आगरा जामा मस्जिद के आसपास अतिक्रमण पर एएसआई निष्क्रिय, मोहम्मद जाहिद ने PIL की चेतावनी दी
सारांश
मुख्य बातें
आगरा की शाही जामा मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद जाहिद ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि संस्था के कुछ कर्मचारी कथित तौर पर पैसे लेकर संरक्षित स्मारकों के आसपास अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने 29 जुलाई को यह भी घोषणा की कि वे इस मामले में शीघ्र ही जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा भी खटखटाएंगे।
मुख्य आरोप और शिकायतें
मोहम्मद जाहिद के अनुसार, देशभर में एएसआई-संरक्षित स्मारकों के आसपास निर्माण के लिए कड़े कानूनी प्रावधान लागू हैं — निर्धारित दूरी की शर्त पूरी किए बिना नक्शा पास नहीं होता। लेकिन उनका आरोप है कि इन नियमों का पालन समान रूप से नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि आगरा की शाही जामा मस्जिद के आसपास वर्षों से अतिक्रमण मौजूद है और कई बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही कोई नोटिस जारी किया गया।
जाहिद ने यह भी आरोप लगाया कि एएसआई के निचले स्तर के कर्मचारी वरिष्ठ अधिकारियों तक सही जानकारी नहीं पहुँचाते, जिससे समस्याएँ वर्षों तक लंबित रहती हैं।
मीनार की मरम्मत का मुद्दा
मोहम्मद जाहिद ने बताया कि शाही जामा मस्जिद की एक मीनार करीब 30 वर्षों से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। कई बार पत्राचार के बावजूद उसके संरक्षण या मरम्मत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि अब इस मुद्दे को संसद में उठाने की तैयारी की जा रही है।
व्यापक संदर्भ
जाहिद के अनुसार यह समस्या केवल आगरा तक सीमित नहीं है — देश के अन्य संरक्षित स्मारकों के आसपास भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है। यह ऐसे समय में आया है जब एएसआई पर संरक्षण प्रबंधन को लेकर विभिन्न पक्षों से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि ताजमहल, आगरा किला, सिकंदरा और एतमाद-उद-दौला जैसे राष्ट्रीय महत्व के स्मारक भी आगरा में ही स्थित हैं।
नीतिगत सुझाव
जाहिद ने यह भी कहा कि छोटे संरक्षित स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को निर्माण की अनुमति देने के नियमों की समीक्षा होनी चाहिए। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ताजमहल और आगरा किला जैसे राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों के आसपास सख्त संरक्षण व्यवस्था बनाए रखना ज़रूरी है।
आगे क्या होगा
मोहम्मद जाहिद ने संकेत दिया है कि PIL दायर करना उनका अगला कदम होगा। यदि निचली अदालतों से राहत नहीं मिली तो वे सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेंगे। संसद में मुद्दा उठाने की तैयारी से यह मामला राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन सकता है।