योगी सरकार का सख्त एक्शन: राजस्व वादों में लापरवाही पर 4 तहसीलदार व 1 नायब तहसीलदार निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने 3 सितंबर 2026 को राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले चार तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही सभी पाँचों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनिक कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री की समीक्षा से शुरू हुई कार्रवाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की स्थिति की उच्चस्तरीय समीक्षा की थी। उस समीक्षा में उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राजस्व वादों का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
किन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों की न्यायालयवार और अधिकारीवार गहन समीक्षा की गई, जिसमें निस्तारण की गति कई अधिकारियों के स्तर पर संतोषजनक नहीं पाई गई। निलंबित अधिकारियों में शामिल हैं:
तहसीलदार पवन कुमार सिंह — तत्कालीन प्रभारी तहसीलदार, रानीगंज, जनपद प्रतापगढ़, वर्तमान में तहसीलदार प्रयागराज; तहसीलदार अतुल हर्ष — तहसील बलिया; तहसीलदार हरेराम यादव — तत्कालीन नायब तहसीलदार, तहसील धनघटा, वर्तमान में तहसीलदार गोण्डा; तहसीलदार आनन्द ओझा — तहसील खलीलाबाद, संतकबीर नगर; तथा नायब तहसीलदार विवेक कुमार सिंह — तहसील सरोजनीनगर, लखनऊ।
अनुशासनिक प्रक्रिया और आगे की जाँच
राजस्व परिषद सचिव कंचन वर्मा के अनुसार, निलंबन के साथ-साथ संबंधित प्रकरणों में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। जाँच के आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। परिषद ने स्पष्ट किया है कि लंबित राजस्व वादों के निस्तारण की निगरानी लगातार जारी रहेगी और जहाँ भी शिथिलता सामने आएगी, वहाँ नियमानुसार दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे।
किसानों और आम नागरिकों पर असर
राजस्व परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई एकबारगी कदम नहीं है। अधिकारियों के कामकाज की प्रगति की नियमित समीक्षा होती रहेगी। परिषद का कहना है कि इस पूरी मुहिम का उद्देश्य प्रदेश के किसानों एवं आम नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। यह ऐसे समय में आया है जब राजस्व न्यायालयों में भूमि विवाद, वारिसान दर्ज और नामांतरण से जुड़े हजारों मामले वर्षों से लंबित चले आ रहे हैं।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि योगी सरकार ने पहले भी राजस्व प्रशासन में सुधार के लिए कई अभियान चलाए हैं, लेकिन यह पहली बार है जब एक साथ पाँच राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया गया है। जाँच पूरी होने के बाद संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही में और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।