14 सितंबर 2026
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ओवैसी का BJP पर हमला: SIR के ज़रिये NRC की तैयारी, UCC और भारत-चीन नीति पर भी सवाल

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ओवैसी का BJP पर हमला: SIR के ज़रिये NRC की तैयारी, UCC और भारत-चीन नीति पर भी सवाल

सारांश

ओवैसी ने हैदराबाद में BJP पर एक साथ कई मोर्चे खोले — SIR को NRC का रास्ता, UCC को मुसलमानों पर निशाना, ऑपरेशन सिन्दूर में चीन की भूमिका के बावजूद सामान्य संबंध और ब्रिक्स में विविधता की अनदेखी। यह बयान विपक्ष की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है जो पहचान-आधारित राजनीति को आर्थिक मुद्दों से जोड़ती है।

मुख्य बातें

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 14 सितंबर 2026 को हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र सरकार और BJP पर तीखे आरोप लगाए।
ओवैसी ने कहा कि UCC समानता के लिए नहीं बल्कि मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए लाया जा रहा है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26, 29 की भावना के विरुद्ध है।
SIR प्रक्रिया को ओवैसी ने भविष्य में NRC लागू करने की तैयारी बताया और कहा कि 2019 के CAA-NRC विरोध को जनता भूली नहीं है।
ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता दिए जाने का हवाला देते हुए ओवैसी ने भारत-चीन संबंधों को सामान्य बताने की सरकार की कोशिश पर सवाल उठाए।
ब्रिक्स सम्मेलन में डिजिटल मुद्रा पर पर्याप्त चर्चा न होने और केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर भी ओवैसी ने असंतोष जताया।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने 14 सितंबर 2026 को हैदराबाद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कई मोर्चों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC), नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA)-राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC), विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), वंदे मातरम विवाद, भारत-चीन संबंधों और ब्रिक्स सम्मेलन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।

UCC पर ओवैसी के आरोप

ओवैसी ने आरोप लगाया कि UCC को समानता के उद्देश्य से नहीं, बल्कि देश के मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए BJP-शासित राज्यों में लागू किया जा रहा है। उनके अनुसार यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 में निहित धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के विरुद्ध है।

ओवैसी ने दावा किया कि विधि आयोग पूर्व में यह स्पष्ट कर चुका है कि UCC न तो भारत के लिए आवश्यक है और न ही व्यावहारिक। उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि यदि वास्तव में एकसमान संहिता लागू करनी है, तो पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों वाले स्वरूप को गोवा में भी लागू करके दिखाया जाए — जहाँ के सामाजिक और पारिवारिक कानून पहले से अलग हैं।

SIR और NRC को लेकर चिंता

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि SIR की प्रक्रिया आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रही है और इसके पीछे भविष्य में NRC लागू करने की मंशा हो सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि 2019 में CAA और NRC के विरोध में देशभर में हुए प्रदर्शन अभी भी लोगों की स्मृति में हैं।

ओवैसी के मुताबिक लोगों को दस्तावेज़ लेकर लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है, जो आम जनता के लिए व्यावहारिक कठिनाई पैदा कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब करोड़ों नागरिक अभी भी सरकारी राशन पर निर्भर हैं और बड़ी संख्या में शिक्षित युवा बेरोज़गार हैं।

भारत-चीन नीति पर सवाल

भारत-चीन संबंधों पर ओवैसी ने कहा कि भारत कुछ ऐसे पेट्रोलिंग प्वाइंट्स खो चुका है जहाँ पहले भारतीय जवान नियमित रूप से गश्त किया करते थे। उनका आरोप था कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता दिए जाने के बावजूद केंद्र सरकार उससे संबंधों को सामान्य बताने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स सम्मेलन के बाद भारत-चीन राजनयिक संवाद को लेकर सार्वजनिक बहस तेज़ हो रही है।

वंदे मातरम और सांस्कृतिक विविधता

वंदे मातरम विवाद पर ओवैसी ने कहा कि किसी भी गीत या विचार को लोगों पर ज़बरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का सम्मान होना चाहिए। साथ ही उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में केवल शाकाहारी भोजन परोसे जाने पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की खाद्य एवं सांस्कृतिक विविधता को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए था।

आगे की राजनीतिक दिशा

ओवैसी की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उस बड़े राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा है, जिसमें विपक्षी दल सरकार की पहचान-आधारित नीतियों को रोज़गार और आर्थिक चुनौतियों से ध्यान हटाने की कोशिश बता रहे हैं। ब्रिक्स सम्मेलन में डिजिटल मुद्रा जैसे विषयों पर पर्याप्त चर्चा न होने पर भी उन्होंने असंतोष जताया, यह कहते हुए कि ऐसी व्यवस्था से सदस्य देश वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकते थे। आने वाले हफ्तों में SIR प्रक्रिया और UCC के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे केवल विपक्षी एजेंडा नहीं रहने देता। UCC के मामले में गोवा वाला तर्क पुराना ज़रूर है, पर अभी तक सरकार उसका ठोस जवाब नहीं दे पाई है। भारत-चीन संबंधों पर ओवैसी के आरोप राजनीतिक रंग लिए हैं, लेकिन पेट्रोलिंग व्यवस्था पर पारदर्शिता की माँग वैध है। मुख्यधारा की कवरेज प्रायः इन बयानों को 'विपक्षी हमले' तक सीमित कर देती है — जबकि असली सवाल यह है कि सरकार इन मुद्दों पर संसद या सार्वजनिक मंचों पर जवाब देने से क्यों बचती रही है।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओवैसी ने SIR को NRC की तैयारी क्यों कहा?
ओवैसी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया आम नागरिकों से दस्तावेज़ माँगने के बहाने भविष्य में NRC लागू करने का आधार तैयार कर रही है। उनके अनुसार लंबी कतारें और दस्तावेज़ी बाधाएँ जनता को अनावश्यक परेशानी में डाल रही हैं।
ओवैसी ने UCC पर क्या आपत्ति जताई?
ओवैसी ने कहा कि UCC संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 की भावना के विरुद्ध है और इसे मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए BJP-शासित राज्यों में लागू किया जा रहा है। उन्होंने विधि आयोग के उस पुराने मत का हवाला दिया जिसमें UCC को न तो आवश्यक और न ही व्यावहारिक बताया गया था।
भारत-चीन संबंधों पर ओवैसी के क्या आरोप हैं?
ओवैसी ने दावा किया कि भारत कुछ पेट्रोलिंग प्वाइंट्स खो चुका है जहाँ पहले भारतीय जवान गश्त करते थे। साथ ही उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान चीन द्वारा पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने के बावजूद सरकार उससे संबंधों को सामान्य बताने की कोशिश कर रही है।
ब्रिक्स सम्मेलन पर ओवैसी ने क्या कहा?
ओवैसी ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में डिजिटल मुद्रा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई, जिससे सदस्य देश वैश्विक वित्तीय प्रतिबंधों के प्रभाव को कम कर सकते थे। उन्होंने शाकाहारी भोजन तक सीमित रहने पर भी कहा कि भारत की खाद्य विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेहतर तरीके से दर्शाया जाना चाहिए था।
ओवैसी के इन बयानों का राजनीतिक संदर्भ क्या है?
AIMIM प्रमुख के ये बयान उस व्यापक विपक्षी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें BJP पर बेरोज़गारी और आर्थिक चुनौतियों से ध्यान हटाकर धार्मिक-पहचान की राजनीति करने का आरोप लगाया जाता है। CAA-NRC के खिलाफ 2019 के बड़े प्रदर्शनों का संदर्भ देते हुए ओवैसी यह संकेत दे रहे हैं कि SIR उसी सिलसिले की अगली कड़ी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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