31 अगस्त 2026
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सहरसा में आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई: दो ट्रेनों से 14 किलो गांजा और 18.75 लीटर शराब बरामद

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सहरसा में आरपीएफ की बड़ी कार्रवाई: दो ट्रेनों से 14 किलो गांजा और 18.75 लीटर शराब बरामद

सारांश

सहरसा में आरपीएफ ने एक ही रात दो ट्रेनों — राज्य रानी एक्सप्रेस और वैशाली एक्सप्रेस — पर कार्रवाई करते हुए 14 किलो गांजा और 18.75 लीटर शराब बरामद की। रेल मदद सेवा और खुफिया इनपुट पर आधारित इस दोहरे ऑपरेशन ने बिहार में ट्रेन तस्करी के खिलाफ बढ़ती सतर्कता को उजागर किया।

मुख्य बातें

सहरसा आरपीएफ ने 30-31 अगस्त 2026 को दो अलग ऑपरेशन्स में 14.02 किलोग्राम गांजा और 18.75 लीटर विदेशी शराब जब्त की।
बरामद सामान की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹7.25 लाख है — गांजा ₹7 लाख , शराब ₹25,000 ।
गांजा राज्य रानी एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15509) के कोच डी-04 में लावारिस बैग से मिला।
रॉयल स्टैग की 25 बोतलें वैशाली एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15566) के जनरल कोच की छत पर लगे इलेक्ट्रिक बॉक्स में छिपी थीं।
दोनों मामले सहरसा आबकारी विभाग को सौंपे गए; आगे की कानूनी कार्रवाई जारी।

बिहार के सहरसा रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने 30-31 अगस्त 2026 की रात को दो अलग-अलग ऑपरेशन्स में 14.02 किलोग्राम गांजा और 18.75 लीटर विदेशी शराब जब्त की। बरामद प्रतिबंधित सामान की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹7.25 लाख बताई गई है। दोनों मामले आबकारी विभाग को सौंप दिए गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

राज्य रानी एक्सप्रेस से गांजा बरामद

पहली जब्ती तब हुई जब 30 अगस्त को 'रेल मदद' सेवा के माध्यम से ट्रेन नंबर 15509, राज्य रानी एक्सप्रेस में एक लावारिस बैग की सूचना मिली। सहरसा आरपीएफ पोस्ट कमांडर धनंजय कुमार ने असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार पांडे, सब-इंस्पेक्टर सुजीत कुमार मिश्रा और कॉन्स्टेबल संजय कुमार को तलाशी का निर्देश दिया।

जब ट्रेन सहरसा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुँची, तो आरपीएफ टीम ने कोच डी-04 की तलाशी ली। लावारिस बैग में 14.02 किलोग्राम गांजा मिला, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग ₹7 लाख आँकी गई है। इसके बाद आबकारी विभाग को सूचित किया गया और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद जब्त माल उनके सुपुर्द कर दिया गया।

वैशाली एक्सप्रेस के इलेक्ट्रिक बॉक्स में छिपी शराब

दूसरे ऑपरेशन में समस्तीपुर की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच से मिली सूचना के आधार पर ट्रेन नंबर 15566, वैशाली एक्सप्रेस में शराब की तस्करी की जानकारी मिली। पोस्ट कमांडर धनंजय कुमार ने मानसी और ललितग्राम के बीच तैनात आरपीएफ एस्कॉर्ट टीम को सतर्क कर दिया।

रात लगभग 11:14 बजे जब वैशाली एक्सप्रेस सहरसा स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर पहुँची, तो आरपीएफ कर्मियों ने जनरल कोच नंबर 255975/सी की छत पर लगे इलेक्ट्रिक बॉक्स की तलाशी ली। बॉक्स के अंदर रॉयल स्टैग ब्रांड की 25 बोतलें छिपाई हुई मिलीं, जिनकी कुल मात्रा 18.75 लीटर और अनुमानित कीमत लगभग ₹25,000 बताई गई। यह शराब भी बाद में सहरसा आबकारी विभाग को सौंप दी गई।

बिहार में ट्रेन तस्करी पर बढ़ती निगरानी

गौरतलब है कि बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से ट्रेनों के जरिए शराब और नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है जब आरपीएफ ने रेल मार्गों पर अवैध सामग्री की आवाजाही रोकने के लिए अपनी निगरानी और खुफिया नेटवर्क को और सक्रिय किया है।

आरपीएफ के अनुसार, दोनों जब्ती के मामले आबकारी विभाग को सौंप दिए गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। इन ऑपरेशन्स ने रेल तस्करी रोधी प्रयासों में खुफिया-आधारित कार्रवाई की प्रभावशीलता को एक बार फिर रेखांकित किया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उसे रेल मार्गों और इलेक्ट्रिक बॉक्स जैसी अप्रत्याशित जगहों तक धकेल दिया है। 'रेल मदद' जैसी नागरिक-सहभागिता सेवा और खुफिया नेटवर्क का संयोजन कारगर साबित हुआ, लेकिन असली सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में गांजा और शराब ट्रेन में चढ़ी कैसे — उद्गम स्टेशन पर निगरानी की चूक पर ध्यान देना उतना ही ज़रूरी है जितना गंतव्य पर पकड़ना।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सहरसा में आरपीएफ ने किन ट्रेनों से गांजा और शराब जब्त की?
आरपीएफ ने ट्रेन नंबर 15509 राज्य रानी एक्सप्रेस से 14.02 किलोग्राम गांजा और ट्रेन नंबर 15566 वैशाली एक्सप्रेस से 18.75 लीटर विदेशी शराब जब्त की। दोनों ऑपरेशन 30-31 अगस्त 2026 को सहरसा रेलवे स्टेशन पर हुए।
जब्त किए गए सामान की कुल कीमत कितनी है?
बरामद प्रतिबंधित सामान की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹7.25 लाख है। इसमें गांजे की कीमत लगभग ₹7 लाख और जब्त शराब की कीमत लगभग ₹25,000 बताई गई है।
वैशाली एक्सप्रेस में शराब कहाँ छिपाई गई थी?
शराब जनरल कोच नंबर 255975/सी की छत पर लगे इलेक्ट्रिक बॉक्स के अंदर छिपाई गई थी। आरपीएफ को समस्तीपुर की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच से मिली सूचना के आधार पर यह तलाशी ली गई।
इन मामलों में आगे की कार्रवाई क्या होगी?
दोनों जब्ती के मामले सहरसा आबकारी विभाग को सौंप दिए गए हैं और आगे की कानूनी कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। अभी तक किसी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बिहार में ट्रेनों के जरिए तस्करी क्यों बढ़ रही है?
बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से तस्कर रेल मार्गों का उपयोग अवैध सामग्री की आवाजाही के लिए करते रहे हैं। आरपीएफ ने 'रेल मदद' सेवा और खुफिया नेटवर्क के जरिए निगरानी बढ़ाई है, जिसके परिणामस्वरूप इस तरह की जब्तियाँ सामने आ रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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