सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट पर अनियमितताओं के आरोप, मनसे नेता किल्लेदार बोले — राम मंदिर विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कामकाज, दान प्रबंधन और प्रस्तावित सौंदर्यीकरण परियोजना को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता यशवंत किल्लेदार ने 11 जुलाई को गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद के बाद जनता का ध्यान भटकाने के लिए वर्षों पुराने सिद्धिविनायक मामले को दोबारा उछाला जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर ट्रस्ट में पारदर्शिता लाने की माँग वे स्वयं साढ़े तीन वर्ष पहले उठा चुके हैं, लेकिन सरकार ने तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
मुख्य आरोप और पृष्ठभूमि
किल्लेदार ने कहा कि देश में राजनीतिक व्यवस्था को चलाने, चुनावी प्रबंधन और सत्ता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर धन की आवश्यकता होती है, जिसके चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। उनके अनुसार इस भ्रष्टाचार की छाया धार्मिक संस्थानों तक भी पहुँच चुकी है और भगवान के मंदिर भी इससे अछूते नहीं रहे हैं।
उन्होंने दावा किया कि करीब छह महीने पहले सिद्धिविनायक मंदिर के कुछ कर्मचारी कथित चोरी करते हुए सीसीटीवी कैमरों में कैद हुए थे। इसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पुलिस ने यह कार्रवाई केवल मीडिया और सोशल मीडिया में मामला उछलने के बाद की। किल्लेदार के अनुसार पूरे प्रकरण की गहन जाँच अभी तक नहीं हुई है।
साढ़े तीन साल पहले उठाया था मुद्दा
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे द्वारा विपक्ष पर सिद्धिविनायक मामले में चुप्पी साधने के आरोप का जवाब देते हुए किल्लेदार ने स्पष्ट किया कि उन्होंने स्वयं लगभग साढ़े तीन वर्ष पहले राज्य के न्याय एवं विधि विभाग में औपचारिक शिकायत दर्ज कर मंदिर ट्रस्ट के कामकाज की जाँच की माँग की थी।
शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई न होने पर उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए मामले को सार्वजनिक किया, जिसके बाद यह विषय व्यापक चर्चा में आया। सरकार की ओर से जाँच और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन किल्लेदार के अनुसार वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
₹500 करोड़ की सौंदर्यीकरण परियोजना पर सवाल
मनसे नेता ने सिद्धिविनायक मंदिर के प्रस्तावित सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट को लेकर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट आर्थिक रूप से अत्यंत सक्षम है और सामाजिक कार्यों के लिए अन्य संस्थाओं को भी करोड़ों रुपए का सहयोग देता रहा है। ऐसे में मुंबई महानगरपालिका (BMC) के फंड से इतनी बड़ी राशि खर्च करने की ज़रूरत उन्हें समझ से परे लगती है।
किल्लेदार के अनुसार इतने सीमित क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए ₹500 करोड़ का प्रावधान उचित नहीं लगता और इस परियोजना की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सिद्ध हो तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
राजनीतिक रणनीति पर सवाल
किल्लेदार ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद सामने आने के बाद जनता का ध्यान दूसरी ओर मोड़ने के लिए पुराने मामलों को दोबारा उछाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता अब इस तरह की राजनीतिक रणनीतियों को समझने लगी है और धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मंदिरों के चढ़ावे और दान प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि सिद्धिविनायक जैसे बड़े धार्मिक ट्रस्टों की वित्तीय पारदर्शिता का मुद्दा वर्षों से विभिन्न दलों के एजेंडे पर रहा है, लेकिन ठोस सुधार की राह अब तक नहीं खुली है।