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झारखंड SIR: 22.84 लाख मतदाता सत्यापन मामले लंबित, नो मैपिंग में सिर्फ 43% काम पूरा

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झारखंड SIR: 22.84 लाख मतदाता सत्यापन मामले लंबित, नो मैपिंग में सिर्फ 43% काम पूरा

सारांश

झारखंड में SIR की समयसीमा महज 26 दिन दूर है, लेकिन 22.84 लाख मतदाता सत्यापन मामले अभी भी लंबित हैं। नो मैपिंग में आधे से ज़्यादा काम बाकी है। गिरिडीह और साहिबगंज जैसे जिलों का प्रदर्शन बेहद कमज़ोर रहा है।

मुख्य बातें

झारखंड में SIR प्रक्रिया पूरी होने में केवल 26 दिन बाकी हैं।
कुल 59.53 लाख मामलों में से 22.84 लाख अभी भी लंबित हैं।
नो मैपिंग श्रेणी में 14,04,033 में से 7,95,415 मामले लंबित; केवल 43.35% निष्पादन।
लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में 67.28% निष्पादन, 14,88,802 मामले शेष।
गिरिडीह ( 19.52% ) और साहिबगंज ( 21.03% ) नो मैपिंग में सबसे पिछड़े जिले।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के.
रवि कुमार ने पिछड़े जिलों को तेज़ी से काम पूरा करने का निर्देश दिया।

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा समाप्त होने में केवल 26 दिन शेष हैं, लेकिन राज्य में अब भी 22.84 लाख मतदाता सत्यापन मामले निष्पादन की प्रतीक्षा में हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी की दो प्रमुख श्रेणियों में कुल 59.53 लाख मामलों में से 36.69 लाख का ही निष्पादन हो सका है।

मुख्य आंकड़े: क्या है स्थिति

नो मैपिंग श्रेणी में कुल 14,04,033 मामलों में से केवल 6,08,618 यानी 43.35 प्रतिशत का निष्पादन कर ECINet पर अपडेट किया गया है। इसका अर्थ है कि 7,95,415 मामले अभी भी लंबित हैं — यानी आधे से अधिक काम बाकी है।

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के मामलों में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है। कुल 45,49,961 मामलों में से 30,61,159 यानी 67.28 प्रतिशत का निष्पादन हो चुका है, लेकिन 14,88,802 मामले अभी शेष हैं। वहीं, अदर कैटेगरी में राज्य ने 97.91 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है — 1,61,65,853 में से 1,58,27,411 मामलों का निपटारा हो चुका है।

नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी क्या हैं

नो मैपिंग के तहत उन मतदाताओं के रिकॉर्ड की जाँच की जाती है जिनका या उनके परिवार के किसी सदस्य का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से नहीं जोड़ा जा सका है। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि नए पंजीकृत मतदाताओं की पारिवारिक पृष्ठभूमि सत्यापित हो।

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में वर्तमान और पुरानी मतदाता सूचियों के बीच तार्किक विसंगतियों की जाँच होती है। इसमें माता-पिता और बच्चों की आयु में असामान्य अंतर, या पारिवारिक संबंधों से जुड़ी जानकारी में गड़बड़ी जैसे मामले शामिल हैं।

जिलावार प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे

नो मैपिंग मामलों में पश्चिमी सिंहभूम 96.16 प्रतिशत निष्पादन के साथ सबसे आगे है। लोहरदगा (80.04%), देवघर (75.25%), रामगढ़ (63.19%) और गुमला (61.01%) भी उल्लेखनीय प्रगति दर्शाते हैं।

इसके विपरीत, गिरिडीह में केवल 19.52 प्रतिशत, साहिबगंज में 21.03 प्रतिशत, पलामू में 25.25 प्रतिशत, पाकुड़ में 28.86 प्रतिशत और रांची में 29.03 प्रतिशत काम ही पूरा हो सका है — ये आंकड़े गंभीर चिंता का विषय हैं।

लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में पश्चिमी सिंहभूम (99.72%) और लोहरदगा (99.08%) शीर्ष पर हैं, जबकि पाकुड़ (45.88%), साहिबगंज (48.57%) और पलामू (49.55%) सबसे पीछे हैं।

चुनाव अधिकारी का निर्देश

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कमज़ोर प्रदर्शन वाले जिलों को लंबित मामलों के निष्पादन में तेज़ी लाने का स्पष्ट निर्देश दिया है। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से नियमित समीक्षा करने और विशेष कार्ययोजना बनाकर सुनवाई व सत्यापन का कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने को कहा है।

गौरतलब है कि SIR की यह प्रक्रिया मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही है, और इसकी अंतिम समयसीमा नज़दीक आने के साथ प्रशासनिक दबाव बढ़ता जा रहा है।

आगे क्या होगा

26 दिनों में 22.84 लाख मामलों का निष्पादन एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। यदि शेष जिले — विशेषकर गिरिडीह, साहिबगंज और रांची — अपनी गति नहीं बढ़ाते, तो बड़ी संख्या में मतदाताओं के रिकॉर्ड अधूरे रह सकते हैं, जिसका सीधा असर मतदाता सूची की सटीकता पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर विशेष अभियान और समीक्षा बैठकों की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि रांची जैसी राजधानी 29% पर अटकी है, जो चिंताजनक है। यह ऐसे समय में आया है जब मतदाता सूची की शुद्धता पर पहले से ही राजनीतिक सवाल उठते रहे हैं। जिलों के बीच इतनी भारी असमानता यह भी संकेत देती है कि संसाधन आवंटन और निगरानी तंत्र में गंभीर खामियाँ हैं जिन्हें महज 'निर्देश' से दूर नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में SIR क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची में दर्ज प्रत्येक नाम का सत्यापन और रिकॉर्ड की जाँच की जाती है। यह मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा चलाई जाती है।
नो मैपिंग और लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में क्या अंतर है?
नो मैपिंग में उन मतदाताओं की जाँच होती है जिनका या उनके परिवार का नाम 2003 की मतदाता सूची से नहीं जुड़ पाया। लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में पुरानी और नई सूचियों के बीच माता-पिता-बच्चों की आयु में असामान्य अंतर या पारिवारिक संबंधों में गड़बड़ी जैसी विसंगतियाँ जाँची जाती हैं।
झारखंड SIR की समयसीमा कब समाप्त होगी?
4 नवंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार SIR पूरी होने में केवल 26 दिन शेष हैं। इस दौरान अभी भी 22.84 लाख मामलों का निष्पादन बाकी है।
कौन से जिले सबसे अधिक पिछड़े हैं?
नो मैपिंग में गिरिडीह (19.52%), साहिबगंज (21.03%), पलामू (25.25%), पाकुड़ (28.86%) और रांची (29.03%) सबसे कमज़ोर प्रदर्शन करने वाले जिले हैं। लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी में भी पाकुड़ (45.88%), साहिबगंज (48.57%) और पलामू (49.55%) सबसे पीछे हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने पिछड़े जिलों को लंबित मामलों में तेज़ी लाने का निर्देश दिया है। उन्होंने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को नियमित समीक्षा करने और विशेष कार्ययोजना बनाकर सुनवाई व सत्यापन समयसीमा के भीतर पूरा करने को कहा है।
राष्ट्र प्रेस
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