परमब्रत चटर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट की अंतरिम राहत, भड़काऊ बयान मामले में गिरफ्तारी पर रोक
सारांश
मुख्य बातें
बंगाली सिनेमा के जाने-माने अभिनेता परमब्रत चटर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट ने 29 मई 2026 को बड़ी अंतरिम राहत दी है। जस्टिस अजय कुमार मुखर्जी की एकल पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक अभिनेता के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्रवाई — जिसमें गिरफ्तारी भी शामिल है — न की जाए। चटर्जी पर 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा में कथित संलिप्तता और सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयान देने का आरोप है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह एफआईआर वकील जॉयदीप सेन की शिकायत के आधार पर कोलकाता पुलिस के साउथ डिवीजन के अंतर्गत आने वाले गरियाहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि चटर्जी ने सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ पोस्ट की थी। इसी मामले में अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी का नाम भी सामने आया, जिन पर उस पोस्ट का समर्थन करने का आरोप है।
हाईकोर्ट में याचिका और सुनवाई
27 मई को परमब्रत चटर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर एफआईआर रद्द करने की माँग की। गर्मी की छुट्टियों के कारण यह मामला वेकेशन बेंच के समक्ष सुना गया। चटर्जी की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर पुलिस की एक जबरदस्ती कार्रवाई है और शिकायत में लगाए गए आरोपों से कोई गंभीर अपराध प्रमाणित नहीं होता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतरिम राहत प्रदान की।
अदालत के निर्देश
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस की जाँच बाधित नहीं होगी और अगली सुनवाई तक कोलकाता पुलिस को इस मामले पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अदालत ने परमब्रत चटर्जी को भी जाँच में पूर्ण सहयोग देने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि अभिनेत्री स्वास्तिका मुखर्जी पुलिस नोटिस का जवाब देते हुए 23 मई को गरियाहाट थाने पहुँची थीं, जबकि चटर्जी ने थाने जाने के बजाय सीधे अदालत का रुख किया।
वायरल वीडियो और राजनीतिक पृष्ठभूमि
इस विवाद के बीच एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से प्रसारित हुआ। यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और अभिनेता रुद्रनील घोष द्वारा टेक्नीशियंस स्टूडियो में आयोजित एक बैठक का है, जिसमें परमब्रत चटर्जी भी उपस्थित थे। वीडियो में चटर्जी ने कथित तौर पर बताया कि पूर्व राज्य मंत्री अरूप बिस्वास और उनके भाई स्वरूप बिस्वास के दबाव में उन्हें तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार का समर्थन करना पड़ा था। वीडियो में उनका कथन है — 'उस समय मैंने अपने नवजात बच्चे का चेहरा देखकर और मन मारकर सब कुछ किया, क्योंकि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था।' यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
आगे की राह
मामले की अगली सुनवाई में हाईकोर्ट पुलिस की विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर की वैधता पर विचार करेगा। यह मामला पश्चिम बंगाल के मनोरंजन जगत और राजनीतिक हलकों दोनों में गहरी रुचि का केंद्र बना हुआ है।