3 अगस्त 2026
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राम मंदिर विरोध पर परमहंस आचार्य ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखा पत्र, संसद में हुए 'सनातन-विरोधी ड्रामे' पर माँगा जवाब

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राम मंदिर विरोध पर परमहंस आचार्य ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखा पत्र, संसद में हुए 'सनातन-विरोधी ड्रामे' पर माँगा जवाब

सारांश

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद परिसर में हुए राम मंदिर चढ़ावा-चोरी के प्रतीकात्मक नाटक पर जवाब माँगा है। पप्पू यादव और राहुल गांधी समेत इंडिया गठबंधन के सांसदों के इस प्रदर्शन को आचार्य ने सनातन-विरोधी और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बराबर बताया।

मुख्य बातें

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने 3 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में राम मंदिर विरोध पर चर्चा की माँग की।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने साधु के वेश में संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा-चोरी का प्रतीकात्मक नाटक किया।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद समेत अन्य इंडिया गठबंधन के सांसद इस प्रदर्शन में शामिल हुए।
आचार्य ने इस प्रदर्शन को सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना बताया, क्योंकि राम मंदिर चढ़ावे की जाँच एसआईटी कर रही है।
आचार्य ने कहा कि संत समाज और देश की जनता सांसदों की मंशा जानना चाहती है।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने सोमवार, 3 अगस्त को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद परिसर के भीतर हुए राम मंदिर चढ़ावा-चोरी के प्रतीकात्मक प्रदर्शन पर सदन में चर्चा की माँग की है। तपस्वी छावनी के प्रमुख आचार्य का कहना है कि संत समाज और देश की जनता यह जानना चाहती है कि सांसदों की मंशा क्या है।

मुख्य घटनाक्रम

यह पत्र उस घटना के बाद लिखा गया जब बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने साधु के वेश में संसद परिसर के भीतर एक प्रतीकात्मक नाटक किया, जिसमें उन्होंने राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी को दर्शाते हुए प्रतीकात्मक रूप से पैसे अपनी जेब में डाले। इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई इंडिया गठबंधन के सांसद दान पेटियों में पैसे डालते देखे गए। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

परमहंस आचार्य की दलीलें

परमहंस आचार्य ने अपने पत्र और बाद में दिए बयान में कहा, 'हमने यह मुद्दा उठाया है कि कैसे इंडिया गठबंधन के सांसदों ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, भगवा वस्त्र और सनातन धर्म का अपमान किया। भले ही आपको भारतीय संस्कृति या सनातन धर्म में विश्वास न हो, लेकिन जो लोग ऐसा विश्वास रखते हैं, आपको उनका अपमान नहीं करना चाहिए।'

आचार्य ने संवैधानिक शपथ का भी हवाला दिया। उनके अनुसार, 'सांसदों के तौर पर आपने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है। जब देश की सर्वोच्च अदालत ने एसआईटी का गठन किया है और जाँच अभी चल रही है, पूरी भी नहीं हुई है, तो आपने जो सनातन-विरोधी ड्रामा किया, वह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बराबर है।'

न्यायपालिका और अराजकता का सवाल

आचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन से देश में न्यायपालिका के प्रति अविश्वास प्रकट करने का काम किया गया है। उनका कहना है कि विपक्षी दलों ने देश में अराजकता फैलाने का प्रयास किया। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों की जाँच कर रही है, और यह प्रक्रिया अभी अधूरी है।

सरकार और संत समाज की प्रतिक्रिया

परमहंस आचार्य ने कहा कि इस मुद्दे पर सांसदों के विचारों को देश की जनता और संत समाज जानना चाहता है, इसीलिए लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजा गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस पत्र का जवाब अवश्य देंगे।

आगे क्या होगा

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इस पत्र पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या संसद में इस विषय पर औपचारिक चर्चा का मार्ग प्रशस्त होता है। यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर से जुड़े चढ़ावे के आरोपों की जाँच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जब सर्वोच्च न्यायालय की एसआईटी जाँच जारी हो, तो संसद परिसर में उसी विषय पर नाट्य प्रदर्शन न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की आशंका उठाता है। परमहंस आचार्य का पत्र इस विवाद को धर्म-राजनीति की बहस से आगे ले जाकर संवैधानिक शपथ और न्यायालय की अवमानना के दायरे में खींचता है — एक ऐसा कोण जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमहंस आचार्य ने लोकसभा स्पीकर को पत्र क्यों लिखा?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद परिसर में हुए राम मंदिर चढ़ावा-चोरी के प्रतीकात्मक नाटक पर सदन में चर्चा की माँग की। उनका कहना है कि इंडिया गठबंधन के सांसदों ने सनातन धर्म का अपमान किया और सुप्रीम कोर्ट की एसआईटी जाँच के दौरान ऐसा प्रदर्शन न्यायालय की अवमानना के बराबर है।
संसद में राम मंदिर विरोध प्रदर्शन क्या था?
बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने साधु के वेश में संसद परिसर के भीतर राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी को दर्शाने के लिए प्रतीकात्मक रूप से पैसे अपनी जेब में डाले। इस प्रदर्शन में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद समेत कई इंडिया गठबंधन के सांसद शामिल हुए।
परमहंस आचार्य ने इस प्रदर्शन को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना क्यों बताया?
आचार्य के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों की जाँच के लिए एसआईटी गठित की है और यह जाँच अभी अधूरी है। ऐसे में संसद परिसर में उसी विषय पर नाट्य प्रदर्शन करना न्यायिक प्रक्रिया के प्रति अविश्वास प्रकट करना है, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के बराबर बताया।
इस पत्र पर लोकसभा स्पीकर का क्या रुख होगा?
परमहंस आचार्य ने आशा व्यक्त की है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस पत्र का जवाब देंगे। अभी तक स्पीकर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद की जाँच कौन कर रहा है?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित एसआईटी राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े आरोपों की जाँच कर रही है। यह जाँच अभी जारी है और पूरी नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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