बद्रीनाथ में साधु बना तमिलनाडु का लापता युवक, 'ऑपरेशन प्रहार' ने परिवार से मिलाया
सारांश
मुख्य बातें
बद्रीनाथ धाम से एक भावुक कहानी सामने आई है — तमिलनाडु के मदुरै जिले का युवक सतीश, जो मार्च 2026 से रहस्यमयी तरीके से लापता था, बद्रीनाथ में साधु के वेश में मिला। चमोली पुलिस के 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत चलाए गए सत्यापन अभियान ने न केवल युवक की पहचान उजागर की, बल्कि महीनों से बिछड़े परिवार को उससे मिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।
कैसे हुई पहचान
बद्रीनाथ कोतवाली पुलिस 'ऑपरेशन प्रहार' के अंतर्गत धाम में आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों का वृहद सत्यापन कर रही थी। इसी दौरान पुलिस की नज़र साधु के वेश में घूम रहे एक युवक पर पड़ी। पूछताछ के दौरान वह हिंदी का एक भी शब्द नहीं बोल पा रहा था, जिससे पुलिस को शक हुआ। गहन जांच में पता चला कि युवक तमिल भाषी है।
भाषा की बाधा को पार करने के लिए कांस्टेबल चन्दन सिंह नगरकोटी ने गूगल ट्रांसलेटर की सहायता से युवक से संवाद स्थापित किया। इस तकनीकी मदद से पता चला कि युवक तमिलनाडु के मदुरै जिले के असिनपट्टी पुलिस स्टेशन क्षेत्र का निवासी है।
अंतरराज्यीय समन्वय
कांस्टेबल चन्दन सिंह नगरकोटी ने अथक प्रयास करते हुए असिनपट्टी पुलिस स्टेशन में तैनात हेड कॉन्स्टेबल सेंथिल कुमार से संपर्क साधा। रिकॉर्ड खंगालने पर पुष्टि हुई कि युवक का नाम सतीश है और वह मार्च 2026 से लापता था — परिजन उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पहले ही दर्ज करा चुके थे। यह ऑपरेशन उत्तराखंड और तमिलनाडु — देश के दो छोरों — के बीच पुलिस समन्वय की एक उल्लेखनीय मिसाल बन गया।
परिवार का बद्रीनाथ पहुंचना
जैसे ही तमिलनाडु में सतीश के परिजनों को सूचना मिली कि उनका बेटा बद्रीनाथ धाम में सुरक्षित है, वे बिना एक पल गंवाए हवाई जहाज से देहरादून पहुंचे और वहां से दुर्गम पहाड़ी रास्तों को पार करते हुए कार से सीधे बद्रीनाथ आए। बद्रीनाथ कोतवाली में महीनों बाद जब माता-पिता और बेटे का आमना-सामना हुआ, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। सतीश अपने परिवार को देखते ही खुद को रोक नहीं पाया और उनके गले लगकर फूट-फूटकर रो पड़ा।
परिजनों की प्रतिक्रिया
वैधानिक कार्रवाई पूरी करने के बाद जब पुलिस ने सतीश को परिजनों के सुपुर्द किया, तो भावुक माता-पिता ने हाथ जोड़कर उत्तराखंड पुलिस का आभार जताया। उन्होंने कहा, 'हमारा तो साक्षात भगवान नारायण से साक्षात्कार हो गया है। बद्रीनाथ पुलिस ने हमें हमारा खोया हुआ संसार लौटा दिया।' गौरतलब है कि कांस्टेबल नगरकोटी तमिलनाडु से उत्तराखंड की लंबी यात्रा के दौरान परिजनों के लगातार संपर्क में रहे और उन्हें मार्गदर्शन व ढांढस देते रहे।
क्या है 'ऑपरेशन प्रहार'
बद्रीनाथ पुलिस द्वारा चलाया जा रहा 'ऑपरेशन प्रहार' धाम में आने वाले संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और सत्यापन के लिए शुरू किया गया एक वृहद अभियान है। यह ऑपरेशन तीर्थस्थल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ लापता व्यक्तियों की पहचान में भी सहायक साबित हो रहा है। सतीश का मामला इस अभियान की मानवीय सफलता का प्रतीक बन गया है।