शहडोल में तेंदुए ने बरामदे से सोती किशोरी को उठाया, 300 मीटर दूर मिला शव
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में 4 नवंबर 2026 को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब ब्योहारी थाना क्षेत्र के तगावर गांव के विजाहरा टोला में एक तेंदुआ घर के बरामदे में सो रही किशोरी सरस्वती गोंड को उठाकर ले गया। वन विभाग ने तेंदुए के हमले से मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि किशोरी का शव घटनास्थल से लगभग 300 मीटर दूर झाड़ियों में लहूलुहान अवस्था में बरामद किया गया।
घटनाक्रम: कैसे हुई वारदात
सरस्वती गोंड अपनी बहन के साथ घर के बरामदे में सो रही थी। रात के अंधेरे में एक तेंदुआ घर में घुसा और उसे उठाकर जंगल की ओर ले गया। परिवार के सदस्यों की नींद जब खुली तो सरस्वती कहीं नज़र नहीं आई। उसका कंबल कुछ दूरी पर बिखरा पड़ा था, जिसे देखकर परिजनों ने तलाशी शुरू की। 300 मीटर दूर झाड़ियों में उसका शव मिला।
वन अधिकारियों के अनुसार, मकान में दरवाज़ा न होना इस त्रासदी की सबसे बड़ी वजह बनी। खुले बरामदे ने तेंदुए को बिना किसी बाधा के अंदर घुसने का मौका दे दिया।
वन विभाग की प्रतिक्रिया और सर्च ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तेंदुए को पकड़ने के लिए आसपास के जंगलों व संभावित ठिकानों पर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। ग्रामीण भी इस अभियान में वन कर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जुटे हुए हैं। वन विभाग ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और रात में खुले में न सोने की हिदायत दी है।
सरस्वती के पिता घर से बाहर मज़दूरी के लिए गए हुए थे। परिवार पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा है।
आम जनता पर असर: दहशत का माहौल
इस घटना के बाद तगावर गांव समेत आसपास के सभी इलाकों में डर और दहशत का माहौल है। स्थानीय निवासियों को चिंता है कि तेंदुआ आबादी वाले क्षेत्र में दोबारा हमला कर सकता है। गौरतलब है कि यह इलाका घने जंगलों से घिरा है और वन्यजीवों की आवाजाही यहाँ आम है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका पहले से बनी रहती है।
यह इलाका आदिवासी बहुल है और यहाँ के अधिकांश परिवार कच्चे मकानों में रहते हैं। कई घरों में दरवाज़े तक नहीं हैं, जो इन परिवारों को वन्यजीव हमलों के प्रति अत्यंत संवेदनशील बनाता है।
व्यापक संदर्भ: आदिवासी बस्तियों में वन्यजीव संघर्ष
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश के वन-आसन्न जिलों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएँ लगातार चर्चा में हैं। कच्चे और असुरक्षित मकानों में रहने वाले आदिवासी समुदाय सबसे अधिक जोखिम में हैं। आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों के लिए पक्के मकान या सुरक्षित दरवाज़े जुटाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
आगे वन विभाग द्वारा तेंदुए को पकड़ने या आवश्यकता पड़ने पर अन्य कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है, ताकि इस क्षेत्र में और हादसे न हों।