आरएसएस और 32 सहयोगी संगठनों की त्रिदिवसीय समन्वय बैठक विशाखापत्तनम में शुरू, जनसांख्यिकीय बदलाव व नशे पर होगा मंथन
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और उससे संबद्ध 32 संगठनों की अखिल भारतीय समन्वय बैठक 19 अगस्त 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम के निकट गुडिलोवा स्थित विग्नान विहार स्कूल परिसर में प्रारंभ हुई। तीन दिवसीय इस बैठक का उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने 'भारत माता' के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि अर्पित कर किया।
बैठक में कौन-कौन शामिल
इस समन्वय बैठक में आरएसएस के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ 32 सहयोगी संगठनों के राष्ट्रीय अध्यक्ष, महासचिव और चुनिंदा कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। कुल 327 प्रतिनिधि बैठक में शामिल हैं, जबकि विभिन्न संगठनों के 253 प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित हैं — इनमें 49 महिलाएँ शामिल हैं।
भारतीय मजदूर संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी (BJP), अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ और राष्ट्र सेविका समिति समेत संघ से प्रेरित अनेक संगठनों के प्रतिनिधि इस बैठक का हिस्सा हैं।
मुख्य एजेंडा और विषय
आरएसएस के अनुसार, बैठक का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न संगठनों को बीते एक वर्ष के अनुभव, उपलब्धियों, चुनौतियों और गतिविधियों की जानकारी साझा करने के लिए एक साझा मंच देना है। इसके अतिरिक्त सामाजिक जीवन में हो रहे बदलावों और उनके व्यापक प्रभावों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
बैठक में जनसांख्यिकीय बदलाव — उनसे जुड़ी चिंताएँ और संभावित समाधान — एक प्रमुख विषय रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जनसंख्या संरचना से जुड़े प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श में तेज़ी से उभर रहे हैं।
युवाओं में नशे की समस्या पर विशेष चर्चा
बैठक में युवाओं में बढ़ती नशे की लत पर विशेष सत्र होगा। नशीले पदार्थों के बढ़ते उपयोग के दुष्प्रभाव, नशामुक्ति के उपाय और युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने के लिए संगठनों द्वारा सामूहिक रूप से किए जा सकने वाले प्रयासों पर मंथन किया जाएगा। गौरतलब है कि नशे की समस्या हाल के वर्षों में न केवल शहरी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
समन्वय और सामाजिक कल्याण पर ज़ोर
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक में संगठनों के बीच आपसी समन्वय को और सुदृढ़ करने तथा समाज के व्यापक कल्याण के लिए सामूहिक पहल आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि संघ से जुड़े संगठन अपने-अपने क्षेत्रों में जनकल्याण, सामाजिक जागरूकता, व्यवस्था में सुधार और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर कार्यरत हैं।
आंबेकर के अनुसार, संबंधित संगठन अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों का अध्ययन करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर समाज तथा सरकारों के साथ संवाद भी करते हैं।
आगे क्या
तीन दिवसीय इस बैठक में सभी संगठन अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए विशेष कार्यों, उनके परिणामों और सामाजिक जीवन पर विभिन्न घटनाक्रमों के प्रभाव की जानकारी साझा करेंगे। भविष्य में समन्वित तरीके से समाज हित की पहलों को आगे बढ़ाने के तरीकों पर भी विचार होगा। बैठक के समापन पर संयुक्त संकल्प या दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।