ट्विशा शर्मा केस: परिवार का आरोप — जांच में लापरवाही, समर्थ सिंह का परिवार कर रहा सिस्टम का दुरुपयोग
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल में ट्विशा शर्मा की कथित आत्महत्या के मामले में पीड़ित परिवार ने 21 मई 2026 को गंभीर आरोप लगाए हैं कि पुलिस जांच में शुरू से ही घोर लापरवाही बरती गई और फरार पति समर्थ सिंह का परिवार अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर मामले की कार्रवाई को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे न्याय के लिए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।
जांच में लापरवाही के आरोप
ट्विशा के चाचा लोकेश शर्मा ने कहा कि मामले को शुरुआत से ही लापरवाही से संभाला गया। उनके अनुसार, एफआईआर तीन दिन बाद दर्ज की गई और उन्हें आज तक यह नहीं बताया गया कि घटनास्थल को सील किया गया है या नहीं, तथा वहां निगरानी के लिए कोई अधिकारी तैनात है या नहीं। उन्होंने कहा कि पुलिस को पहले इन सभी लापरवाहियों पर सफाई देनी चाहिए।
परिवार पहले भी आरोप लगा चुका है कि जांच अधिकारी ने पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों के सामने वह बेल्ट पेश नहीं की, जिससे कथित तौर पर फांसी लगाई गई थी — यह जांच की निष्पक्षता पर एक बड़ा सवाल है।
सीसीटीवी फुटेज और सबूतों से छेड़छाड़ का दावा
ट्विशा के चचेरे भाई आशीष शर्मा ने दावा किया कि कोर्ट में पेश की गई सीसीटीवी फुटेज साफ दिखाती है कि जो सबूत पुलिस को जब्त करने चाहिए थे, वे आरोपी पक्ष के पास थे। उन्होंने कहा, 'हर कदम पहले से तय है और सबूतों से छेड़छाड़ की जा रही है।' उनका मानना है कि कोर्ट को भी इस पर स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।
परिवार ने यह भी बताया कि ट्विशा के अंतिम संस्कार से पहले दूसरे पोस्टमार्टम की मांग की गई थी, लेकिन उससे बचा जा रहा है। आशीष शर्मा ने कहा, 'परिवार बहुत दर्द में है, खासकर इसलिए क्योंकि हम उसका अंतिम संस्कार भी नहीं कर पा रहे हैं।'
अंतरिम जमानत को हाई कोर्ट में चुनौती
परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील अंकुर पांडे ने बताया कि वे समर्थ सिंह की मां और पूर्व जिला न्यायाधीश गिरीबाला सिंह को भोपाल जिला अदालत से मिली अंतरिम जमानत को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच में चुनौती देंगे। गिरीबाला सिंह इस मामले में सह-आरोपी हैं।
इस बीच, फरार आरोपी समर्थ सिंह ने गुरुवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में खुद अंतरिम जमानत के लिए आवेदन दायर किया।
मुख्यमंत्री से मुलाकात और आश्वासन पर सवाल
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई मुलाकात के संदर्भ में आशीष शर्मा ने कहा कि आश्वासन का तभी कोई मतलब होगा जब जांच सही तरीके से हो। उनके अनुसार, समर्थ सिंह का परिवार प्रभावशाली है और वे खुद को बचाने के लिए सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
परिवार की चेतावनी और आगे की लड़ाई
ट्विशा के चचेरे भाई ने चेतावनी दी कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला तो यह मामला भी बाकी कई मामलों की तरह लोगों की यादों से मिट जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन और न्यायपालिका आगे भी ताकतवर लोगों का ही साथ देंगे। परिवार ने स्पष्ट किया है कि वे हाई कोर्ट के बाद जरूरत पड़ने पर सर्वोच्च न्यायालय तक जाएंगे।