पाकिस्तान का भूजल संकट: शासन विफलता और नीतिगत लापरवाही की कीमत चुका रहे करोड़ों लोग
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में गहराता भूजल संकट प्राकृतिक जल की कमी का नहीं, बल्कि दशकों की शासन विफलताओं, नीतिगत निष्क्रियता और संसाधनों के कुप्रबंधन का परिणाम है। 'यूरोपियन टाइम्स' की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि सरकारी विभागों के बीच जिम्मेदारियों का अस्पष्ट बंटवारा, कमज़ोर नियमन और जवाबदेही की पूर्ण अनुपस्थिति ने पाकिस्तान के जल संकट को विकट रूप दे दिया है।
असली कारण क्या हैं
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान लंबे समय से अपने जल संकट के लिए भारत, जलवायु परिवर्तन और बढ़ती जनसंख्या को दोषी ठहराता आया है। लेकिन रिपोर्ट इस तर्क को खारिज करती है और कहती है कि असली वजहें खराब नीतियाँ, प्रांतों के बीच पानी का असमान वितरण, जल चोरी और व्यापक भ्रष्टाचार हैं।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि बड़ी नदियों और पर्याप्त भूजल संसाधनों के बावजूद असमान नहर वितरण, अक्षम सिंचाई व्यवस्था, भूजल का अनियंत्रित दोहन, निवेश की कमी और संस्थागत विफलताओं ने एक प्रबंधन समस्या को संकट में बदल दिया है।
सिंधु जल संधि और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि (IWT) को स्थगित कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान के कई सांसदों ने देश के जल संकट के लिए नई दिल्ली को जिम्मेदार ठहराना शुरू किया। हालाँकि रिपोर्ट इसे पाकिस्तान की अपनी नीतिगत विफलताओं से ध्यान हटाने की कोशिश बताती है।
रिपोर्ट के अनुसार इन विफलताओं के लिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, और यह भावना पाकिस्तानी नीति-निर्माताओं के बीच आत्म-मंथन की कमी को उजागर करती है।
पाँच दशकों में एक भी बड़ा जलाशय नहीं
रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है — पाकिस्तान ने पिछले 50 वर्षों में पानी के भंडारण के लिए एक भी बड़ा जलाशय नहीं बनाया। इसके साथ ही देश में 15 लाख से अधिक ट्यूबवेल भूजल की अनियंत्रित निकासी कर रहे हैं। सस्ती बिजली और बड़े पैमाने पर बिजली चोरी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
रिपोर्ट के मुताबिक किसी भी सरकार ने इन समस्याओं के समाधान के लिए ठोस प्रयास नहीं किए, जिसका परिणाम कम कृषि जल उत्पादकता, जर्जर नहर प्रणाली, तेज़ी से घटता भूजल स्तर और कमज़ोर नियामक ढाँचे के रूप में सामने आया है।
क्वेटा: एक शहर जो प्यासा है
बलूचिस्तान की राजधानी क्वेटा में जुलाई में भूजल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया। पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' के अनुसार वाटर एंड सैनिटेशन एजेंसी (WASA) की जलापूर्ति कई इलाकों में पूरी तरह बंद या बेहद सीमित हो गई।
सरीआब, सिर्की रोड, समुंगली रोड, जिन्ना टाउन, कंबरानी रोड, सैटेलाइट टाउन, सब्जल रोड और खयाबान-ए-आगा जैसे इलाकों के निवासियों को पानी की भीषण किल्लत का सामना करना पड़ा। कई परिवारों को छह महीने तक नल का पानी नहीं मिला और महिलाओं, बुज़ुर्गों व बच्चों को दूर-दूर तक पैदल चलकर पानी लाना पड़ा।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नियमित बिल भरने के बावजूद उन्हें पानी नहीं मिल रहा, और शिकायतों पर अधिकारियों की ओर से केवल आश्वासन ही मिलता रहा। यह स्थिति दर्शाती है कि शासन की विफलता का सबसे बड़ा बोझ आम नागरिक ही उठा रहे हैं।
आगे की राह
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की सरकार समय-समय पर जल प्रबंधन सुधारों की आवश्यकता स्वीकार करती रही है, परंतु आवश्यक सुधार लागू करने में बार-बार विफल रही है। जब तक जवाबदेही तय नहीं होती और संरचनात्मक सुधार नहीं किए जाते, भूजल संकट और गहराता जाएगा — और इसकी कीमत सबसे अधिक आम जनता को चुकानी होगी।