संजय निषाद का अखिलेश यादव पर हमला: 'जनता ने सिर्फ बयानबाजी के लिए छोड़ा, सपा राज में SC-ST एक्ट बेअसर था'
सारांश
मुख्य बातें
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद ने 23 सितंबर 2026 को प्रयागराज में मीडिया से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया। निषाद ने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अधिनियम पूरी तरह बेअसर रहा और गरीबों को विकास की मुख्यधारा से काटकर सड़ा अनाज दिया जाता था।
अखिलेश पर सीधा हमला
संजय निषाद ने अखिलेश यादव की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा, 'वो नेता और पार्टी अध्यक्ष हैं, अगर वो खुद संविधान को मानते, तो अंबेडकर की मूर्ति नहीं तोड़ते, नाम नहीं बदलते। उन्होंने रिजर्वेशन के तहत प्रमोशन लिस्ट रद्द नहीं की होती। अगर वो संविधान को मानते, तो समाज में निचले पायदान पर रहने वालों को विकास की धारा में लाने का काम करते।' यह बयान उस राजनीतिक माहौल में आया है जिसमें सपा और भाजपा गठबंधन के बीच दलित एवं पिछड़े वर्गों को लेकर वर्चस्व की लड़ाई तेज़ हो रही है।
सपा कार्यकाल पर आरोप
निषाद ने कहा कि सपा के शासन में SC-ST एक्ट बेअसर था और समाज के सबसे निचले तबके को विकास की मुख्यधारा से वंचित रखा गया। उनके अनुसार, 'गरीब भूखे मर रहे थे, अनाज सड़ रहा था और ये लोग सड़ा अनाज देकर उनसे आधी कीमत लेते थे।' उन्होंने दावा किया कि जनता ने अखिलेश यादव को 'केवल बयानबाजी और पोस्टरबाजी' के लिए छोड़ रखा है।
योगी सरकार की उपलब्धियों का दावा
इसके विपरीत, निषाद ने योगी आदित्यनाथ की सरकार का बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकार समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोगों को खाने के लिए अनाज, इलाज की व्यवस्था और रहने के लिए मकान दे रही है। उन्होंने कहा कि इस सरकार ने सामाजिक न्याय को ज़मीन पर उतारने का काम किया है।
शकुनी मामा और अवैध निर्माण पर टिप्पणी
एक अन्य सवाल के जवाब में निषाद ने महाभारत के पात्र शकुनी का उल्लेख करते हुए कहा कि 'सलाहकार शकुनी मामा थे, जिस वजह से कौरव हार गए।' उन्होंने निषाद राज के किले में कथित अवैध मस्जिद निर्माण का मुद्दा भी उठाया। उनके अनुसार, '2013 में किले में एक भी मस्जिद नहीं थी, लेकिन अब बन गई है। खुदाई हुई, मस्जिद नहीं मिली।' निषाद ने स्पष्ट किया कि 'जो अवैध है, वो अवैध है — अवैध रहेगा तो बुलडोजर चलेगा।' गौरतलब है कि इस तरह के बयान उत्तर प्रदेश में समय-समय पर राजनीतिक विवाद का केंद्र बनते रहे हैं।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की दिशा
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं और दलित, अतिपिछड़े एवं निषाद समुदाय के वोट बैंक को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन और सपा के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान चुनावी ध्रुवीकरण को ध्यान में रखकर दिए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सपा की ओर से जवाबी प्रतिक्रिया आने की संभावना है।