10 अगस्त 2026
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शिवगंगे पहाड़ी पर लापता बेंगलुरु टेक इंजीनियर अद्वैत उपाध्याय: लैपटॉप में मिली चौंकाने वाली सर्च हिस्ट्री

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शिवगंगे पहाड़ी पर लापता बेंगलुरु टेक इंजीनियर अद्वैत उपाध्याय: लैपटॉप में मिली चौंकाने वाली सर्च हिस्ट्री

सारांश

बेंगलुरु के टेक इंजीनियर अद्वैत उपाध्याय 7 अगस्त से शिवगंगे पहाड़ी पर लापता हैं। उनके लैपटॉप में एआई टूल से की गई वे सर्च मिली हैं जो पहाड़ी से गिरने के परिणामों से जुड़ी थीं। पुलिस, एसडीआरएफ और ड्रोन टीमें तीन दिनों से तलाश में जुटी हैं; मृत्यु की पुष्टि अभी नहीं।

मुख्य बातें

अद्वैत उपाध्याय , बेंगलुरु के कडुगोडी निवासी टेक इंजीनियर, 7 अगस्त से शिवगंगे पहाड़ी पर लापता हैं।
उनके लैपटॉप में एक एआई टूल से की गई सर्च मिली, जिसमें पहाड़ी से गिरने के परिणाम खोजे गए थे।
पुलिस के अनुसार, उपाध्याय 4 अगस्त को ही — निर्धारित ट्रेक से तीन दिन पहले — शिवगंगे गए हो सकते हैं।
तलाशी अभियान में पुलिस, एसडीआरएफ, अग्निशमन सेवा और ड्रोन शामिल; अगुवाई सर्कल इंस्पेक्टर भरत गौड़ा कर रहे हैं।
पहाड़ी की चोटी पर खींची गई उपाध्याय की एक फोटो अन्य पर्यटक से मिली, जांच जारी।
पुलिस ने अभी तक उनकी मृत्यु की पुष्टि नहीं की है।

कर्नाटक पुलिस 7 अगस्त 2026 से शिवगंगे पहाड़ी पर लापता बेंगलुरु के टेक इंजीनियर अद्वैत उपाध्याय की तलाश में जुटी है। जांचकर्ताओं को उनके लैपटॉप से मिली सर्च हिस्ट्री के आधार पर आशंका है कि उन्होंने पहाड़ी से गिरने के संभावित परिणामों की जानकारी जुटाई थी, जिससे आत्महत्या की कोशिश का संदेह गहरा हो गया है। पुलिस ने अभी तक उनकी मृत्यु की पुष्टि नहीं की है और तलाशी अभियान जारी है।

कौन हैं अद्वैत उपाध्याय

अद्वैत उपाध्याय मूल रूप से मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं और बेंगलुरु के कडुगोडी इलाके में किराये पर रहते थे। वे बेंगलुरु की एक टेक कंपनी में कार्यरत थे। 7 अगस्त को वे ट्रेकिंग के लिए शिवगंगे पहुँचे और ट्रेक शुरू करने के कुछ देर बाद अपनी मंगेतर को एक फोटो भेजी — उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया।

लैपटॉप से मिले अहम सुराग

जांच के दौरान पुलिस ने उपाध्याय के घर से एक लैपटॉप बरामद किया। कथित तौर पर उस लैपटॉप में एक एआई टूल के ज़रिए की गई सर्च मिली, जिसमें यह जानकारी खोजी गई थी कि शिवगंगे पहाड़ी से गिरने पर किसी व्यक्ति की मृत्यु में कितना समय लग सकता है। पुलिस के अनुसार, एआई से प्राप्त जवाब में सुबह करीब 7:30 बजे पहाड़ी से गिरने पर मृत्यु की संभावना दर्शाई गई थी।

इसके अलावा, पहाड़ी की ऊँचाई और उससे गिरने के परिणामों से जुड़ी अन्य सर्च भी लैपटॉप में मिलीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन सबूतों के आधार पर यह भी संदेह है कि उपाध्याय अपनी निर्धारित ट्रेकिंग तारीख 7 अगस्त से पहले ही — संभवतः 4 अगस्त को — शिवगंगे गए होंगे।

तलाशी अभियान की स्थिति

लापता होने की सूचना के बाद से पिछले तीन दिनों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की अगुवाई नेलामंगला टाउन सर्कल इंस्पेक्टर भरत गौड़ा कर रहे हैं। इसमें पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएँ, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और पहाड़ी इलाकों के जानकार विशेषज्ञ शामिल हैं।

टीमें ड्रोन कैमरों और अन्य आधुनिक उपकरणों की सहायता से उन दुर्गम स्थानों की तलाशी ले रही हैं जहाँ पहुँचना सामान्य रूप से संभव नहीं है — जैसे संकरी घाटियाँ, खड़ी ढलानें और गहरी दरारें। एक अन्य पर्यटक द्वारा पहाड़ी की चोटी पर खींची गई उपाध्याय की एक फोटो भी जांचकर्ताओं के हाथ लगी है, जिसकी विश्लेषण जारी है।

शिवगंगे: पर्यटन स्थल, लेकिन चुनौतीपूर्ण भूगोल

शिवगंगे पहाड़ी बेंगलुरु के ग्रामीण जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है। पहाड़ी की चोटी पर स्थित 'शांतला ड्रॉप' एक लोकप्रिय पर्यटन बिंदु है, लेकिन यहाँ की खड़ी चढ़ाई और कठिन रास्ते इसे तलाशी अभियानों के लिए सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण बनाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु के टेक क्षेत्र में कार्यस्थल तनाव और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चर्चाएँ पहले से तेज़ हैं।

आगे क्या

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अभी तक उपाध्याय की मृत्यु की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और तलाशी जारी रहेगी। जांचकर्ता उपलब्ध सभी साक्ष्यों — लैपटॉप डेटा, फोटो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान — को मिलाकर उनके लापता होने से पहले की गतिविधियों की पूरी तस्वीर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अक्सर मुख्यधारा की कवरेज में नज़रअंदाज़ किया जाता है। एआई टूल का इस्तेमाल कर इस तरह की सर्च करना यह भी दर्शाता है कि तकनीक तक आसान पहुँच कभी-कभी संकट को और गहरा कर सकती है। कार्यस्थल के दबाव, सामाजिक अलगाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता की कमी — ये तीनों मिलकर एक ऐसा माहौल बनाते हैं जिसमें ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं। सवाल यह है कि क्या टेक कंपनियाँ और नीति-निर्माता इसे गंभीरता से लेंगे, या यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियों तक सिमट कर रह जाएगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अद्वैत उपाध्याय कौन हैं और वे कब से लापता हैं?
अद्वैत उपाध्याय इंदौर, मध्य प्रदेश के मूल निवासी और बेंगलुरु के कडुगोडी में रहने वाले टेक इंजीनियर हैं। वे 7 अगस्त 2026 को शिवगंगे पहाड़ी पर ट्रेकिंग के लिए गए और तब से लापता हैं।
पुलिस को आत्महत्या की आशंका क्यों है?
पुलिस को उपाध्याय के लैपटॉप में एआई टूल से की गई ऐसी सर्च मिली है जिसमें शिवगंगे पहाड़ी से गिरने के परिणाम और मृत्यु की संभावना खोजी गई थी। इन सर्च और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांचकर्ताओं को आत्महत्या की कोशिश का संदेह है।
तलाशी अभियान में कौन-कौन शामिल है?
तलाशी अभियान में पुलिस, अग्निशमन और आपातकालीन सेवाएँ, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और पहाड़ी इलाकों के विशेषज्ञ शामिल हैं। नेलामंगला टाउन सर्कल इंस्पेक्टर भरत गौड़ा इस अभियान की अगुवाई कर रहे हैं और ड्रोन कैमरों से दुर्गम क्षेत्रों की तलाशी ली जा रही है।
शिवगंगे पहाड़ी पर तलाशी इतनी मुश्किल क्यों है?
शिवगंगे पहाड़ी की खड़ी चढ़ाई, संकरी घाटियाँ और गहरी दरारें तलाशी को बेहद चुनौतीपूर्ण बनाती हैं। पहाड़ी की चोटी पर स्थित 'शांतला ड्रॉप' जैसे क्षेत्र पर्यटकों में लोकप्रिय हैं, लेकिन बचाव दलों के लिए ये सबसे कठिन स्थान हैं।
क्या उपाध्याय की मृत्यु की पुष्टि हो गई है?
नहीं। पुलिस ने अभी तक अद्वैत उपाध्याय की मृत्यु की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। तलाशी अभियान जारी है और जांचकर्ता सभी उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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