नीट 2026 पेपर लीक: पुणे की 24 साल अनुभवी शिक्षिका मनीषा मांढरे गिरफ्तार, मॉडर्न कॉलेज ने किया निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
पुणे के शिवाजीनगर स्थित मॉडर्न कला, विज्ञान और वाणिज्य महाविद्यालय की जीव विज्ञान शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मांढरे को नीट 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में 16 मई को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी की सूचना मिलते ही कॉलेज के नियामक मंडल ने 19 मई को आपातकालीन बैठक बुलाकर उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से निलंबित कर दिया।
मुख्य घटनाक्रम
मनीषा मांढरे वर्ष 2002 से इस महाविद्यालय की जूनियर विंग में कक्षा 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को जीव विज्ञान पढ़ा रही थीं — यानी 24 वर्षों का शैक्षणिक अनुभव। उनकी इसी विशेषज्ञता के आधार पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने उन्हें नीट परीक्षा से जुड़े अत्यंत गोपनीय कार्य के लिए नियुक्त किया था। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, यह नियुक्ति पूरी तरह NTA और शिक्षिका के बीच सीधे हुई थी, जिसकी जानकारी संस्था को नहीं थी।
निलंबन की कार्रवाई महाराष्ट्र निजी स्कूल कर्मचारी (सेवा की शर्तें) नियमावली 1981 के नियम 33(5) के तहत की गई है और यह 16 मई से ही प्रभावी मानी जाएगी।
कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
मॉडर्न कॉलेज ने एक आधिकारिक पत्र जारी कर इस पूरे मामले से खुद को अलग किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि NTA और शिक्षिका के बीच सारा पत्रव्यवहार और निर्देश सीधे तौर पर होते थे — संस्था इससे पूरी तरह अनभिज्ञ थी। कॉलेज प्रशासन ने इस घटना को 'अत्यंत गंभीर, दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय' बताते हुए कहा कि इससे पूरे शिक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठा को आघात पहुँचा है।
निलंबन की जानकारी पुणे के शिक्षा आयुक्त, स्कूली शिक्षा विभाग के उपनिदेशक और सह-निदेशक को विधिवत दे दी गई है।
सीबीआई जाँच में सहयोग का आश्वासन
कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही जाँच में संस्था पूरा सहयोग करेगी। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक का यह मामला देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
आम जनता और शिक्षा जगत पर असर
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट की परीक्षा प्रक्रिया पहले से ही विवादों के घेरे में है। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की मेहनत और भविष्य से जुड़े इस मुद्दे ने अभिभावकों और छात्रों में गहरी चिंता पैदा की है। आलोचकों का कहना है कि NTA की गोपनीय नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी ऐसी घटनाओं को न्योता देती है।
क्या होगा आगे
CBI की जाँच जारी है और यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि प्रश्नपत्र लीक की श्रृंखला में और कितने लोग शामिल थे। मनीषा मांढरे के निलंबन के बाद अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी अपेक्षित है। NTA की भूमिका और उसकी नियुक्ति प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की माँग भी तेज़ होने की संभावना है।