16 जुलाई 2026
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समन अब्बास हत्याकांड: इटली कोर्ट ने माता-पिता को उम्रकैद दी, PM मेलोनी बोलीं — 'महिला की आज़ादी नकारना बर्दाश्त नहीं'

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समन अब्बास हत्याकांड: इटली कोर्ट ने माता-पिता को उम्रकैद दी, PM मेलोनी बोलीं — 'महिला की आज़ादी नकारना बर्दाश्त नहीं'

सारांश

इटली की सर्वोच्च अदालत ने समन अब्बास हत्याकांड में माता-पिता सहित चार दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी। PM मेलोनी ने एक्स पर लिखा — सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर महिला की आज़ादी छीनने वालों के लिए इटली में कोई जगह नहीं। 2021 में जबरन शादी का विरोध करने पर 18 वर्षीय समन की हत्या की गई थी।

मुख्य बातें

इटली की सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने 16 जुलाई 2026 को समन अब्बास हत्याकांड में अंतिम फैसला सुनाया।
माँ नाजिया शाहीन , पिता शब्बर अब्बास और चचेरे भाई इजाज इकराम व नोमानुल हक को उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई।
चाचा दानिश हसनैन की 22 साल की जेल की सजा भी कायम रही।
18 वर्षीय समन की अप्रैल 2021 में जबरन विवाह का विरोध करने पर हत्या की गई थी; शव के अवशेष नवंबर 2022 में नोवेल्लारा में मिले थे।
PM जॉर्जिया मेलोनी ने एक्स पर फैसले का स्वागत करते हुए कहा — 'महिला की आज़ादी नकारने वालों के लिए इटली में कोई जगह नहीं।'

इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने 16 जुलाई 2026 को समन अब्बास हत्याकांड में अंतिम फैसला सुनाते हुए उसके माता-पिता सहित चार दोषियों की सजा बरकरार रखी। पाकिस्तानी मूल की 18 वर्षीय इस युवती की 2021 में तथाकथित 'ऑनर किलिंग' कर दी गई थी, क्योंकि उसने जबरन विवाह से इनकार कर दिया था। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने फैसले का खुलकर स्वागत किया और स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक या धार्मिक आधार पर महिला की स्वतंत्रता छीनने की कोई भी कोशिश इटली में स्वीकार्य नहीं होगी।

अदालत का फैसला और सजा

सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने समन की माँ नाजिया शाहीन और पिता शब्बर अब्बास को हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। इसके साथ ही समन के चचेरे भाइयों इजाज इकराम और नोमानुल हक को भी उम्रकैद मिली। उसके चाचा दानिश हसनैन की 22 साल की जेल की सजा भी अदालत ने कायम रखी।

यह इस मामले का अंतिम न्यायिक निर्णय है, जो 2021 में हत्या के बाद वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया का समापन है। गौरतलब है कि इटली में इस स्तर की अदालत का फैसला अपील योग्य नहीं होता।

PM मेलोनी की कड़ी प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'समन अब्बास की हत्या के आखिरी फैसले के साथ, एक दर्दनाक कानूनी कहानी खत्म हो गई है। इटली में पाकिस्तानी मूल की एक जवान लड़की समन को उसके माता-पिता और कुछ रिश्तेदारों ने मार डाला, क्योंकि उसने जबरदस्ती शादी का विरोध किया था और अपना भविष्य खुद चुनने के अपने अधिकार पर जोर दिया था।'

मेलोनी ने आगे कहा, 'इटली में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं है जो तथाकथित सांस्कृतिक या धार्मिक वजहों के नाम पर एक महिला की आज़ादी, इज्जत और जिंदगी को नकारने की हिम्मत करते हैं। ये ऐसे सिद्धांत हैं जिनसे कोई समझौता नहीं हो सकता।' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कोई भी अदालती फैसला समन की जान वापस नहीं ला सकता, लेकिन दोषियों को सजा मिलना न्याय की दिशा में सही कदम है।

मामले की पृष्ठभूमि

समन अब्बास इटली के नोवेल्लारा शहर में रहने वाली पाकिस्तानी मूल की युवती थी। उसके परिवार ने पाकिस्तान में उसके चचेरे भाई के साथ उसकी शादी तय कर दी थी, जब वह नाबालिग थी। शादी से इनकार करने के बाद समन ने इटली के सोशल सर्विस डिपार्टमेंट से मदद माँगी और नवंबर 2020 में उसे एक शेल्टर होम भेजा गया।

उसने अपने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन 11 अप्रैल 2021 को वह दोबारा परिवार के पास लौट गई। इसके बाद वह लापता हो गई। पुलिस ने घर के पास के सीसीटीवी फुटेज में पाँच लोगों को फावड़े, लोहे की रॉड और एक बाल्टी लेकर जाते और करीब ढाई घंटे बाद लौटते देखा।

नवंबर 2022 में नोवेल्लारा में उसके घर के पास से उसके शरीर के अवशेष बरामद हुए। डेंटल रिकॉर्ड्स के आधार पर शव की पहचान समन के रूप में की गई। 2023 में प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा था कि पहचान को लेकर कोई संदेह नहीं है और उस निर्दोष लड़की को न्याय मिलना चाहिए जो केवल अपनी शर्तों पर जीना चाहती थी।

व्यापक संदर्भ और महत्व

यह मामला यूरोप में 'ऑनर किलिंग' की बहस को नए सिरे से केंद्र में ले आया है। आलोचकों का कहना है कि प्रवासी समुदायों में पितृसत्तात्मक नियंत्रण और जबरन विवाह की प्रवृत्ति को लेकर यूरोपीय देशों की कानूनी और सामाजिक प्रणालियाँ अब तक पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब इटली सहित कई यूरोपीय देश प्रवासन और सांस्कृतिक एकीकरण की नीतियों पर गहन बहस में हैं।

महिला अधिकार संगठनों ने इस फैसले को एक मिसाल के रूप में देखा है, साथ ही यह भी रेखांकित किया है कि समन जैसी युवतियों की सुरक्षा के लिए शेल्टर होम और सोशल सर्विस तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। समन ने मदद माँगी थी, शेल्टर में रही थी — फिर भी उसे बचाया नहीं जा सका, यह प्रश्न अभी भी प्रासंगिक है।

आगे की राह

सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन के इस अंतिम फैसले के साथ दोषियों की सजा कानूनी रूप से पक्की हो गई है। इटली में महिला अधिकार समूह इस फैसले को आधार बनाकर 'ऑनर किलिंग' के विरुद्ध और सख्त कानून तथा सुरक्षा प्रोटोकॉल की माँग कर रहे हैं। समन अब्बास का मामला इटली में एक ऐतिहासिक न्यायिक संदर्भ बन चुका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, और फिर भी मारी गई। अदालत का अंतिम फैसला न्याय की दिशा में सही है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि सुरक्षा तंत्र ने उसे जीते-जी क्यों नहीं बचाया। PM मेलोनी का बयान राजनीतिक रूप से सशक्त है, लेकिन इटली में प्रवासी महिलाओं के लिए संस्थागत सुरक्षा को और मजबूत किए बिना ऐसे मामले दोहराए जाने का खतरा बना रहेगा। यह फैसला एक मिसाल है — पर काफी नहीं।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समन अब्बास कौन थी और उसकी हत्या क्यों हुई?
समन अब्बास इटली के नोवेल्लारा शहर में रहने वाली पाकिस्तानी मूल की 18 वर्षीय युवती थी। उसके परिवार ने पाकिस्तान में उसके चचेरे भाई से जबरन शादी तय की थी, जिसे समन ने अस्वीकार कर दिया; इस विरोध के चलते अप्रैल 2021 में उसके माता-पिता और रिश्तेदारों ने उसकी हत्या कर दी।
इटली की अदालत ने समन अब्बास मामले में क्या फैसला सुनाया?
इटली की सर्वोच्च अपीलीय अदालत सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने 16 जुलाई 2026 को माँ नाजिया शाहीन, पिता शब्बर अब्बास और दो चचेरे भाइयों को उम्रकैद की सजा बरकरार रखी। चाचा दानिश हसनैन की 22 साल की जेल की सजा भी कायम रही। यह इस मामले का अंतिम न्यायिक निर्णय है।
PM जॉर्जिया मेलोनी ने इस फैसले पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक्स पर लिखा कि इटली में उन लोगों के लिए कोई जगह नहीं जो सांस्कृतिक या धार्मिक वजहों के नाम पर किसी महिला की आज़ादी, इज्जत और जिंदगी को नकारते हैं। उन्होंने कहा कि यह ऐसे सिद्धांत हैं जिनसे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
समन अब्बास का शव कब और कहाँ मिला था?
नवंबर 2022 में इटली के नोवेल्लारा शहर में समन के घर के पास उसके शरीर के अवशेष बरामद हुए थे। डेंटल रिकॉर्ड्स के आधार पर जाँच दल ने शव की पहचान समन अब्बास के रूप में की। वह अप्रैल 2021 से लापता थी।
क्या समन ने मदद माँगी थी और उसे सुरक्षा मिली थी?
हाँ, समन ने जबरन विवाह से इनकार के बाद इटली के सोशल सर्विस डिपार्टमेंट से मदद माँगी थी और नवंबर 2020 में उसे एक शेल्टर होम भेजा गया था। उसने माता-पिता के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन 11 अप्रैल 2021 को वह दोबारा परिवार के पास लौट गई और इसके बाद लापता हो गई।
राष्ट्र प्रेस
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