राहुल गांधी के 'इडियट' बयान पर लोकसभा में हंगामा, छात्र आंदोलन और NEET पर सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 29 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा में NEET विवाद, छात्र आंदोलन और देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर तीखे सवाल दागे। उनके भाषण में एक छात्रा के हवाले से 'इडियट' शब्द के इस्तेमाल के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने जोरदार विरोध जताया और सदन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
छात्र आंदोलन को बताया लोकतंत्र की असली आवाज़
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं ने जिस तरह शांतिपूर्वक अपनी बात सड़कों पर रखी, उससे उन्हें भरोसा और संतोष मिला। उनके शब्दों में, 'यह गुस्सा नहीं था, यह हिंसा नहीं थी, यह नफरत नहीं थी। यह देश के युवाओं और आने वाली पीढ़ी की गहरी अभिव्यक्ति थी।' उन्होंने सभी राजनीतिक दलों — भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित — से इस अभिव्यक्ति का सम्मान करने की अपील की।
'इडियट' टिप्पणी और सदन में हंगामा
राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही एक छात्रा से हुई बातचीत का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने उससे पूछा था कि 'छात्र होने का क्या मतलब है।' उनके अनुसार, छात्रा ने जवाब दिया कि छात्र वह होता है जिसका मन और दिल खुला हो, जो यह स्वीकार करे कि वह सब कुछ नहीं जानता और जो सीखने के लिए हमेशा तैयार रहे। छात्रा ने यह भी बताया कि एक दूसरी किस्म के लोग भी होते हैं — जो मानते हैं कि वे सब कुछ जानते हैं और दुनिया नहीं बदलती। जब राहुल गांधी ने पूछा कि वह ऐसे लोगों को क्या कहती है, तो छात्रा का जवाब था — 'मैं उन्हें इडियट कहती हूँ।' इस बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामे की स्थिति बन गई।
शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था की बढ़ती महंगाई पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एक परीक्षा के आयोजन पर जितना खर्च होता है, उतना सरकार पूरे शिक्षा बजट पर भी व्यय नहीं करती। उन्होंने सरकार से इस मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की माँग की। गौरतलब है कि यह चर्चा ऐसे समय में हुई जब NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का आक्रोश चरम पर था।
BJP पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने कहा कि अगर BJP नेता अपने बच्चों से पूछते, तो वे भी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन करते। उनका तर्क था कि छात्रों की माँगें पार्टी की सीमाओं से परे हैं और उन्हें राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से सुनना सभी राजनीतिक दलों की साझा जिम्मेदारी है।
आगे क्या
एंटी पेपर लीक बिल पर संसद में चर्चा जारी है और विपक्ष ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह शिक्षा व्यवस्था में सुधार और NEET जैसी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सरकार पर दबाव बनाए रखेगा। छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया और सरकार का अगला कदम इस मुद्दे की दिशा तय करेगा।