त्रिपुरा में विपक्ष का वॉकआउट: तीन नए निजी विश्वविद्यालय विधेयकों पर हंगामा

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त्रिपुरा में विपक्ष का वॉकआउट: तीन नए निजी विश्वविद्यालय विधेयकों पर हंगामा

सारांश

अगरतला में त्रिपुरा विधानसभा में विपक्षी दलों ने निजी विश्वविद्यालयों के लिए तीन विधेयकों के विरोध में वॉकआउट किया। यह हंगामा इस बात को लेकर हुआ कि क्या ये संस्थाएं उच्च शिक्षा के मानकों का पालन कर सकेंगी। जानिए इस मुद्दे की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • त्रिपुरा विधानसभा में विपक्ष का वॉकआउट
  • निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना पर विवाद
  • विपक्ष के नेता ने अनुभव की कमी की ओर इशारा किया
  • सरकार ने विपक्ष के तर्कों को खारिज किया
  • त्रिपुरा में पहले से मौजूद पांच निजी विश्वविद्यालय

अगरतला, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शुक्रवार को त्रिपुरा विधानसभा में भारी हंगामा हुआ, जब विपक्षी सीपीआई(एम) और कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से संबंधित तीन विधेयकों के पारित होने के खिलाफ एकजुट होकर सदन से वॉकआउट किया।

विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी और कांग्रेस विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने इन तीन बिलों पर चर्चा करते हुए आरोप लगाया कि जिन संगठनों द्वारा विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव दिया जा रहा है, उनके पास उच्च शिक्षा संस्थानों के संचालन का पर्याप्त अनुभव नहीं है।

पूर्व मंत्री और सीपीआई (एम) के त्रिपुरा राज्य सचिव चौधरी ने बिलों में कई कमियों की ओर इशारा करते हुए मांग की कि इन्हें चुनिंदा समितियों के पास भेजा जाए।

उन्होंने कहा कि सरकार को निजी संगठनों को उच्च शिक्षा संस्थान खोलने की अनुमति देने में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसे कदमों के खिलाफ चेतावनी दी जो छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल सकते हैं।

रॉय बर्मन ने भी इसी तरह की चिंताएं व्यक्त कीं और कहा कि विश्वविद्यालय का प्रस्ताव देने वाले संगठनों के पास न तो पर्याप्त अनुभव है और न ही उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों का पालन किया है। उन्होंने तीनों बिलों को वापस लेने की मांग की।

हालांकि, उच्च शिक्षा मंत्री किशोर बर्मन ने विपक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस के बाद, सीपीआई (एम) और कांग्रेस के विधायक सदन के वेल में पहुंचे और विधानसभा अध्यक्ष राम पादा जमातिया के आसन के सामने नारे लगाने लगे। कुछ मिनटों तक हंगामा चलता रहा, और अंततः विपक्ष के सदस्य सदन से बाहर चले गए।

बिलों के उद्देश्यों और कारणों के बयान के अनुसार, त्रिपुरा में वर्तमान में पांच निजी विश्वविद्यालय हैं। बयान में कहा गया है कि हालाँकि राज्य ने पिछले दो दशकों में शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, फिर भी उच्च शिक्षा में और विकास की गुंजाइश बाकी है, क्योंकि त्रिपुरा को 1972 में राज्य का दर्जा मिला था।

इस बीच, नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी कंप्यूटर साक्षरता मिशन ने त्रिपुरा में एक ज्ञान-आधारित और तकनीकी रूप से सक्षम संस्थान, अटल बिहारी वाजपेयी कौशल विश्वविद्यालय, स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।

इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, कानून, नर्सिंग, पैरामेडिकल विज्ञान, फार्मेसी, आतिथ्य और पर्यटन, जनजातीय मामले, खेल, कौशल विकास, ललित कला, डिजाइन और प्रदर्शन कला के क्षेत्रों में कार्यक्रम पेश करना है।

इसी तरह, गुजरात स्थित रिसर्च एंड ज्ञान फॉर नोबल अपलिफ्टमेंट ट्रस्ट ने त्रिपुरा में इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है, जिसका मुख्य ध्यान विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, कानून, नर्सिंग, पैरामेडिकल विज्ञान, फार्मेसी, आतिथ्य और पर्यटन, जनजातीय मामले, खेल, कौशल विकास, ललित कला, डिजाइन और प्रदर्शन कला सहित विभिन्न विषयों पर होगा।

इसके अलावा, हापुड़ (उत्तर प्रदेश) स्थित 'भारत एजुकेशनल एंड कल्चरल डेवलपमेंट ट्रस्ट' ने राज्य में 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी और संबद्ध कौशल विश्वविद्यालय' स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।

यह प्रस्तावित संस्थान विज्ञान, प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, कानून, नर्सिंग, पैरामेडिकल विज्ञान, फार्मेसी, आतिथ्य और पर्यटन, जनजातीय मामले, खेल, कौशल विकास, ललित कला, डिजाइन और प्रदर्शन कला जैसे विविध क्षेत्रों में कार्यक्रम पेश करने की योजना बना रहा है।

Point of View

और यह जरूरी है कि सरकार इन चिंताओं को गंभीरता से ले। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना एक प्राथमिकता होनी चाहिए।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

त्रिपुरा में कितने निजी विश्वविद्यालय हैं?
त्रिपुरा में वर्तमान में पांच निजी विश्वविद्यालय हैं।
विपक्ष ने विधेयकों के खिलाफ क्यों वॉकआउट किया?
विपक्ष का कहना है कि विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले संगठनों के पास पर्याप्त अनुभव नहीं है।
हंगामे के बाद क्या हुआ?
विपक्ष के सदस्यों ने विधानसभा से बाहर जाकर नारेबाजी की और वॉकआउट किया।
क्या सरकार ने विपक्ष के तर्कों को माना?
नहीं, उच्च शिक्षा मंत्री ने विपक्ष के तर्कों को खारिज कर दिया।
नए विश्वविद्यालयों का उद्देश्य क्या है?
ये विश्वविद्यालय विज्ञान, प्रौद्योगिकी, मानविकी और अन्य क्षेत्रों में शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखते हैं।
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