अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026: एस-व्यासा ने बेंगलुरु में 650 प्रतिभागियों के साथ 100-दिवसीय उलटी गिनती का 36वाँ दिन मनाया
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की तैयारियों के तहत चल रही 100 दिवसीय उलटी गिनती श्रृंखला के 36वें दिन, स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान (एस-व्यासा) ने 17 मई 2026 को प्रशांति कुटीरम परिसर, जिगानी, बेंगलुरु में एक विशेष योग कार्यक्रम का आयोजन किया। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 650 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मुख्य घटनाक्रम
इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. एच.आर. नागेंद्र, एस-व्यासा के संस्थापक कुलाधिपति, ने योग के वैज्ञानिक आयामों और दैनिक जीवन में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए एक प्रेरणादायक संबोधन दिया। उन्होंने समकालीन समाज में समग्र स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और आंतरिक सद्भाव को बढ़ावा देने में योग की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रतिभागियों ने कॉमन योगा प्रोटोकॉल (सीवाईपी) सत्र में एक साथ अभ्यास किया।
युवाओं के स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ व्याख्यान
'युवाओं के स्वास्थ्य के लिए योग' विषय पर आयोजित पहले संगोष्ठी सत्र में योग चिकित्सा विद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. बालाजी आर. (योगथिलागम) ने युवाओं में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में योग की परिवर्तनकारी भूमिका पर विचार रखे। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को पारंपरिक योगिक ज्ञान के साथ एकीकृत करते हुए उन्होंने योग को 'मजबूरी से चेतना की ओर एक मार्ग' बताया, जो युवाओं को जागरूकता, लचीलापन, भावनात्मक संतुलन और सार्थक जीवन जीने में सहायक है।
डॉ. बालाजी ने 'सलुजनन' की अवधारणा को विस्तार से समझाया — जो रोग पर नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और कल्याण के मूल कारणों पर केंद्रित है। उन्होंने आसन, प्राणायाम, विश्राम, ध्यान और योगिक जीवनशैली के माध्यम से 'सामंजस्य की भावना' को मजबूत करने पर बल दिया।
डिजिटल युग में मानसिक स्वास्थ्य और योग
दूसरे सत्र में कृष्णमाचार्य योग मंदिरम की तकनीकी सलाहकार डॉ. लता सतीश ने 'सूचनाओं से भरे इस युग में मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग' विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल माध्यमों के अत्यधिक उपयोग और निरंतर सूचनाओं के संपर्क से संवेदी अतिभार, संज्ञानात्मक अतिभार, भंडारण अतिभार, कार्य अतिभार और इच्छा अतिभार जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
डॉ. सतीश ने स्थिरम सुखम (स्थिरता और सहजता), प्राण संचयम (ऊर्जा संरक्षण), श्रद्धा (प्रतिबद्धता और विश्वास) और विवेक (विवेकी ज्ञान) जैसे योगिक सिद्धांतों को मानसिक संतुलन बनाए रखने के प्रभावी उपकरण बताया। सत्र का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि आज की तीव्र गति वाली डिजिटल दुनिया में योग तनाव और भ्रम को स्पष्टता एवं आंतरिक शांति में परिवर्तित करने का शाश्वत मार्ग है।
राष्ट्रव्यापी तैयारियों का हिस्सा
यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 की राष्ट्रव्यापी तैयारियों की एक कड़ी है, जिसका उद्देश्य योग के लाभों के प्रति जागरूकता फैलाना और शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक कल्याण के लिए इसे व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहित करना है। गौरतलब है कि एस-व्यासा एक डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालय है और योग अनुसंधान के क्षेत्र में देश के अग्रणी संस्थानों में से एक माना जाता है।