ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर बड़ा हमला: 'सपा राज में सबसे ज़्यादा टूटीं आंबेडकर की मूर्तियाँ'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 20 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे को 'ढकोसला' बताते हुए कड़ा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों और दलित महापुरुषों के प्रति कथित तौर पर विरोधी रवैया रखते हैं और उनके शासनकाल में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सर्वाधिक प्रतिमाएँ तोड़ी गईं।
पीडीए पर सवाल
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए नारा भ्रामक है — कभी वे 'पी' से पंडित, 'डी' से दलित और 'ए' से अहीर बताते हैं, तो कभी 'ए' से अल्पसंख्यक, आधी आबादी या अगड़ा। उन्होंने कहा कि इस नारे की कोई ठोस परिभाषा नहीं है और इसे केवल वोट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
सपा शासन और आंबेडकर प्रतिमाओं पर आरोप
राजभर ने दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों में डॉ. आंबेडकर की असंख्य प्रतिमाएँ तोड़ी गईं। उन्होंने कहा, 'बाबा साहब की प्रतिमा तोड़े जाने का रिकॉर्ड भी समाजवादी पार्टी की सरकार में सबसे ज़्यादा रहा।' उनके अनुसार, सपा के आंकड़े उठाकर देखे जाएँ तो अखिलेश राज में दलितों पर अत्याचार कई गुना बढ़ा था।
आगरा कांड और दलित अत्याचार के आरोप
राजभर ने आगरा के एक मामले का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान एक दलित ग्राम प्रधान को कथित तौर पर सपा कार्यकर्ताओं ने पीट-पीटकर मार डाला, जिनका कसूर केवल इतना था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार के मामलों में यादव और मुस्लिम समुदाय — जो सपा के मतदाता माने जाते हैं — सबसे आगे हैं।
1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र
राजभर ने 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि 'सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहाँ बीजेपी के नेता पहुँच गए — बीजेपी के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती।' उन्होंने अखिलेश यादव के नीले गमछे पर भी तंज कसते हुए कहा, 'सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा 2 जून 1995 की घटना याद दिलाता है।'
योगी सरकार की तारीफ और 2027 का संकेत
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने सपा शासन में आरक्षण में प्रमोशन का आरक्षण समाप्त किया और दलित महापुरुषों के नाम से बने पार्क, जिले व योजनाएँ भी बंद कराईं। इसके विपरीत उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों के सौंदर्यीकरण और प्रतिमाओं के नवीनीकरण के लिए सरकार ने ₹500 करोड़ दिए हैं और सभी जगह काम शुरू हो चुका है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सोच पर 'एक बार फिर पानी फिर जाएगा।'