नोएडा STF का बड़ा एक्शन: चीनी नागरिक समेत तीन गिरफ्तार, शेल कंपनियों से हवाला-मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क ध्वस्त
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की नोएडा यूनिट ने 22 जुलाई 2025 की रात एक बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला और शेल कंपनी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चीनी नागरिक लियाओ लॉन्गहुई सहित तीन आरोपियों को नोएडा के सेक्टर-93 स्थित पूर्वांचल सिल्वर सिटी सोसाइटी से गिरफ्तार किया। STF के अनुसार, यह गिरोह भारत में फर्जी कंपनियाँ खड़ी कर हवाला, मनी लॉन्ड्रिंग और अंडर इनवॉइसिंग जैसी आपराधिक गतिविधियाँ संचालित कर रहा था।
गिरफ्तारी और बरामदगी का ब्यौरा
22 जुलाई की रात लगभग 10 बजे STF ने मुख्य आरोपी लियाओ लॉन्गहुई के साथ उसके दो भारतीय सहयोगियों — चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार और कोशलेन्द्र — को हिरासत में लिया। आरोपियों के कब्जे से पाँच लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन, एक टैबलेट, दो चीनी पासपोर्ट, एक चीनी आईडी, दो पैन कार्ड, 10 कंपनियों की मोहरें, 11 अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, फर्जी कंपनियों से जुड़े दस्तावेज और ₹4 करोड़ 72 लाख 69 हजार 27 रुपये के बैंक चेक बरामद किए गए। इसके अलावा ₹15,400 रुपये नकद तथा नागालैंड के पते पर बना 'सैमुअल लोथा' नाम का एक फर्जी आधार कार्ड भी मिला, जिस पर लियाओ की ही फोटो लगी थी।
कैसे चलता था यह नेटवर्क
जाँच में सामने आया कि लियाओ लॉन्गहुई वर्ष 2018 में भारत आया था और उसका वैध वीजा 2020 में समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद वह पिछले करीब छह वर्षों से फर्जी दस्तावेजों के सहारे देश में अवैध रूप से रह रहा था। STF के अनुसार, वह अपने ससुर म्यूजेन यू और साले क्यूपिंग टैंग द्वारा स्थापित वाईटीएल मैन्युफैक्चरिंग प्राइवेट लिमिटेड का संचालन कर रहा था, जो कथित तौर पर मोबाइल फोन कवर बनाने का काम करती थी।
यह ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय एजेंसियाँ चीनी नागरिकों द्वारा संचालित अवैध वित्तीय नेटवर्क पर कड़ी नजर रख रही हैं। जाँच के अनुसार, चीन से महंगे दामों पर कच्चा माल मँगाकर दिल्ली के करोल बाग, नेहरू प्लेस समेत विभिन्न बाजारों में अंडर इनवॉइसिंग के जरिए बेचा जाता था और उससे उत्पन्न अवैध धन को हवाला नेटवर्क के माध्यम से ठिकाने लगाया जाता था।
शेल कंपनियों का जाल
STF की जाँच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने अपने कर्मचारियों और यहाँ तक कि अपने ड्राइवर के नाम पर भी कई शेल कंपनियाँ बना रखी थीं। इनमें हनुराज ट्रेडिंग सल्यूशन, एंटरप्राइजेज इंडिया, टीडीडेस्क एसेंशियल, जेड वन एंटरप्राइजेज, उपमेक्स इंडिया, मेजटेक पावर इंडिया और एक्सीलेंस मोबाइल टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियाँ शामिल हैं। इसके अलावा हांगकांग में पंजीकृत हैक हैंको कम्युनिकेशन ट्रेडिंग और हैक इंचियोन लिमिटेड का भी कथित तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला लेन-देन में उपयोग किया जा रहा था।
पूर्व से चल रही जाँच और संदिग्ध भूमिकाएँ
गौरतलब है कि वाईटीएल कंपनी से जुड़े एक पूर्व शेयरधारक रवि कुमार ढक्कर नटवरलाल पहले से ही फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन और जीएसटी नंबर प्राप्त करने के मामले में गौतमबुद्ध नगर जेल में बंद हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट संजीव कुमार की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है और उसकी गहन जाँच जारी है।
आगे की जाँच
जाँच एजेंसियाँ अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों, शेल कंपनियों, हवाला लेन-देन और विदेशी फंडिंग की कड़ियों को खंगाल रही हैं। यह नेटवर्क कितने वर्षों से सक्रिय था और इससे कितनी राशि का लेन-देन हुआ, इसका पूरा खुलासा जाँच पूरी होने के बाद होने की संभावना है।