भरूच जामा मस्जिद पर संत मुक्तानंद स्वामी का दावा — 2000 साल पुराना मंदिर परिसर, वैज्ञानिक सर्वे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भरूच की जामा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हिंदू संत मुक्तानंद स्वामी ने 15 जून 2026 को दावा किया कि भरूच किले की पहाड़ी पर स्थित यह मस्जिद मूलतः एक प्राचीन मंदिर परिसर थी, और उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से वैज्ञानिक सर्वे कराने की माँग की है। इसके साथ ही हिंदू संगठनों ने इस मुद्दे पर ज्ञापन सौंपने और रैली आयोजित करने की योजना बनाई है।
मुक्तानंद स्वामी का दावा
संत मुक्तानंद स्वामी ने कहा, "भरूच में जैन मंदिर श्रीचक्रधर स्वामी — जो वर्तमान में तथाकथित जामा मस्जिद के रूप में जानी जाती है — मूलरूप से पुरातत्व विभाग के अंतर्गत आने वाला स्मारक है। इसका नीति-नियमों के अनुसार संरक्षण और संचालन होना चाहिए था, लेकिन लंबे समय से इस स्थान पर नियम के विरुद्ध कई गतिविधियाँ हो रही हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि ASI ने हाल ही में मस्जिद परिसर में अवैध रूप से बने वुज़ूखाना को तोड़ा है और अन्य अवैध निर्माणों पर भी कार्रवाई की गई है। स्वामी के अनुसार, "राष्ट्रीय धरोहर का संरक्षण और संचालन अत्यंत आवश्यक है। यह स्थान राष्ट्र और नागरिकों के लिए पुरातन और महत्त्वपूर्ण है।"
ऐतिहासिक और पुरातात्विक संदर्भ
संत मुक्तानंद स्वामी ने कहा कि इतिहास के अनुसार यह स्थल 2,000 वर्ष से भी अधिक पुराना है और इसका संबंध जैन एवं सनातन धर्म परंपरा से रहा है। उनके अनुसार यहाँ के खंभों पर नक्काशी और मूर्तियाँ सनातन परंपरा को दर्शाती हैं। "हाल ही में जो प्रतिमाएँ मिली हैं, वे सनातन धर्म से संबंधित हैं। इन्हें संरक्षित कर उनके मूल स्थान पर स्थापित करना ASI की जिम्मेदारी है," उन्होंने कहा।
गौरतलब है कि भरूच जिले की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण 14वीं शताब्दी में हुआ था और इसे एक प्राचीन जैन मंदिर के अवशेषों पर बनाया गया माना जाता है। यह स्थल भरूच किले के परिसर में स्थित है।
भरूच की जनसांख्यिकीय पृष्ठभूमि
भरूच में लगभग 57 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, और यहाँ अच्छी संख्या में मस्जिदें हैं। जामा मस्जिद अपनी समृद्ध ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण इनमें सबसे प्रमुख और प्रसिद्ध मानी जाती है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब देशभर में ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों को लेकर कानूनी और सामाजिक बहसें तेज़ हो रही हैं।
हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया और आगे की योजना
विभिन्न हिंदू संगठन इस विवाद को लेकर सक्रिय हो गए हैं। संगठनों ने संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने और रैली आयोजित करने की योजना बनाई है। मुक्तानंद स्वामी ने स्पष्ट किया कि उनका मूल उद्देश्य "मंदिर परिसर के मूल चरित्र को संरक्षित करना" है।
अब यह देखना होगा कि ASI और संबंधित प्रशासन इस माँग पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या किसी औपचारिक सर्वे का आदेश दिया जाता है।