निर्णय वह स्वयं लेते हैं।
उन्होंने कहा, "यदि हमारी तीनों पार्टियों के किसी मंत्री, सांसद या विधायक ने कोई बयान दिया है, तो यह देखना चाहिए कि वह पार्टी की ओर से है या व्यक्तिगत बयान है। यह सवाल उसी व्यक्ति से पूछा जाना चाहिए। मैं इस पर टिप्पणी कैसे कर सकता हूं?"
महाराष्ट्र की सामाजिक एकता पर जोर देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में रहने वाला हर व्यक्ति महाराष्ट्रीयन है। हम सभी एक हैं और सभी भारतीय एक हैं। इसी सोच के साथ यहां से मेयर चुना जाएगा।
चुनावी राजनीति पर बात करते हुए अजित पवार ने मतदाताओं की सोच को उदाहरण के साथ समझाया। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में जनता की सोच अलग होती है। लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की 48 में से 31 सीटें विपक्ष को मिली थीं और महायुति को केवल 17 सीटें मिलीं, लेकिन महज पांच महीने बाद विधानसभा चुनाव में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। महायुति को 238 सीटें मिलीं और विपक्ष 85 पर सिमट गया।
अजित पवार ने कहा कि महाराष्ट्र का वोटर देश, राज्य और स्थानीय निकाय चुनावों में विभिन्न मुद्दों और आवश्यकताओं के आधार पर निर्णय करता है। यही लोकतंत्र की ताकत है और यही कारण है कि नेताओं को बयानबाजी से ज्यादा विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।