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गोरखपुर में CM योगी ने ₹495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना का उद्घाटन किया, रामगढ़ ताल होगा स्वच्छ

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गोरखपुर में CM योगी ने ₹495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना का उद्घाटन किया, रामगढ़ ताल होगा स्वच्छ

सारांश

गोरखपुर की दशकों पुरानी जल निकासी समस्या का समाधान करते हुए CM योगी ने ₹495.24 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना का उद्घाटन किया। 17 वार्डों को राहत और रामगढ़ ताल की स्वच्छता के साथ, योगी ने इसे मच्छर और माफिया मुक्त गोरखपुर की ओर पहला कदम बताया।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने 1 नवंबर 2026 को गोरखपुर के बिछिया में ₹495.24 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया।
पहले चरण में 7.75 किलोमीटर आरसीसी नाला, 17.5 किलोमीटर सीवर लाइन, 38 एमएलडी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 14 पुलों का पुनर्निर्माण शामिल।
परियोजना से गोरखपुर के 17 वार्डों के लाखों नागरिकों को जलभराव और बीमारी से राहत मिलेगी।
उपचारित जल ही अब रामगढ़ ताल में जाएगा, जिससे ताल की स्वच्छता सुनिश्चित होगी।
₹92.72 करोड़ का दूसरा चरण, ₹65.99 करोड़ की सड़क और ₹721.40 करोड़ की 'गोरखपुर सीवरेज योजना जोन ए3' की आधारशिला भी रखी गई।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 नवंबर 2026 को गोरखपुर के बिछिया में आयोजित एक कार्यक्रम में ₹495.24 करोड़ की लागत से तैयार 'गोड़धोइया नाला परियोजना' के पहले चरण का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री ने इसे गोरखपुर से मच्छरों और अतिक्रमण की समस्या समाप्त करने की दिशा में पहली निर्णायक परियोजना बताया।

परियोजना में क्या शामिल है

मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले चरण में लगभग 7 किलोमीटर 750 मीटर लंबे आरसीसी नाले का निर्माण पूरा किया गया है। इसके अतिरिक्त 17.5 किलोमीटर लंबी इंटरसेप्टिंग ट्रंक सीवर लाइन, 38 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, 61 एमएलडी का मुख्य पंपिंग स्टेशन और 14 पुलों का पुनर्निर्माण भी इस चरण का हिस्सा है।

योगी आदित्यनाथ ने कहा, 'आज 500 करोड़ रुपए की लागत से इन सभी का उद्घाटन किया जा रहा है। नाले के दोनों तरफ सीवर लाइनें बिछा दी गई हैं, ताकि अब इसमें कोई कचरा न जाए।'

रामगढ़ ताल को स्वच्छता का वरदान

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब इस नाले से निकलने वाला पानी उपचारित होने के बाद ही रामगढ़ ताल में जाएगा। उन्होंने कहा, 'यहां से निकलने वाला पानी भी ट्रीट होने के बाद ही रामगढ़ ताल में जाएगा, जिससे रामगढ़ ताल की स्वच्छता और सुंदरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।' गोड़धोइया नाला लंबे समय से रामगढ़ ताल में प्रदूषित जल प्रवाहित करने का प्रमुख कारण माना जाता था।

17 वार्डों के लाखों लोगों को राहत

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोड़धोइया नाला कभी गोरखपुर की सबसे गंभीर नागरिक समस्याओं में से एक था। बरसात के मौसम में यह जलभराव, गंदगी और संक्रामक बीमारियों का केंद्र बन जाता था। अब इसे एक आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम में रूपांतरित कर दिया गया है, जिससे गोरखपुर के 17 वार्डों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा।

उन्होंने कहा, 'आज गोरखपुर के 17 वार्डों में जल निकासी की समस्या के समाधान के साथ-साथ, यहां कई परियोजनाओं की आधारशिला रखने का कार्यक्रम भी पूरा किया जा रहा है।'

नई परियोजनाओं की आधारशिला

उद्घाटन के साथ ही मुख्यमंत्री ने कई नई विकास परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी। इनमें ₹92.72 करोड़ की लागत से बनने वाली गोड़धोइया नाला परियोजना का दूसरा चरण, नाले के किनारे ₹65.99 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली सड़क और ₹721.40 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 'गोरखपुर सीवरेज योजना जोन ए3' शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार नगरीय अवसंरचना के आधुनिकीकरण पर विशेष ज़ोर दे रही है। गौरतलब है कि गोरखपुर लंबे समय से जलजनित बीमारियों, विशेषकर इंसेफेलाइटिस के लिए संवेदनशील क्षेत्र रहा है, और इस परियोजना को उस संदर्भ में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा रहा है।

आगे की राह

दूसरे चरण और सीवरेज योजना के पूरा होने के बाद गोरखपुर के समग्र जल निकासी तंत्र में व्यापक सुधार अपेक्षित है। रामगढ़ ताल के पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली और शहर को जलभराव-मुक्त बनाने की दिशा में ये परियोजनाएं दीर्घकालिक आधार तैयार करती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस शहर की दीर्घकालिक उपेक्षा का भी प्रमाण है जो दशकों से इंसेफेलाइटिस और जलजनित बीमारियों के लिए बदनाम रहा। ₹495 करोड़ की यह परियोजना अवसंरचना में बड़ा निवेश है, पर असली कसौटी यह होगी कि रामगढ़ ताल की जल गुणवत्ता और 17 वार्डों में जलभराव में मापनीय सुधार कितने वर्षों में दिखता है। गोरखपुर मुख्यमंत्री का गृहनगर है — इसलिए विकास की प्राथमिकता स्वाभाविक है, लेकिन ₹721 करोड़ की सीवरेज योजना सहित कुल निवेश के सामाजिक ऑडिट की माँग भी उतनी ही स्वाभाविक होगी।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोड़धोइया नाला परियोजना क्या है?
गोड़धोइया नाला परियोजना गोरखपुर की सबसे पुरानी जल निकासी समस्या को हल करने के लिए बनाई गई एक बहु-चरणीय अवसंरचना योजना है। पहले चरण में ₹495.24 करोड़ की लागत से 7.75 किलोमीटर आरसीसी नाला, सीवर लाइन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 14 पुलों का पुनर्निर्माण किया गया है।
रामगढ़ ताल की स्वच्छता में यह परियोजना कैसे मदद करेगी?
अब नाले से निकलने वाला पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में उपचारित होने के बाद ही रामगढ़ ताल में प्रवाहित होगा। इससे ताल में गंदे नाले का पानी सीधे जाना बंद होगा और उसकी स्वच्छता एवं सुंदरता बरकरार रहेगी।
इस परियोजना से गोरखपुर के किन इलाकों को फायदा होगा?
परियोजना से गोरखपुर के 17 वार्डों के लाखों नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा। इन वार्डों में बरसात के दौरान जलभराव और गंदगी की गंभीर समस्या रहती थी, जो अब आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम से नियंत्रित होगी।
परियोजना के दूसरे चरण में क्या होगा?
दूसरे चरण में ₹92.72 करोड़ की लागत से गोड़धोइया नाले का आगे का विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा ₹65.99 करोड़ की सड़क और ₹721.40 करोड़ की 'गोरखपुर सीवरेज योजना जोन ए3' की भी आधारशिला 1 नवंबर 2026 को रखी गई है।
CM योगी ने इस परियोजना को मच्छर-माफिया से क्यों जोड़ा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह परियोजना केवल नाले की सफाई नहीं, बल्कि गोरखपुर से मच्छरों और माफिया को खत्म करने की दिशा में पहली पूर्ण परियोजना है। गोरखपुर जलजनित और मच्छर-जनित बीमारियों के लिए संवेदनशील रहा है, और इस परियोजना को उस समस्या के स्थायी समाधान की शुरुआत बताया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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