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ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर बड़ा हमला: 'सपा राज में सबसे ज़्यादा टूटीं आंबेडकर की मूर्तियाँ'

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ओमप्रकाश राजभर का अखिलेश पर बड़ा हमला: 'सपा राज में सबसे ज़्यादा टूटीं आंबेडकर की मूर्तियाँ'

सारांश

सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के PDA नारे को 'ढकोसला' बताकर सीधी चुनौती दी — सपा शासन में आंबेडकर प्रतिमाएँ टूटने और 1995 गेस्ट हाउस कांड का हवाला देते हुए। यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में दलित वोट-बैंक पर तेज होती सियासी लड़ाई का संकेत है।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 20 सितंबर 2026 को अखिलेश यादव के PDA नारे को 'ढकोसला' बताया।
राजभर के अनुसार, 2012–2017 के सपा शासन में जौनपुर, मऊ, सीतापुर, आजमगढ़ समेत कई जिलों में डॉ.
आंबेडकर की सर्वाधिक प्रतिमाएँ तोड़ी गईं।
आगरा में एक दलित ग्राम प्रधान की कथित हत्या का भी उन्होंने उल्लेख किया।
राजभर ने 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का हवाला देते हुए मायावती पर कथित हमले का जिक्र किया।
योगी सरकार ने महापुरुषों के पार्कों के सौंदर्यीकरण के लिए ₹500 करोड़ आवंटित किए हैं।
राजभर ने 2027 में अखिलेश यादव की 'हार' की भविष्यवाणी की।

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 20 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे को 'ढकोसला' बताते हुए कड़ा हमला बोला। राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों और दलित महापुरुषों के प्रति कथित तौर पर विरोधी रवैया रखते हैं और उनके शासनकाल में बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर की सर्वाधिक प्रतिमाएँ तोड़ी गईं।

पीडीए पर सवाल

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव का पीडीए नारा भ्रामक है — कभी वे 'पी' से पंडित, 'डी' से दलित और 'ए' से अहीर बताते हैं, तो कभी 'ए' से अल्पसंख्यक, आधी आबादी या अगड़ा। उन्होंने कहा कि इस नारे की कोई ठोस परिभाषा नहीं है और इसे केवल वोट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

सपा शासन और आंबेडकर प्रतिमाओं पर आरोप

राजभर ने दावा किया कि 2012 से 2017 के बीच सपा सरकार के कार्यकाल में जौनपुर, मऊ, सीतापुर और आजमगढ़ समेत कई जिलों में डॉ. आंबेडकर की असंख्य प्रतिमाएँ तोड़ी गईं। उन्होंने कहा, 'बाबा साहब की प्रतिमा तोड़े जाने का रिकॉर्ड भी समाजवादी पार्टी की सरकार में सबसे ज़्यादा रहा।' उनके अनुसार, सपा के आंकड़े उठाकर देखे जाएँ तो अखिलेश राज में दलितों पर अत्याचार कई गुना बढ़ा था।

आगरा कांड और दलित अत्याचार के आरोप

राजभर ने आगरा के एक मामले का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सपा सरकार के दौरान एक दलित ग्राम प्रधान को कथित तौर पर सपा कार्यकर्ताओं ने पीट-पीटकर मार डाला, जिनका कसूर केवल इतना था कि उन्होंने सपा को वोट नहीं दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि आज भी उत्तर प्रदेश में दलित अत्याचार के मामलों में यादव और मुस्लिम समुदाय — जो सपा के मतदाता माने जाते हैं — सबसे आगे हैं।

1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का जिक्र

राजभर ने 2 जून 1995 के लखनऊ गेस्ट हाउस कांड का उल्लेख करते हुए कहा कि 'सपाई गुंडे मायावती की हत्या करना चाहते थे। संयोग से वहाँ बीजेपी के नेता पहुँच गए — बीजेपी के लोग नहीं होते तो शायद मायावती की हत्या कर दी जाती।' उन्होंने अखिलेश यादव के नीले गमछे पर भी तंज कसते हुए कहा, 'सिर पर लाल टोपी और गले में नीला गमछा 2 जून 1995 की घटना याद दिलाता है।'

योगी सरकार की तारीफ और 2027 का संकेत

राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव ने सपा शासन में आरक्षण में प्रमोशन का आरक्षण समाप्त किया और दलित महापुरुषों के नाम से बने पार्क, जिले व योजनाएँ भी बंद कराईं। इसके विपरीत उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार की सराहना करते हुए कहा कि महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों के सौंदर्यीकरण और प्रतिमाओं के नवीनीकरण के लिए सरकार ने ₹500 करोड़ दिए हैं और सभी जगह काम शुरू हो चुका है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि 2027 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सोच पर 'एक बार फिर पानी फिर जाएगा।'

संपादकीय दृष्टिकोण

जो PDA के ढाँचे को उसी की ज़मीन पर चुनौती देती है। गेस्ट हाउस कांड और आंबेडकर प्रतिमाओं के हवाले पुराने हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक धार अभी भी तेज़ है। असली सवाल यह है कि ₹500 करोड़ के सौंदर्यीकरण का ज़मीनी असर दलित मतदाता तक पहुँचता है या नहीं — क्योंकि वादों और अमल के बीच की खाई उत्तर प्रदेश में कोई नई बात नहीं है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव दलितों और दलित महापुरुषों के प्रति विरोधी रवैया रखते हैं और 2012–2017 के सपा शासन में डॉ. आंबेडकर की सबसे ज़्यादा प्रतिमाएँ तोड़ी गईं। उन्होंने PDA नारे को भी 'ढकोसला' करार दिया।
PDA नारे पर राजभर की क्या आपत्ति है?
राजभर का कहना है कि PDA की परिभाषा बदलती रहती है — अखिलेश यादव कभी इसे पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक बताते हैं, कभी पंडित-दलित-अहीर, कभी आधी आबादी। उनके अनुसार यह नारा केवल वोट खींचने का औज़ार है, दलित हित से इसका कोई संबंध नहीं है।
1995 लखनऊ गेस्ट हाउस कांड क्या था और इसका उल्लेख क्यों किया गया?
2 जून 1995 को लखनऊ के एक गेस्ट हाउस में बसपा सुप्रीमो मायावती पर कथित तौर पर सपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। राजभर ने इस घटना का उल्लेख अखिलेश यादव के नीले गमछे पर तंज कसते हुए किया, यह दर्शाने के लिए कि सपा का दलित-प्रेम कथित तौर पर नकली है।
योगी सरकार ने दलित महापुरुषों के पार्कों के लिए क्या किया है?
राजभर के अनुसार, मौजूदा योगी सरकार ने महापुरुषों के नाम पर बने पार्कों में पुरानी प्रतिमाएँ बदलने, बाउंड्री बनाने और सौंदर्यीकरण के लिए ₹500 करोड़ आवंटित किए हैं और सभी स्थानों पर काम शुरू हो चुका है।
राजभर ने 2027 चुनाव को लेकर क्या भविष्यवाणी की?
राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव जिस सोच के साथ चल रहे हैं, उस पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 'एक बार फिर पानी फिर जाएगा।' उनका यह बयान सपा की दलित राजनीति को सीधी चुनौती माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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