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प्रणवानंदराम स्वामीजी को जान से मारने की धमकी: संतों ने CM शिवकुमार से सुरक्षा की माँग की

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प्रणवानंदराम स्वामीजी को जान से मारने की धमकी: संतों ने CM शिवकुमार से सुरक्षा की माँग की

सारांश

पिछड़े समुदायों के संतों ने CM शिवकुमार को ज्ञापन सौंपकर प्रणवानंदराम महास्वामीजी की सुरक्षा की माँग की — सोशल मीडिया पर कथित जान से मारने की धमकियों के बाद। स्वामीजी पहले सिद्धारमैया की नीतियों की आलोचना कर चुके हैं, जिससे कुरुबा समुदाय में तीखी प्रतिक्रिया हुई और अंतर-सामुदायिक तनाव बढ़ा।

मुख्य बातें

पिछड़े समुदायों के संतों के प्रतिनिधिमंडल ने 17 जून 2026 को CM डीके शिवकुमार से सदाशिवनगर आवास पर मुलाकात की।
प्रणवानंदराम महास्वामीजी को सोशल मीडिया और टेलीविजन पर कथित तौर पर जान से मारने की धमकियाँ मिली हैं।
स्वामीजी ने गोकर्ण सम्मेलन में ईडिगा व अन्य पिछड़े वर्गों के साथ अन्याय और असमान धन आवंटन पर चिंता जताई थी।
कुरुबा समुदाय के संगठनों ने कथित तौर पर स्वामीजी के बयानों का विरोध किया और प्रदर्शन की योजना बनाई।
प्रतिनिधिमंडल में 7 समुदायों के संत शामिल थे, जिनमें बंजारा, विश्वकर्मा, पिंजारा और अर्ध-खानाबदोश समुदाय के प्रतिनिधि थे।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बेंगलुरु में 17 जून 2026 को पिछड़े और हाशिए पर पड़े समुदायों के प्रतिनिधि संतों के एक प्रतिनिधिमंडल ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से मुलाकात कर प्रणवानंदराम महास्वामीजी को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने की माँग की। संतों ने सोशल मीडिया और टेलीविजन पर कथित तौर पर प्रसारित जान से मारने की धमकियों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।

मुलाकात और ज्ञापन का विवरण

ब्रह्मश्री नारायणगुरु शक्ति पीठ ट्रस्ट और अत्यंत पिछड़े समुदायों के मठाधीशों के संघ से जुड़े संतों ने सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर यह भेंट की। प्रतिनिधिमंडल में सर्वधर्म समाज के संगमानंद स्वामीजी, विश्वकर्मा समुदाय के डोड्डेन्द्र स्वामीजी, बंजारा समुदाय के सरदार सेवलल स्वामीजी, कुंभारा समुदाय के बसवमूर्ति कुंभारा गुड्डैया स्वामीजी, हूगर समुदाय के हल्लिरया नाटिकर स्वामीजी, अर्ध-खानाबदोश समुदाय के करुणाकर स्वामीजी और पिंजारा समुदाय के मरुलशंकर स्वामीजी शामिल थे।

विवाद की पृष्ठभूमि

कलबुर्गी स्थित ब्रह्मश्री नारायणगुरु शक्ति पीठ और हावेरी स्थित शरणबसवेश्वर मठ से जुड़े प्रणवानंदराम महास्वामीजी ने हाल ही में गोकर्ण में आयोजित एक सम्मेलन के दौरान ईडिगा समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ हो रहे कथित अन्याय पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने सरकार से सभी समुदायों को समान रूप से धन आवंटित करने का आग्रह किया था और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कार्यकाल के दौरान अपनाई गई नीतियों पर सवाल उठाए थे।

गौरतलब है कि प्रणवानंद स्वामीजी ने इससे पहले भी कई मौकों पर सिद्धारमैया को पिछड़े वर्गों का मसीहा बताए जाने के दावे को चुनौती दी थी और दिल्ली में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री पद की माँग भी की थी।

धमकियों और सामुदायिक तनाव का आरोप

संतों के प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि स्वामीजी की टिप्पणियों के बाद कुरुबा समुदाय के कई संगठनों और नेताओं ने कथित तौर पर उनके बयानों का विरोध किया और प्रदर्शन की योजना बनाई। सिद्धारमैया स्वयं कुरुबा समुदाय से संबंध रखते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने आगे बताया कि टेलीविजन और सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कुछ टिप्पणियों में कथित तौर पर संत को शारीरिक नुकसान पहुँचाने तक की अपील की गई है।

संतों ने चेतावनी दी कि इस प्रकार के घटनाक्रम समुदायों के बीच तनाव को और गहरा कर सकते हैं और संत की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा कर सकते हैं।

सरकार से माँग

प्रतिनिधिमंडल ने राज्य सरकार से प्रणवानंदराम महास्वामीजी को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने और अंतर-सामुदायिक तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में विभिन्न समुदायों के बीच ओबीसी आरक्षण और संसाधन आवंटन को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री शिवकुमार की ओर से अभी तक इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कर्नाटक में ओबीसी राजनीति के गहराते विभाजन का प्रतिबिंब है। प्रणवानंद स्वामीजी की सिद्धारमैया-विरोधी और शिवकुमार-समर्थक स्थिति उन्हें राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है — और यही उनकी सुरक्षा की माँग को महज धार्मिक अपील से परे ले जाती है। कुरुबा समुदाय की तीखी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि ओबीसी आरक्षण और संसाधन वितरण के सवाल पर कर्नाटक की राजनीति कितनी ज्वलनशील हो चुकी है। शिवकुमार के लिए यह एक नाजुक संतुलन है — वे जिस संत के समर्थन से लाभान्वित हुए, उसकी रक्षा करना और साथ ही सिद्धारमैया के समुदाय को नाराज न करना।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रणवानंदराम महास्वामीजी को किस कारण धमकियाँ मिलीं?
प्रणवानंदराम महास्वामीजी ने गोकर्ण में आयोजित एक सम्मेलन में ईडिगा समुदाय और अन्य पिछड़े वर्गों के साथ कथित अन्याय और असमान धन आवंटन पर चिंता जताई थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नीतियों की आलोचना भी की, जिसके बाद कुरुबा समुदाय के संगठनों ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई और सोशल मीडिया पर धमकियाँ सामने आईं।
संतों ने CM शिवकुमार से क्या माँग की?
संतों के प्रतिनिधिमंडल ने CM शिवकुमार को ज्ञापन सौंपकर प्रणवानंदराम महास्वामीजी को पर्याप्त सुरक्षा देने और अंतर-सामुदायिक तनाव को बढ़ने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने की माँग की। उन्होंने टेलीविजन और सोशल मीडिया पर संत को शारीरिक नुकसान पहुँचाने की कथित अपीलों का विशेष उल्लेख किया।
इस प्रतिनिधिमंडल में कौन-से समुदाय शामिल थे?
प्रतिनिधिमंडल में सर्वधर्म समाज, विश्वकर्मा, बंजारा, कुंभारा, हूगर, अर्ध-खानाबदोश और पिंजारा — कुल 7 समुदायों के संत शामिल थे। ये सभी ब्रह्मश्री नारायणगुरु शक्ति पीठ ट्रस्ट और अत्यंत पिछड़े समुदायों के मठाधीशों के संघ से जुड़े हैं।
प्रणवानंदराम स्वामीजी और सिद्धारमैया के बीच विवाद क्या है?
प्रणवानंद स्वामीजी ने कई मौकों पर सिद्धारमैया के पिछड़े वर्गों का मसीहा होने के दावे को चुनौती दी है और दिल्ली में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। उन्होंने डीके शिवकुमार के लिए मुख्यमंत्री पद की माँग भी उठाई थी, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होती है।
कर्नाटक सरकार ने इस ज्ञापन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
17 जून 2026 तक मुख्यमंत्री कार्यालय या राज्य सरकार की ओर से इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर है।
राष्ट्र प्रेस
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