3 सितंबर 2026
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श्रीलेखा मित्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, 24 दिसंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं

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श्रीलेखा मित्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, 24 दिसंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने टॉलीवुड अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा को बड़ी राहत दी — राज्यभर की सभी FIR एकत्रित, 24 दिसंबर तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि पोस्ट BNS की धारा 353(2) के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा के विरुद्ध 24 दिसंबर 2026 तक कोई कठोर कार्रवाई न करने का निर्देश दिया।
राज्यभर के सभी आपराधिक मामले कोलकाता के आनंदपुर थाने की पुलिस के अंतर्गत एकत्रित किए गए।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने प्रथम दृष्टया माना कि पोस्ट BNS धारा 353(2) के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती।
पुलिस को पूछताछ से कम से कम 48 घंटे पूर्व नोटिस देना अनिवार्य किया गया।
अभिनेत्री के जाँच में सहयोग न करने पर पुलिस अंतरिम आदेश वापस लेने हेतु अदालत का रुख कर सकती है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2026 को टॉलीवुड अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा को अंतरिम राहत प्रदान करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को 24 दिसंबर 2026 तक या अगले न्यायिक आदेश तक उनके विरुद्ध किसी भी कठोर कार्रवाई से रोक दिया। यह राहत इस शर्त पर दी गई है कि अभिनेत्री जाँच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करेंगी।

मामले की पृष्ठभूमि

न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ के समक्ष यह मामला तब आया जब श्रीलेखा मित्रा के सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर राज्य के विभिन्न थानों में अनेक एफआईआर दर्ज की गई थीं। अभिनेत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर पर हुए हालिया छात्र आंदोलन के समर्थन में अभिनेत्री ने विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, और उसके बाद उनकी सोशल मीडिया गतिविधि को आधार बनाकर एकाधिक मुकदमे दायर किए गए।

अदालत का आदेश और जाँच का एकीकरण

हाईकोर्ट ने राज्यभर में दर्ज सभी आपराधिक मामलों को कोलकाता के आनंदपुर थाने की पुलिस के अंतर्गत एकत्रित (क्लब) करने का निर्देश दिया, ताकि जाँच एकीकृत और सुव्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस पूछताछ के लिए अभिनेत्री को कम से कम 48 घंटे पूर्व नोटिस देगी।

राज्य सरकार का पक्ष और धारा 353(2) पर विवाद

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत को बताया कि अभिनेत्री द्वारा साझा किए गए कार्टून में प्रधानमंत्री के निजी अंग का कथित तौर पर आपत्तिजनक संदर्भ था, जिससे लोगों की भावनाएँ आहत हुईं। अदालत ने इस पर स्वतः प्रश्न उठाया कि क्या भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) इस प्रकरण पर लागू होती है। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित पोस्ट को 'अशोभनीय' कहा जा सकता है, किंतु उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह धारा 353(2) के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती।

शर्तें और अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि श्रीलेखा मित्रा जाँच में सहयोग नहीं करती हैं, तो पुलिस इस अंतरिम आदेश में संशोधन या इसे वापस लेने हेतु अदालत का रुख कर सकती है। आनंदपुर थाना पुलिस को अगली सुनवाई तक जाँच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया गया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पोस्ट पर दर्ज एफआईआर को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की माँग तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य सरकार की कानूनी रणनीति की कमज़ोरी को उजागर करता है। गौरतलब है कि एक ही पोस्ट पर अलग-अलग थानों में FIR दर्ज करना स्वयं में उत्पीड़न का औज़ार बन सकता है, और अदालत का एकीकरण आदेश इसी पर अंकुश लगाने की कोशिश है। असली प्रश्न यह है कि क्या राज्य सरकार मुख्य सुनवाई में धारा 353(2) की प्रयोज्यता को साबित कर पाएगी।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीलेखा मित्रा का सोशल मीडिया पोस्ट मामला क्या है?
टॉलीवुड अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा द्वारा जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के समर्थन में साझा किए गए एक कार्टून पोस्ट को आधार बनाकर पश्चिम बंगाल के विभिन्न थानों में एकाधिक FIR दर्ज की गई थीं। राज्य सरकार का आरोप है कि उस पोस्ट में प्रधानमंत्री के बारे में आपत्तिजनक सामग्री थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने श्रीलेखा मित्रा को क्या राहत दी?
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने 24 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक राज्य सरकार को कोई कठोर कार्रवाई न करने का निर्देश दिया। साथ ही सभी FIR को आनंदपुर थाने के अंतर्गत एकत्रित किया गया और पूछताछ से 48 घंटे पूर्व नोटिस देना अनिवार्य किया गया।
BNS की धारा 353(2) क्या है और इस मामले में इसकी क्या भूमिका है?
BNS की धारा 353(2) ऐसी सामग्री के प्रसार से संबंधित है जो राष्ट्रीय एकता को नुकसान पहुँचाए या घृणा फैलाए। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि संबंधित पोस्ट इस धारा के तहत आपराधिक अपराध नहीं बनती, हालाँकि इसे 'अशोभनीय' ज़रूर कहा जा सकता है।
अब आगे की जाँच कैसे होगी?
सभी मामलों की जाँच अब कोलकाता के आनंदपुर थाने की पुलिस करेगी। अभिनेत्री को जाँच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर सहयोग करना होगा और पुलिस को अगली सुनवाई पर जाँच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
क्या श्रीलेखा मित्रा को गिरफ्तार किया जा सकता है?
फिलहाल 24 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं हो सकती। हालाँकि यदि अभिनेत्री जाँच में सहयोग नहीं करती हैं, तो पुलिस इस अंतरिम संरक्षण को वापस लेने के लिए अदालत का रुख कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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