2 नवंबर 2026
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नेल्लोर तट पर चक्रवात 'मुरासु' के बीच 7 मछुआरे बचाए, इंजन खराब होने से फंसे थे समुद्र में

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नेल्लोर तट पर चक्रवात 'मुरासु' के बीच 7 मछुआरे बचाए, इंजन खराब होने से फंसे थे समुद्र में

सारांश

चक्रवात 'मुरासु' की उफनती लहरों के बीच नेल्लोर तट पर इंजन खराब होने से फंसे 7 मछुआरों को मत्स्य विभाग, समुद्री पुलिस और स्थानीय मछुआरों ने मिलकर सुरक्षित बचाया। लंगर टूटने के बाद नाव तट से बहने लगी थी, लेकिन अधिकारियों ने हार नहीं मानी।

मुख्य बातें

2 नवंबर 2026 को नेल्लोर जिले के जुव्वलादिन्ने बंदरगाह के पास समुद्र में फंसे 7 मछुआरों को सुरक्षित बचाया गया।
नाव का इंजन बंदरगाह के प्रवेश द्वार से लगभग आधे किलोमीटर दूर खराब हो गया था।
लंगर टूटने पर नाव तेज लहरों के साथ पताकाडापलेम गाँव की दिशा में बहने लगी, जहाँ उसे सुरक्षित तट पर लाया गया।
बचाव अभियान में मत्स्य विभाग , समुद्री पुलिस और स्थानीय मछुआरों ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के कारण तटीय जिलों में अलर्ट जारी; मछुआरों को समुद्र में न जाने के निर्देश।

आंध्र प्रदेश के पोट्टी श्रीरामुलु नेल्लोर जिले के जुव्वलादिन्ने मछली पकड़ने के बंदरगाह के पास 2 नवंबर 2026 (सोमवार) को समुद्र में फंसे सात मछुआरों को मत्स्य विभाग, समुद्री पुलिस और स्थानीय मछुआरों की समन्वित कार्रवाई से सुरक्षित बचा लिया गया। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के कारण समुद्र में उफान आया हुआ था, जिसने बचाव अभियान को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया।

कैसे हुई घटना

मछुआरे जुव्वलादिन्ने बंदरगाह से मछली पकड़ने के लिए निकले थे। मौसम बिगड़ता देख उन्होंने वापस लौटने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में नाव का इंजन खराब हो गया। इससे वे बंदरगाह के प्रवेश द्वार से मात्र आधे किलोमीटर की दूरी पर समुद्र में बेबस होकर फंस गए।

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब नाव का लंगर टूट गया और तेज लहरों के कारण नाव पताकाडापलेम गाँव की दिशा में बहने लगी। बंदरगाह पर तैनात निगरानी कर्मचारियों ने फंसे मछुआरों को देखते ही तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित किया।

बचाव अभियान का घटनाक्रम

सूचना मिलते ही मत्स्य विभाग और समुद्री पुलिस के अधिकारी स्थानीय मछुआरों की मदद से मौके पर पहुँचे। शुरुआत में तेज समुद्री लहरों के कारण नाव तक पहुँचना मुश्किल साबित हुआ। अधिकारियों ने हार नहीं मानी और नाव का पीछा करते हुए बचाव अभियान जारी रखा।

अंततः बचाव दल नाव को पताकाडापलेम के तट पर सुरक्षित लाने में सफल रहा और सभी सातों मछुआरे सकुशल बाहर निकाल लिए गए। जिला कलेक्टर हिमांशु शुक्ला ने बताया कि यह सफलता मत्स्य विभाग, समुद्री पुलिस, निगरानी कर्मियों और स्थानीय मछुआरों की त्वरित एवं समन्वित कार्रवाई का परिणाम है।

चक्रवात 'मुरासु' का खतरा

बंगाल की खाड़ी में सक्रिय भीषण चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के चलते तटीय इलाकों में समुद्र में लहरें तेज हैं। अधिकारियों ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है। जो लोग पहले से समुद्र में हैं, उन्हें तत्काल वापस लौटने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि चक्रवाती मौसम में इस तरह की घटनाएँ आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में अक्सर सामने आती हैं, जब मछुआरे खराब मौसम की चपेट में आ जाते हैं। यह घटना ऐसे समय में आई है जब राज्य प्रशासन ने तटीय जिलों में अलर्ट जारी किया हुआ है।

प्रशासन की सराहना और चेतावनी

जिला कलेक्टर हिमांशु शुक्ला ने बचाव में शामिल सभी दलों — मत्स्य विभाग के अधिकारियों, समुद्री पुलिस, निगरानी कर्मियों और स्थानीय मछुआरों — की सूझबूझ और साहसिक प्रयासों की सराहना की। उन्होंने मछुआरों को प्रतिकूल मौसम के दौरान समुद्र में जाने से बचने और अधिकारियों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की भी हिदायत दी।

आने वाले दिनों में चक्रवात 'मुरासु' के प्रभाव को देखते हुए नेल्लोर समेत तटवर्ती जिलों में प्रशासन की निगरानी और सतर्कता और बढ़ाई जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मत्स्य विभाग और समुद्री पुलिस के बीच होनी चाहिए — और इस बार काम किया। लेकिन सवाल यह भी उठता है कि चक्रवात अलर्ट के बावजूद मछुआरे समुद्र में क्यों गए। आंध्र प्रदेश में हर मौसम में ऐसी घटनाएँ होती हैं जो दर्शाती हैं कि चेतावनी प्रणाली और मछुआरों तक उसकी पहुँच के बीच अभी भी गहरी खाई है। जब तक यह खाई नहीं पाटी जाती, बचाव की सफलता महज राहत की बात होगी, नीतिगत जीत नहीं।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेल्लोर तट पर 7 मछुआरे कैसे फंसे?
मछुआरे जुव्वलादिन्ने बंदरगाह से मछली पकड़ने गए थे। मौसम बिगड़ने पर वापस लौटते समय बंदरगाह के प्रवेश द्वार से लगभग आधे किलोमीटर दूर नाव का इंजन खराब हो गया, जिससे वे समुद्र में फंस गए। बाद में नाव का लंगर भी टूट गया।
मछुआरों को बचाने में कौन-कौन शामिल था?
मत्स्य विभाग, समुद्री पुलिस और स्थानीय मछुआरों ने मिलकर यह बचाव अभियान चलाया। बंदरगाह पर तैनात निगरानी कर्मचारियों ने सबसे पहले स्थिति भाँपकर अधिकारियों को सूचित किया, जिसके बाद त्वरित कार्रवाई की गई।
चक्रवात 'मुरासु' का इस घटना से क्या संबंध है?
बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान 'मुरासु' के कारण समुद्र में लहरें तेज थीं, जिससे बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया। अधिकारियों ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी थी और जो समुद्र में हैं उन्हें वापस लौटने के निर्देश दिए गए हैं।
मछुआरों को अंततः कहाँ से बचाया गया?
लंगर टूटने के बाद नाव बहकर पताकाडापलेम गाँव की ओर जाने लगी। बचाव दल ने नाव का पीछा किया और उसे पताकाडापलेम के तट पर सुरक्षित लाकर सातों मछुआरों को बाहर निकाला।
जिला प्रशासन ने क्या निर्देश दिए हैं?
जिला कलेक्टर हिमांशु शुक्ला ने मछुआरों को प्रतिकूल मौसम में समुद्र में न जाने और अधिकारियों के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी है। चक्रवात 'मुरासु' के चलते तटीय जिलों में अलर्ट जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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