UCC विधेयक पर कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी: 'कुछ प्रावधान सकारात्मक, पर पूरा बिल पढ़ना बाकी'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पर कांग्रेस सांसद ईशा खान चौधरी ने 29 जून 2026 को कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक उन्होंने बिल को पूरी तरह पढ़ा नहीं है, इसलिए इसके सभी प्रावधानों पर विस्तृत टिप्पणी करना उनके लिए संभव नहीं होगा।
बिल पर प्रारंभिक प्रतिक्रिया
ईशा खान चौधरी ने कहा, 'अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके आधार पर कुछ प्रावधान सकारात्मक प्रतीत होते हैं।' उन्होंने विशेष रूप से उस प्रस्ताव का उल्लेख किया जिसमें सरकारी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों से क्षतिपूर्ति कराने की बात कही गई है। उनके अनुसार, यह कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम हो सकता है।
कांग्रेस का रुख: जनहित सर्वोपरि
चौधरी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) हमेशा उन निर्णयों का समर्थन करेगी जिनसे आम जनता का हित सधे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रस्तावित विधेयक में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी प्रावधान शामिल किए गए हैं, तो यह स्वागतयोग्य पहल होगी। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि बिल का गहन अध्ययन किए बिना अंतिम राय देना उचित नहीं होगा।
राज्य सरकार पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़ चुके विधायकों के संबंध में पार्टी के रुख पर स्पष्टीकरण माँगा। साथ ही उन्होंने राज्य में सामने आए कथित घोटालों की जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक कर विधानसभा में पेश करने की माँग की। चौधरी ने कहा कि जनता को सच्चाई जानने का अधिकार है और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई होनी चाहिए।
बागी सांसदों पर जवाबदेही की माँग
डोला सेन द्वारा बागी सांसदों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की माँग पर प्रतिक्रिया देते हुए ईशा खान चौधरी ने कहा कि TMC के भीतर बड़ी टूट हुई है और कई नेताओं ने पार्टी छोड़कर नए राजनीतिक गुट बना लिए हैं। उनका मत है कि यदि कोई सांसद अपनी विचारधारा बदलता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए और फिर जनता के बीच जाकर नया जनादेश लेना चाहिए।
लोकतांत्रिक परंपरा पर जोर
चौधरी ने कहा कि मतदाताओं ने जनप्रतिनिधियों को एक विशेष विचारधारा और जनादेश के आधार पर चुना था। ऐसे में दल-बदल के बाद नया जनादेश लेना लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप होगा। उन्होंने दावा किया कि राज्य में आम लोग भी ऐसे जनप्रतिनिधियों से जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में जब विधेयक का पूर्ण पाठ उपलब्ध होगा, तब कांग्रेस की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की संभावना है।