जालंधर डाक घोटाला: ₹16.56 करोड़ के धन शोधन में सब-पोस्ट मास्टर को 18 महीने की सजा, ईडी की बड़ी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जालंधर जोनल इकाई ने 21 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि पंजाब की एक विशेष अदालत (पीएमएलए), एसएएस नगर (मोहाली) ने जालंधर के नकोदर स्थित दखनी गेट के तत्कालीन सब-पोस्ट मास्टर संजीव कुमार को ₹16.56 करोड़ के धन शोधन मामले में 18 महीने के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। छोटे जमाकर्ताओं की गाढ़ी कमाई को 54 फर्जी डाकघर बचत खातों के जरिए हड़पने का यह मामला वर्षों की जांच के बाद अदालती सजा तक पहुँचा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा 1 फरवरी 2018 को संजीव कुमार और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर में पद के दुरुपयोग, सरकारी धन के गबन और जमाकर्ताओं से धोखाधड़ी के गंभीर आरोप शामिल थे। इसके बाद ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत अपनी स्वतंत्र जांच शुरू की।
गौरतलब है कि नकोदर जैसे अर्ध-शहरी क्षेत्र के डाकघर में छोटे निवेशकों — जो अक्सर बचत के लिए इन सरकारी योजनाओं पर निर्भर होते हैं — के खातों को निशाना बनाया गया, जो इस अपराध को और अधिक गंभीर बनाता है।
धोखाधड़ी का तरीका
ईडी की जांच में सामने आया कि संजीव कुमार ने कथित तौर पर सुनियोजित तरीके से विभिन्न योजनाओं में हेरफेर किया। जांच के अनुसार, आरोपी ने 54 फर्जी बचत खाते खोलकर सरकारी खजाने को ₹3.40 करोड़ का नुकसान पहुँचाया। इसके अतिरिक्त, 41 बचत खातों में हेराफेरी कर ₹2.79 करोड़, 51 आवर्ती जमा (आरडी) खातों में हेरफेर कर ₹1.89 करोड़ तथा ग्राहकों के पीपीएफ और सावधि जमा जैसे अन्य खातों में हेराफेरी कर ₹8.48 करोड़ की सरकारी धनराशि धोखाधड़ी से निकाली गई।
यह समस्त राशि नकद में तथा संजीव कुमार और उनके सहयोगियों द्वारा संचालित कई बैंक खातों के माध्यम से निकाली गई। ईडी के अनुसार, अपराध से अर्जित इस धनराशि का उपयोग विलासितापूर्ण जीवन शैली, जुए, व्यक्तिगत खर्चों और अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया।
अदालती फैसला और सजा
विशेष न्यायालय ने 14 सितंबर को संजीव कुमार को पीएमएलए 2002 की धारा 3 के तहत धन शोधन का दोषी पाया, जो धारा 4 के तहत दंडनीय है। न्यायालय ने एक वर्ष छह महीने (18 महीने) के कठोर कारावास और ₹50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर तीन महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।
उल्लेखनीय है कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान आरोपियों ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत स्वेच्छा से प्ली बार्गेनिंग के जरिए मामले का निपटारा करने का अनुरोध किया था, जिसे विशेष न्यायालय ने स्वीकार कर लिया।
संपत्ति कुर्की और पीड़ितों को राहत
ईडी ने जांच के दौरान 2 मार्च 2025 को अनंतिम कुर्की के माध्यम से ₹42 लाख मूल्य की चल और अचल संपत्तियाँ कुर्क कीं, जिसे बाद में 20 अगस्त 2025 को न्यायालय ने पुष्ट किया। विशेष न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि आरोपी से वसूल की गई राशि कपूरथला मंडल के डाकघर अधीक्षक कार्यालय को देय होगी। पीड़ित विभाग पीएमएलए की धारा 8(8) और संपत्ति बहाली नियम, 2016 के तहत कुर्क संपत्तियों के संबंध में आवेदन कर सकता है।
आगे क्या होगा
यह फैसला डाक विभाग में वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ ईडी की बढ़ती सक्रियता का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीएमएलए के तहत प्ली बार्गेनिंग का यह मामला भविष्य में ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे का एक उदाहरण बन सकता है। कुर्क संपत्तियों से पीड़ित जमाकर्ताओं को आंशिक मुआवजा मिलने की उम्मीद है, हालांकि ₹16.56 करोड़ की तुलना में ₹42 लाख की कुर्की अब भी एक बड़ी खाई दर्शाती है।