दयारा बुग्याल में लापता ट्रैकर बबीता पांडेय की तलाश 8वें दिन भी जारी, नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की टीम अभियान में शामिल
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के भटवाड़ी क्षेत्र स्थित दयारा बुग्याल में 29 मई से लापता महिला ट्रैकर बबीता पांडेय का 8 दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिल सका है। लगातार बेनतीजा रही खोज के बाद जिला प्रशासन ने अभियान को और विस्तार देते हुए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) की विशेषज्ञ टीम को भी मौके पर भेज दिया है।
घटनाक्रम: कब और कैसे लापता हुईं बबीता पांडेय
रामनगर निवासी बबीता पांडेय 29 मई को दयारा बुग्याल ट्रैक पर निकली थीं। ट्रैकिंग के दौरान वह रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गईं। घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और बचाव एजेंसियों ने तलाशी अभियान शुरू किया, परंतु एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका है।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में ट्रैकिंग सीजन अपने चरम पर है और दयारा बुग्याल जैसे ऊँचाई वाले बुग्यालों में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी हुई है।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की विशेषज्ञ टीम तैनात
दयारा बुग्याल का भूगोल — ऊँचे पहाड़, घने जंगल, गहरी खाइयाँ और कठिन ट्रैकिंग मार्ग — खोज अभियान को अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनाता है। इन्हीं दुर्गम परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशन में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की प्रशिक्षित टीम को अभियान में शामिल किया गया है। टीम क्षेत्र में पहुँचकर तलाशी शुरू कर चुकी है।
बहु-एजेंसी संयुक्त अभियान
बबीता पांडेय की तलाश में अब तक कई एजेंसियाँ संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। इनमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), पुलिस विभाग, वन विभाग, राजस्व विभाग और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की त्वरित प्रतिक्रिया टीम शामिल हैं।
विभिन्न दल संभावित ट्रैकिंग मार्गों, जंगलों, नदी-नालों, गहरी खाइयों और अन्य दुर्गम इलाकों में लगातार खोजबीन कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, अभियान में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन भी तैनात किए जाएँगे।
परिजनों की उम्मीद बरकरार
बबीता पांडेय के परिजन उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए हुए हैं। स्थानीय लोग और प्रशासनिक अधिकारी भी मानते हैं कि संयुक्त प्रयासों से जल्द ही कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
गौरतलब है कि दयारा बुग्याल उत्तरकाशी के सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग गंतव्यों में से एक है, और इस घटना ने पहाड़ी ट्रैकिंग में सुरक्षा उपायों पर नए सिरे से चर्चा छेड़ दी है। अभियान की निगरानी जारी है और अगले कुछ दिन खोज की दिशा में निर्णायक साबित हो सकते हैं।